धोखेबाज फायनेंस कम्पनियों की सम्पत्ति होगी कुर्क

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रायपुर ।   राज्य सरकार ने जमाकर्ताओं से धोखाधड़ी करने वाली निजी क्षेत्र की बैंकिंग और फायनेंस कम्पनियों को चेतावनी दी है कि उनकी सम्पत्ति कुर्क कर ली जाएगी। इस प्रकार की कम्पनियों के पदाधिकारियों की सम्पत्ति भी राजसात अथवा कुर्क की जाएगी। यह जानकारी शुक्रवार को यहां प्रदेश सरकार के संस्थागत वित्त संचालनालय द्वारा आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में दी गई।
अधिकारियों ने कार्यशाला में बताया कि धोखेबाज बैंकिंग और फायनेंस कम्पनियों के खिलाफ यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ के निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम 2005 के तहत की जाएगी। ऐसी फर्जी वित्तीय कम्पनियों को दस लाख रूपए तक जुर्माना किया जा सकेगा और उनके विभिन्न पदाधिकारियों को दस वर्ष तक कारावास की सजा हो सकती है। कार्यशाला में छत्तीसगढ़ के निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम 2005 के विभिन्न प्रावधानों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। इस अवसर पर वित्त विभाग के सचिव  अमित अग्रवाल, गृह विभाग के सचिव  अरूणदेव गौतम, संचालक संस्थागत वित्त सह विशेष सचिव वित्त डॉ. कमलप्रीत सिंह, संचालक अभियोजन  एम.डब्ल्यू अंसारी और सी.आई.डी. के ओ.एस.डी. श्री पी एन तिवारी सहित उपस्थित  थे। कार्यशाला में राज्य के सभी जिलों के  एडिशनल कलेक्टर और एडिशनल एस.पी. को बुलाया गया था।
कार्यशाला में बताया गया कि छत्तीसगढ़ के निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम 2005 छत्तीसगढ़ राजपत्र में 23 जुलाई  को प्रकाशित होने की तिथि से राज्य में लागू है। इस अधिनियम के तहत अगर कोई कम्पनी जमाकर्ताओं को धोखा देने के इरादे से कार्य कर रही है और उसके द्वारा जमा राशि वापस नहीं की गई है, तो ऐसे में उस कम्पनी या उनके विभिन्न पदाधिकारियों (संप्रवर्तक, भागीदार निदेशक, प्रबंधक या सदस्य) की सम्पत्ति सक्षम प्राधिकारी द्वारा कुर्क की जा सकती है। जहां कोई कम्पनी कपटपूर्ण कार्य करती है तो उनके प्रबंधन, कारोबार या क्रियाकलापों के संचालन के लिए उत्तरदायी पदाधिकारियों (सम्प्रवर्तक, भागीदार, निदेशक, प्रबंधक या कोई अन्य व्यक्ति या कर्मचारी) को दोष सिद्ध होने पर कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसकी अवधि तीन वर्ष से कम नहीं होगी, बल्कि इस कारावास की अवधि को दस वर्ष तक बढ़ाया जा सकेगा। इसी प्रकार जुर्माना एक लाख रूपए से कम नहीं होगा, बल्कि जुर्माना पांच लाख रूपए तक बढ़ाया जा सकता है। ऐसे वित्तीय स्थापना को भी जुर्माना देना होगा, जो तीन लाख रूपए से कम नहीं होगा, बल्कि इसे दस लाख रूपए तक बढ़ाया जा सकता है। कार्यशाला के प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए संचालक संस्थागत वित्त सह विशेष सचिव वित्त डॉ. कमलप्रीत सिंह ने कहा कि यदि इस अधिनियम के अन्तर्गत नियमों के बारे में सुझाव हों, तो उन्हें संचालनालय में प्रेषित कर सकते हैं। इन सुझावों का पहले परीक्षण किया जाएगा और उपयुक्त होने पर सुझावों के आधार पर नियमों में संशोधन किया जा सकता है।

 

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