निगम चुनाव घमासानः कहीं प्रत्याशियों का टोंटा…तो कहीं बड़े चेहरे की तलाश…क्या कायम रहेगा अखिलेश चन्द्र का रिकार्ड

बिलासपुर—विधानसभा लोकसभा चुनाव के बाद निकाय चुनाव ने भी दस्तक दे दिया है। एक डे़ढ़ महीने बाद आदर्श आचार संहिता लग जाएगी। प्रत्याशियों के नाम का एलान कर दिया जाएगा। खासकर 13 नगर निगम क्षेत्र में आरक्षणवार घोषणा के बाद बहरहाल सरगर्मियां भी तेज हो गयी है। नगर पंचायतों और नगरपालिकाओं में भी चुनावी की सुगबुगाहट तेज हो गयी है। बिलासपुर निगम क्षेत्र विस्तार के बाद मतदाताओं में समय से पहले संभावित प्रत्याशियों के नाम को दिलचस्पी बढ़ गयी है। स्मार्ट सिटी बनने और निगम विस्तार के बाद बिलासपुर नगर निगम का पहला चुनाव होगा। एक नगर पालिका,दो नगर पंचायत समेत 15 ग्राार् पंचायतों के जुड़ने से बिलासपुर नगर निगम की ना केवल आबादी बल्कि क्षेत्र भी बढ़ गया है। पढ़िए सीजी वाल में निगम क्षेत्र के 1 से 70 वार्डों की चुनावी रिपोर्ट–

                            परिसीमन और आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रत्याशियों की तलाश जोरों पर है। कई वार्डों में प्रत्याशियों की बाढ़ है तो कई वार्ड ऐसे भी हैं जहां दावेदारी तो दूर की बात है..बल्कि प्रत्याशियों का भयंकर टोंटा है। कई वार्ड तो ऐसे हैं जहां आरक्षण के बाद एक भी चेहरा सामने आने को तैयार नहीं है कि पार्षद टिकट की दावेदारी करे। यदि है चेहरा है भी तो वह किसी पार्टी विशेष का कार्यकर्ता नहीं है..इतना ही ऐसे चेहरे राजनीति से अपने आप को दूर रखना चाहते हैं। हां वोट करने की बात जरूर करते हैं। आइए जानने की कोशिश करते हैं कि आज वार्ड क्रमांक 13 से 17 की स्थिति को।

वार्ड क्रमांक–13…दीनदयाल मंगला नगर..सामान्य

                    शहर से लगा मंगला गांव बिलासपुर की खास पहचान है। अरपा की बेसिन पर बसा मंगला के लोग बहुत जागरूक मतदाता के दायरे में आते हैं। बेशक यह शहर का हिस्सा कभी नहीं रहा। लेकिन शहर का हिस्सा ही बनकर रहा। मंगला का कुछ क्षेत्र एक समय विकास नगर और विष्णु नगर वार्ड का हिस्सा हुआ करता था। निगम सीमा विस्तार के बाद मंगला गांव वार्ड क्रमांक 13 दीनदयाल नगर के नाम से सामने आया। यद्यपि स्थानीय लोगों ने मंगला को निगम में शामिल होने पर खुशी जाहिर की। लेकिन इस बात को लेकर जरूर विरोध किया कि चूंकि पूरा गांव निगम में शामिल किया गया है। इसलिए वार्ड का नाम मंगलानगर किया जाए। क्योंकि दीनदयाल नगर मंगला ग्रामपंचायत का हिस्सा यानि कालोनी है। दावा आपत्ती के बाद प्रशासन ने बीच का रास्ता निकाला और वार्ड का नाम दीनदयालनगर मंगला कर दिया। बताते चलें कि निगम में शामिल होने से पहले मंगला की पहचान ग्रामपंचायत के रूप में थी।

