निपनियां वासियों ने मांगी उच्चभठ्टी से आजादी

IMG-20170515-WA0003बिलासपुर—बिल्हा ब्लाक पंचायत उच्चभट्ठी के आश्रित ग्राम निपनियां के लोगों ने अलग ग्राम पंचायत बनाने की मांग की है। कलेक्टर कार्यालय का घेराव करने पहुंचे ग्रामीणों ने बताया कि उच्चभठ्टी और निपनिया मिलकर एक पंचायत होते हैं। लेकिन विकास के नाम पर निपनियां के साथ अन्याय होता है।  ग्रामवासियों के अनुसार शासन की योजनाओं का लाभ निपनियां को नही मिल रहा है।

                     उच्चभठ्टी ग्राम पंचायत और सरपंच की तानाशाही से परेशान आश्रित गांव निपनिया के लोग  रैली की शक्ल में कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। ग्रामवासियों ने बताया कि निपनियां बिल्हा ब्लाक थाना सीपत क्षेत्र में उच्चभठ्ठी का आश्रित गांव है। निपनियां की कुल आबादी करीब 1100 से अधिक और मतदाताओं की संख्या 800 से ज्यादा है। बावजूद इसके शासन की योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। जसबीर गुम्बर ने बताया कि निपनियां और उच्चभठ्टी को मिलाकर कुल जनसंख्या करीब 2400 है। इसमें करीब आधी आबादी आश्रित गांव निपनिया की है। बावजूद इसके ग्रामीणों के साथ अन्याय हो रहा है।

                ग्रामीणों के साथ कलेक्टर कार्यालय पहुंचे जसबीर ने बताया कि सरपंच उच्चभठ्ठी का रहने वाला है। उसे गांव का मतलब केवल उच्चभठ्टी समझ में आता है। इसलिए शासन की सारी योजनाएं उच्चभठ्ठी आकर खत्म हो जाती है। निपनियां की पंच सुमित्रा आरमोर, राजकुमारी राज, कौशिल्या सुकृताबाई, चंदा, पार्वत ने बताया कि प्रदेश में शौचालय अभियान चलाया जा रहा है। लेकिन गांव में सरपंच ने एक भी शौचालय नहीं बनवाये हैं। पेयजल की व्यवस्था भी नही हैं।

                    ग्रामीणों के साथ जसबीर ने बताया कि निपनियां के किसी भी तालाब में सरपंच ने ना तो पचरी बनवाया है। और ना ही पक्की सड़क की व्यवस्था की है। गंदा पानी, गलियों से बहता है। नाली की व्यवस्था नहीं है। लोग रोजाना बीमार हो रहे हैं। सामुदायिक भवन की व्यवस्था नहीं है। ग्रामीणों के कहने के बाद भी सरपंच ने स्कूल मैदान का समतलीकरण नहीं किया है।

                                          ग्रामीणों के अनुसार नवागांव से निपनियां पहुंच मार्ग और पुल निर्माण की क्षेत्रवासियों की लम्बे समय से मांग है। बावजूद इसके सरपंच हमेशा की तरह निपनियांवासियों की मांग को अनसुना कर देता है। निपनियां में पेयजल की भारी समस्या है..सरपंच को परवाह भी नहीं है। खेती के लिए हर साल पानी की समस्या से जूझना पड़ता है।

               ग्रामीणों के अनुसार यदि अलग ग्राम पंचायत बन जाता है तो गांव के साथ सभी का विकास होगा। शासन की योजनाओं का भी लाभ मिलेगा। यदि उनकी समस्याओं और मांग पर विचार नहीं किया गया तो हम लोग एक होकर कलेक्टर का घेराव करेंगे।

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