मेरा बिलासपुर

न साधन न प्रसाधन कैसे आयेगी स्वच्छता?

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बिलासपुर   स्वच्छ भारत स्वस्थ्य भारत का नारा और सपना केसे पूरा होगा ? जब स्वच्छता लाने के मूल सिद्धांत पर  जमीनी स्तर पर  अमल नहीं किया जा रहा है। कचरे के लिए न तो जगह जगह कुड़ेदान की व्यवस्था करने का प्रयास किया जा रहा है और न ही राहगीरों के लिए प्रसाधन की व्यवस्था…….। कम से कम बिलासपुर की दशा को देखकर ऐसा ही लगता है।

एक दिन हाथ में झाडू थामकर तामझाम के साथ सफाई पसंद  होने का ढींढोरा पीटने से न तो स्वच्छता आयी है और न ही आ पायेगी। गली कूचों पर फैले कचरों को साफ कर कहीं और कचरे का पहाड़ खड़ा करा देने की नीति सिर्फ सरकारी पैसों और मिसीनरी की बरबादी मात्र है। बिलासपुर की हर सड़क की स्थिति कमोबेस एक ही है। स्वच्छता का सपना तभी साकार हो पाएगा जब हर मार्ग पर प्रसाधन की व्यवस्था हो वरना जहां तहां खड़े होकर पेशाब करते लोगों पर लगाम कैसे लगाया जा सकेगा ? सार्वजनिक स्थल पर निर्मित प्रसाधन की स्थिति ऐसी है जहां जाने के बजाए लोग खुले में ही पेशाब करना पसंद करते हैं और ये मजबूरी भी है क्योंकि ऐसे प्रसाधन की स्थिति ही ऐसी है कि सैकड़ों मीटर की दूरी से स्थिति का पता चल जाता है। लेकिन इसके लिए जिम्मेदार कौन ? प्रशासन या आमजन जो यहां गंदगी फैलाते हैं।

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बहरहाल स्वच्छता का सपना तभी साकार हो पाएगा जब प्रशासन के साथ साथ आमजन भी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ करें। एक बात नहीं भुलनी चाहिए कारवां की शुरूवात एक से होती है और लोग उससे जुड़ते चले जाते हैं।
हमारे समाज में एक बड़ी ही बूरी आदत है वो है भेड़ चाल की। किसी ने खाली जगह देखी कचरा फेंक  दिया, उसके देखा – देखी दूसरे ने फिर तीसरे और ऐसा करते करते वह जगह कुड़े के ढेर में तब्दील हो जाता है। यही होता है वाहन पार्किंग या बस स्टाप या फिर आॅटो स्टैण्ड के बेतरतीब बनने ही वजह। अच्छी आदतें किसी से लें या न ले बूरी आदतें झट से अपना लेते हैं…… जरूरत है अपने आपको को बदलने की बाकी सब अपने आप बदल जाएगा। जिस दिन हर व्यक्ति ये सोच ले कि मै गंदगी नहीं फैलाउंगा और न फैलाने दूंगा, उस दिन सफल होगा ‘‘ स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत ‘‘ का नारा और साकार होगा कचरा मुक्त भारत का सपना। बस शुरूवात हमें करना है करवां में लोग जुड़ते जाएंगे।

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बहरहाल बात चली है तो दूर तक जाएगी की तर्ज पर प्रशासन को जगह जगह प्रसाधन का निर्माण करना चाहिए और शहर में इतने कुड़ेदान रखवा देने चाहिए कि लोग चाह कर भी कुड़ा इधर उधर न फेंक सकें……. कागजों तक सीमित योजनाओं का क्रियान्वयन जमीनी स्तर पर होने से स्वच्छता जरूर आएगी। जरूरत है तो पूरी निष्ठा और ईमानदारी से कार्य करने और करवाने की…….. ।

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