नोट देख बिगड़ी मशीन…विधायक ने कहा..बच गयीं बड़ी मछलियां

bank2  CURRENCY बिलासपुर—आज बिलासपुर के सभी बैंकों में लोगों की भीड़ नोट बदलने और जमा करने के लिए पहुंची। व्यवस्था के बीच अव्यवस्था का नजारा देखने को मिला। बैंक आफ बड़ोदा में नोट देखते ही मशीन बिगड़ गयी। यद्यपि पन्द्रह मिनट बाद दुरूस्त कर लिया गया। इस दौरान लाइन में खड़े लोग बहुत नाखुश और अधीर नजर आए। लोगों की भीड़ देख प्रबंधक के माथे पर भी पसीना आ गया।

                           बैंक खुलने से पहले ही लोग जेब में जरूरी दस्तावेज और नोट के साथ सुबह से ही लोगों की भीड़ बैंकों के सामने लम्बी लाइनों में नजर आई। लेकिन  बैंक अपने निर्धारित समय पर ही खुले । इस बीच लोगों को इंतजार का एक-एक पल भारी महसूस हुआ। सभी बैंक दस बजकर दस मिनट पर ही खुले। कमोबेश सभी को इस बात की जानकारी थी। लेकिन सवाल लाखों रूपए को सुरक्षित करने का था इसलिए लोग मंदिर से पहले बैंक पहुंच गये।

                         कलेक्टर शाखा,एसबीआई मुख्य शाखा,बरोदा बैंक,यश बैंक,अपेक्स बैंक,देना बैंक,एचडीएफसी बैंक आज ग्राहकों की विशेष सुविधा के साथ ठीक साढ़े दस बजे ही खुले। लोगों की भीड़ ने बैंक खुलने के बाद राहत की सांस ली। कई बैंकों के सामने विशेष सुरक्षा में तैनात कर्मचारियों को भीड़ नियंत्रित करने में मशक्कत करनी पड़ी। बैंक में तीन तरह के काउंंन्टर खोले गए थे। अधिक और कम रकम जमा करने के लिए दो अलग अलग और एक्सचेंज के लिए तीसरा काउन्टर भी नजर आया।

                                      कलेक्टर और मुख्य शाखा स्टेट बैंक में भारी भीड़ देखने को मिली। रूपए जमा करने वालों की लाइन सड़क तक लगी। इस बीच लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कुछ लोगों ने बताया कि आज सिर्फ नोट जमा करने के लिए ही दुकान बंद किया है। कुछ ने अपने परेशानियों के और भी कारण बताए। लेकिन चिंता सबकी एक ही थी कि किसी तरह नोट बदल जाए या जमा हो जाए। कई लोग तो पहचान छिपाने के लिए चेहरे से पूरे समय तक नकाब नहीं उतारा।

नोट को देखते ही बिगड़ी गयी मशीन

BANK OF BARODA     एक ग्राहक ने बताया कि बैंक ऑफ बरोदा की नोट गिनने वाली मशीन नोट देखते ही बिगड़ गयी। करीब बीस मिनट की माथापच्ची के बाद बंद मशीन को सुधारा गया। मात्र दो तीन ग्राहक के बाद ऐसी स्थिति बनी। काउन्टर के बाहर खड़े लोगों ने कानाफूशी शुरू कर दी। कुछ ने 56 इंच सीने का मजाक उड़ाया तो कुछ ने अपनी परेशानियों को लेकर आक्रोश जाहिर किया। इसके पहले हंगामे की स्थिति बनती बैंक कर्मचारी ने मशीन को झाड़फूंक कर दुरूस्त कर लिया। जैसे ही मशीन ने नोट गिनना शुरू किया…लोगों ने राहत की सांस ली…भीड़ भी धीरे धीरे खिसकने लगी।

अच्छे दिन पर चुटकी

                       बैंकों के सामने नोट लेकर खड़े लोगों की प्रतिक्रिया कुछ मिली जुली थी। कुछ लोगों ने इसे मोदी सरकार की विशेष उपलब्धियों में गिनाया तो कुछ लोगों ने कहा कि हमें ऐसे दिन नहीं चाहिए। हमारे अच्छे दिन तीन साल बाद ही आएंगे।

कहां जमा करें पांच लाख

              थैला लेकर घूम रही एक गरीब महिला ने बताया कि वह पिछले पच्चीस साल से मेहनत मजदूरी का काम करती है। कैटरिंग का काम करने कई बार बाहर भी जाना होता है। उसने सहेज कर रूपए इकठ्ठे किये। उसका बैंक खाता भी नहीं है। जनधन योजना में खाता खोलने के लिए फार्म भरा था लेकिन खाता नहीं खुला। अब अपने पांच लाख रूपए को लेकर कहां जाए। मेरे लिए तो यह कागज का टुकड़ा हो गया है…जैसा की प्रधानमंत्री ने टीवी में कहा…लोग कहते हैं कि टैक्स लगेगा। महिला ने बताया कि कोई मेरे पुराने नोटों को लेने के लिए तैयार नहीं है। कुछ लोग नोट बदलने के बदले कमीशन मांग रहे हैं। मैं अपनी तीस साल की गाढ़ी कमाई को कहां ले जाऊं…। कुछ समझ में नहीं आ रहा है।

CURRENCY-1कर्मचारियों में चर्चा

                 कुछ सरकारी अधिकारियों ने बताया कि ऐसा लगता है कि किसी ने मेरे बीस साल की ईमानदारी पर उंगली उठा दिया है। केवल पांच प्रतिशत बेईमान लोगों के चलते हम अपनी गाढ़ी कमाई को बैंक से नहीं निकाल सकते हैं।आखिर बेइमानों की सजा ईमानदार लोगों को क्यों…। सरकार जानती है कि काली कमाई कहां है…बावजूद इसके घूमाकर क्यों कार्रवाई कर रही है। बेइमानों पर सीधी कार्रवाई हो….। गरीबों की हालत इन तीन दिनों में बहुत खराब हो चुकी है। यदि काली कमाई से तंत्र प्रभावित हो रहा है तो सरकार को वित्तीय आपातकाल लगा देना चाहिए।

नेता ने कहा बढ़ी मछली निकल गयी

              नाम नहीं छापने की शर्त पर एक विधायक ने बताया कि कार्रवाई अच्छी है लेकिन बड़ी मछलियां जाल तोड़कर निकल चुकी हैं। कोरड़पति और अरबपतियों को दो सप्ताह पहले ही प्लान का पता चल गया था। विधायक ने बताया कि मैं इस मामले में खुलकर कुछ नहीं बोल सकता। बड़े नेताओं ने चुप्पी साध रखी है। लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि मध्यम और निम्न मध्यम वर्ग पर गाज गिर चुका है। सरकार हर बार ऐसे लोगों को ही क्यों निशाना बनाती है। करोड़पतियों ने अपने धन को कार्रवाई से पहले ही ठिकाने लगा दिया है। ग्रामीणों और अन्य शहरी मध्यवर्गीय परिवार के पास इतना समय नहीं है कि बैंक काउंटर पर लम्बी लाइन लगाएं। उन्हें बहुत काम है। घर में कुछ लाख रखकर बैंक से  ना जाकर समय बचाते हैं…ऐसे ही लोगों पर सरकार कार्रवाई कर रही है।

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