                                                                                  मंगला क्षेत्र मिश्रित बस्ती है। यहां कर्मचारी से लेकर किसान रहता है। मंगला पटेल बहुल्य क्षेत्र हैं। यहां मतादाताओं की कुल संख्या 6121 है। ग्राम पंचायत चुनाव के समय मंगला हमेशा सुर्खियों में रहा है। ज्वाला प्रसाद  ने मंगला ग्राम पंचायत की पन्द्रह साल तक सरपंची किया। इस दौरान अपने काम काज को लेकर कम घर परिवार की गतिविधियों से ज्यादा सुर्खियों में रहा। ज्वाला प्रसाद कभी भाजपा के खेमें नजर आए तो कभी कांग्रेस का झंडा उठाते पाये गए। फिलहाल इस समय कांग्रेस से टिकट की दावेदारी करेंगे। ज्वाला प्रसाद के पन्द्रह साल के शासन को नर्मदा पटेल ने ध्वस्त किया। नर्मदा पटेल का स्वभाव काफी सौम्य है। खुद को कांग्रेस का जमीनी कार्यकर्ता मानते हैं। लेकिन उन्हे पांच साल सरपंची कार्यकाल पूरा करने का मौका नहीं मिला। लगातार अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ा। गुटीय राजनीति के शिकार में उन्हें ढाई साल में पद छोड़ना पड़ा। अपने संक्षिप्त कार्यकाल में नर्मदा ने विकास का जमकर काम किया।

                      पिछले ढाई साल से मंगला पंचायत भाजपा नेता रमेश पटेल के प्रभार में चल रहा है। रमेश पटेल ज्वाला सूर्यवंशी की पसंद हैं। यह अलग बात है कि ज्वाला प्रसाद कांग्रेस से तो रमेश पटेल भाजपा से पार्षद टिकट दावेदार हैं। भाजपा से दीनदयाल कालोनी निवासी धीरेन्द्र दुबे भाजपा संगठन में पदाधिकारी हैं। वह भी भाजपा की तरफ से टिकट की दावेदारी कर रहे हैं।

                             यदि कुछ उलटफेर हुआ तो जिला कांग्रेस कमेटी अनिल सिंह चौहान को वार्ड 13 से मैदान में उतार सकती है। अनिल सिंह चौहान अधिवक्ता,जिला कांग्रेस बाड़ी में महामंत्री और प्रवक्ता हैं। पढ़े लिखे होने के साथ मृदुभाषी और कांग्रेस के ऊर्जावान युवा नेता भी है। अनिल सिंह को संगठन में नयी सोच और काम के लिए जाना जाता है। बहरहाल अनिल सिंह चुनाव लड़ने पर संगठन के काम को वरियता देते हैं।

वार्ड क्रमांक—14…मिनीमाता नगर…अनुसूचित जाति. सामान्य

मिनीमाता वार्ड में सर्वाधिक मतदाता पिछड़ा वर्ग से हैं। लेकिन वार्ड अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित हो गया है। यहां मतदाताओं की. कुल. संख्या 6879 है। इस वार्ड में कुदुदण्ड के कुछ क्षेत्र 27 खोली के पीछे का इलाका,गंगानगर कालोनी शुभम बिहार कालोनी क्षेत्र को शामिल किया गया है। दोनो दलो के लिए प्रत्याशी बहुत बड़ी समस्या है।

                          भाजपा और कांग्रेस दोनो ही दलों को अदद प्रत्याशी की तलाश है। यद्यपि यहां विकास के बहुत हुए हैं। लेकिन प्रत्याशी किसी दल को नहीं मिल रहे हैं। चूंकि  क्षेत्र में आदिवासी की संख्या गिनतियों मेंं है। है तो सभी पढे लिखे और नौकरी वाल हैं। फिलहाल जिस दल ने भी सम्पर्क किया है सबको एक ही जवाब मिल रहा है कि चुनाव लड़ने के इच्छुक नहीं हैं। ऐसे में यहां से कोई महिला प्रत्याशी भी सामने नहीं आ रही है।  बावजूद इसके दोनों दल के नेता पढ़े लिखे क्रिश्चियन आदिवासी परिवार के घरों में लगातार प्रत्याशी के लिए सेंधमारी कर रहे हैं। दोनों दलों को भरोसा है कि दाल जरूर गलेगी।

वार्ड. क्रमांक.–15–विकास. नगर. . . ओबीसी. महिला

.                        वार्ड बनने के बाद मतलब आजादी के बाद पिछली बार यानि पहली बार विकास नगर सामान्य  सीट के रूप में सामने आया था। और कांग्रेस ने पहली बार वार्ड जीत कर झंडा फहराया। इस बार विकास नगर ओबीसी महिला के खाते में गयी है। विकासनगर जैसा नाम है वार्ड में वेसा वैसा काम भी हुआ है। सच तो यह है कि विकास नगर में अब कोई काम नहीं बचा है। हां समय समय पर योजनाओं को लेकर तात्कालिक काम तो रहते ही हैं।

