निष्ठा प्रशिक्षण:किसी भी हालत में स्कूल बंद नहीं रहने चाहिए,हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का हक-पी.दयानंद,कार्यशाला मे संचालक ने कही ये बात

रायपुर।राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् के संचालक पी.दयानंद ने कहा है कि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का हक है। सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे मिले इसके लिए निष्ठा (नेशनल इनिसिएटिव ऑन स्कूल टीचर हेड हॉलीस्टिक एडवांमेंट) कार्यक्रम के तहत राज्य में कक्षा पहली से आठवीं तक के सभी शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाना हैै। आवासीय प्रशिक्षण में ध्यान रखा जाए कि किसी भी हालत में विद्यालय बंद नहीं रहने चाहिए। दयानंद ने आज राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् कार्यालय के सभा कक्ष में निष्ठा कार्यक्रम के अंतर्गत संभाग और जिलों के नोडल अधिकारियों की कार्यशाला के प्रारंभिक सत्र को सम्बोधित कर रहे थे। सीजीवालडॉटकॉम के व्हाट्सएग्रुप से जुडने के लिए यहाँ क्लिक कीजिये

दयानंद ने कहा कि शिक्षकों के पास तर्क शक्ति और क्षमता है और वे बच्चों के मनोविज्ञान को भी समझते हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम में समर्पण के साथ सहभागिता निभाएं। उन्होंने कहा कि यह सबसे बड़ा शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम है। इस प्रशिक्षण अभियान में राज्य के सभी सरकारी स्कूल के शिक्षकों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ खेल-खेल में पढ़ाई, लर्निंग आउटकम, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस आदि का प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि निष्ठा योजना प्रारंभिक स्तर पर सीखने के परिणामों को बेहतर बनाने का मिशन है। प्रारंभिक स्तर पर सभी सरकारी स्कूलों के सभी शिक्षक, विद्यालय प्रमुख, विकासखण्ड स्त्रोत समन्वयक, कलस्टर समन्वयक, शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के सभी संकाय सदस्य शामिल होंगे।

निष्ठा एकीकृत कार्यक्रम में शिक्षकों के प्रशिक्षण में किताबों के बजाय बच्चों के बौद्धिक विकास, बच्चों के महत्वपूर्ण सोच को प्रोत्साहित करने और बढ़ावा देने शिक्षकों को प्रेरित किया जाएगा। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों के बीच जागरूकता फैलाएगा और उनको कौशल विकसित करने में सक्षम बनाएगा। प्रशिक्षण में अनुशासन आवश्यक है। छत्तीसगढ़ के स्कूली बच्चों को इसका लाभ मिलेगा। 

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् के संयुक्त संचालक श्री योगेश शिवहरे ने कहा कि निष्ठा कार्यक्रम के तहत सबसे पहले राष्ट्रीय प्रशिक्षकों द्वारा प्रदेश में 1500 मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षित किया जाएगा। यह प्रशिक्षण राष्ट्रीय प्रशिक्षकों द्वारा मास्टर टेªनर राज्य स्त्रोत प्रशिक्षक और विकास खण्ड स्त्रोत प्रशिक्षकों को दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम अन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम से अलग है। इसमें प्रशिक्षण से पूर्व और प्रशिक्षण के बाद शिक्षकों का ऑनलाइन टेस्ट लिया जाएगा। इसके लिए सभी शिक्षकों की ई-मेल आईडी बनाई जाएगी। सभी शिक्षकों को फेस-टू-फेस प्रशिक्षण दिया जाएगा।

प्रशिक्षण के संबंध में सभी संभाग और जिलों के नोडल  अधिकारियों को राज्य स्त्रोत प्रशिक्षक और विकास खण्ड स्त्रोत प्रशिक्षकों का चयन करने कहा गया। प्रशिक्षण की तैयारी के संबंध में कहा गया है कि राज्य के सभी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अध्यापन कराने वाले शिक्षकों, प्रधान पाठक, बीआरसी और सीआरसी को प्रशिक्षित किया जाना। इसके लिए प्रत्येक विकास खण्ड में एक राज्य स्त्रोत प्रशिक्षक और पांच विकास खण्ड स्त्रोत प्रशिक्षक का चयन कर छह सदस्यीय दल बना लिया जाए।

राज्य स्त्रोत प्रशिक्षक स्कूल लीडरशीप के रिसोर्स पर्सन के रूप में कार्य करेंगे और विकास खण्ड स्त्रोत प्रशिक्षक शेष प्रशिक्षण माड्यूल के लिए रिसोर्स पर्सन के रूप में कार्य करेंगे। प्रत्येक दल एक बार में 150 शिक्षकों को प्रशिक्षण देगा तथा कुल पांच चरणों में 750 शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि विकास खण्डों में शिक्षकों की संख्या के अनुरूप राज्य स्त्रोत प्रशिक्षक और विकास खण्ड स्त्रोत प्रशिक्षक का दल बनाया जाए। जिन विकास खण्डों में 750 तक शिक्षक हैं, वहां एक दल, 1500 सौ तक के लिए दो दल, 1700 से 2000 हजार तक के लिए तीन दलों का गठन किया जाए।

यह भी बताया गया कि राज्य स्त्रोत प्रशिक्षक और विकास खण्ड स्त्रोत प्रशिक्षक हाई स्कूल, हायर सेकेण्डरी, डाइट, व्याख्याता, प्राचार्य और संकाय सदस्य होंगे। राज्य स्त्रोत प्रशिक्षक हाई स्कूल, हायर सेकेण्डरी विद्यालयों के प्राचार्य को बनाया जाए। राज्य स्त्रोत प्रशिक्षक और विकास खण्ड स्त्रोत प्रशिक्षक प्रशिक्षण देने के लिए अच्छा संप्रेषण एवं व्यवहार कुशल होना चाहिए और इनके पास स्मार्ट फोन होना आवश्यक है। नोडल अधिकारियों से कहा गया है कि राज्य स्त्रोत प्रशिक्षक और विकास खण्ड स्त्रोत प्रशिक्षक के दलों का चयन कर विकास खण्ड स्तर पर प्रशिक्षण स्थल का चयन कर लिया जाए, जिसमें 150 की क्षमता का एक हाल और 50-50 की क्षमता वाले तीन कक्ष हों। आवासीय व्यवस्था भी सुनिश्चित कर ली जाए। कार्यशाला को राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् के डॉ. वी.रघु और संजय गुहे ने भी सम्बोधित किया। 

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  2. By हेमन्त कुमार मेश्राम

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