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नारायणपुर जिले में शत प्रतिशत लक्ष्य पूरा कर मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान का द्वितीय चरण पूर्ण,मलेरिया के साथ ही एनीमिया और कुपोषण मुक्ति की पहल

नारायणपुर-मानसून की दस्तक के बाद बीते 15 जून से शुरू हुए मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान का द्वितीय चरण शत प्रतिशत लक्ष्य पूरा कर 31 जुलाई को समाप्त हो गया। जिले में मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान का असर दिखने लगा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस साल जनवरी-फरवरी में इसके पहले चरण के दौरान 173991 लोगों की मलेरिया जांच की गई थी। जांच में 11551 महिला, पुरूष और बच्चे मलेरिया पॉजिटिव पाये गए, जिनका तत्काल इलाज किया गया था। उस समय जांच किए गए 1 लाख 73 हजार लोगों में से 11551 हजार(6.6 प्रतिशत) मलेरिया पीड़ित पाए गए थे। अभी अभियान के दूसरे चरण के दौरान मलेरिया पॉजिटिव पाए गए लोगों की संख्या में उल्लेखनीय कमी देखी गयी है। दूसरे चरण में अभियान का दायरा बढ़ाते हुए पहले से अधिक क्षेत्र एवं जनसंख्या को शामिल कर 1 लाख 58 हजार लोगों के परीक्षण का लक्ष्य रखा गया है।

इस लक्ष्य को जिले के स्वास्थ्य योद्धाओं ने पूरा कर लक्ष्य से अधिक लोगों की मलेरिया जांच की है। दुसरे चरण में 1 लाख 60 हजार लोगों के रक्त की जांच की गई है, जो कि लक्ष्य का 101 प्रतिशत है। इनमें से 4 प्रतिशत यानि 6465 लोग मलेरिया पॉजिटिव पाए गए हैं। जो पहले चरण में पाए गए पॉजिटिव व्यक्तियो में से 5086 कम है। प्रथम चरण की अपेक्षा द्वितीय चरण में मलेरिया पॉजिटिव व्यक्तियों की संख्या में कमी आयी है। प्रथम चरण में किये गये प्रयासों के कारण ही यह कमी देखी जा रही है। ज्ञातव्य हो कि नारायणपुर जिले को मलेरिया, एनीमिया और कुपोषण से मुक्त करने के उद्देश्य से मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान की शुरूआत की गई है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ आनंदराम गोटा ने जानकारी देते हुए बताया कि इस अभियान में मलेरिया के बचाव की जानकारी लोगों तक पहुंचाने हेतु व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया था। उन्होंने बताया कि इस क्रम में अब तक जिले के 30238 घरांे का सर्वे किया गया है। जिसमें अर्धसैनिक बलों के कैम्प भी शामिल है। डॉ गोटा ने बताया कि अभियान के दौरान अब तक 88 घरों में मलेरिया के लार्वा मौजूद मिले। जिन्हें मौके पर ही सर्वेक्षण दल द्वारा नष्ट किया गया। दल द्वारा मच्छरदानी देकर उसे लगाने के लिए भी लोगों को प्रेरित किया जा रहा है। मलेरिया की जांच व उपचार के साथ ही सर्वे दल द्वारा लोगों को इससे बचाव और मच्छरदानी लगाकर सोने के लिए जागरूक किया जाता है। इसका भी सकारात्मक असर देखा गया है। अभी दूसरे चरण के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम ने विभाग द्वारा दिए गए मेडिकेटेड मच्छरदानी 34032 घरों में नियमित उपयोग करते हुए पाया।

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मलेरिया पाए जाने पर दल के सदस्य पीड़ितों को तत्काल अपने सामने ही दवा की पहली खुराक खिलाते हैं। गांव में पदस्थ स्वास्थ्य अमले द्वारा मरीजों का नियमित फालो-अप किया जाता है। दवा लेते समय मरीज का पेट खाली न रहे, इसके लिए स्थानीय स्तर पर तैयार रेडी-टू-ईट खाद्य सामग्री भी खिलाते हैं। मरीज दवाई की पूरी खुराक ले रहे हैं या नहीं, इसकी स्थानीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता एवं मितानिनें निगरानी करती हैं। पुष्टि के लिए मरीजों से दवाईयों के खाली रैपर भी संग्रहित किए जाते हैं। हर घर और हर व्यक्ति की जांच सुनिश्चित करने के लिए घरों में स्टीकर चस्पा कर जांच किए गए लोगों के पैर के अंगूठे में निशान लगाकर मार्किंग भी की जाती है।

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