                                  विकास नगर में अखिलेश चन्द्र वाजपेयी पिछले पांच साल से पार्षद हैं। परिसीमन से पहले विकास नगर को वार्ड क्रमांक के एक के नाम से जाना जाता था।अखिलेश चन्द्र वाजपेयी से पहले वार्ड क्रमांक एक पर हमेशा भाजपा का कब्जा रहा है। पहली बार अखिलेश चन्द्र ने चुनाव लडा। ना केवल चुनाव जीता बल्कि निगम चुनाव में भाजपा प्रत्य़ाशी को रिकार्ड मतों से हराया भी। यह रिकार्ड आज भी कायम है। फिलहाल चुनाव सिर पर है यदि कोई इस रिकार्ड तोड़ दे तो ठीक लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में ऐसा होता दिखाई नहीं दे रहा है।

                            बतातें चले कि वाजपेयी परिवार का क्षेत्र ही नहीं बल्कि बिलासपुर में बहुत सम्मान है। पिछले पांच सालों में विकास नगर में जितना काम हुआ है शायद ही उतना काम जूझ कर किसी पार्षद ने अपने वार्ड में कराया हो। चौबिस घंटे सेवा देने वाले पार्षद अखिलेश चन्द्र प्रदीप वाजपेयी  कांग्रेस ही नहीं बल्कि निगम के लोकप्रिय पार्षद हैं। जाहिर सी बात है कि इस बार अखिलेश वाजपेयी चुनाव तो नहीं लड़ेंगे। यद्यपि वार्ड हाथ से निकल जाने से दखी हैं। लेकिन दावा भी करते हैं पार्टी जिसको भी टिकट देगी उसे भी रिकार्ड मतों से ही जिताएंगे।

                अभी तक कांग्रेस की तरफ से किसी महिला को मैदान में उतारा जाएगा…संगठन ने फिलहाल पत्ता नहीं खोला है। चर्चा जरूर चल रही है कि कांग्रेस के युवा और जुझारू वरिष्ठ नेता प्रमोद नायक की पत्नी को मैदान में उतारा जा सकता है। लेकिन जानकारी यह भी मिल रही है कि प्रमोद नायक इस बात को लेकर बहुत अधिक गंभीर नहीं है। गंभीर नहीं होने के कुछ कारण भी है। फिलहाल उसकी चर्चा यहां उचित नहीं है। लेकिन बताते चलेकं प्रमोद नायक प्रदेश संगठन में पदाधिकारी होने के साथ ही अच्छी पकड़ भी रखते हैं। खुद प्रमोद नायक की पत्नी ने संगठन के लिए लोकसभा और विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी प्रत्याशी के लिए पसीना बहाया है। जब तब सक्रियता जाहिर कर संगठन में अपने आप को स्थापित भी किया है।

                                    त्रिवेणी भोई महिला कांग्रेस संगठन में पदाधिकारी है। त्रिवेणी भोई के समर्थकों की मानें तो उनकी दावेदारी बनती है। टिकट की मांग कर सकती है। विकास नगर कांग्रेस कमेटी के वार्ड अध्यक्ष वेदराम भी अपनी पत्नी के लिए टिकट की दावेदारी कर सकते हैं। कांग्रेस कार्यकर्ता आनन्द यादव भी पत्नी के लिए टिकट मांगे तो कोई आश्चर्य नहीं होगा।

                           भाजपा में भी वार्ड प्रत्य़ाशी को लेकर लगातार बैठक चल रही है। कोई ऐसा प्रत्याशी उन्हें भी नहीं सूझ रहा है कि जिसका समर्थन करें। जो भी मिल रहे हैं…उनका व्यक्तिगत प्रभाव वार्ड में कुछ खास नहीं है। कुछ युवा चेहरा जरूर मिले हैं लेकिन उनको लेकर पार्टी बहुत गंभीर नहीं है।  फिर भी पार्टी को भरोसा है कि देर सबेर उम्मीदवार मिल ही जाएगा।

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