हमार छ्त्तीसगढ़

“पढ़ई तुंहर दुआर..दस हजार के ले उधार..”,गांव-गांव स्कूल हैं लेकिन मोबाइल कवरेज नहीं..कैसे होगी ऑनलाइन पढ़ाई..?

बिलासपुर(मनीष जायसवाल)-बीते  कुछ दिनों से सोशल मीडिया में पढाई तुंहर द्वार (PTD छत्तीसगढ़) पर एक तंज वायरल हो रहा है। “पढ़ाई तुंहर द्वार … दस हजार के ले उधार” ..!  यह योजना प्रदेश के सरकारी स्कूलो के छात्रो के लिए स्मार्ट मोबाइल फोन के जरिये आन लाइन पढ़ने के लिए है।इसके लिए छात्रो के पास मोबाईल जरूरी है।  आठ से दस हजार के बीच मे एक औसत टिकाऊ मोबाईल फोन आ रहा है।इसी पर यह तंज वायरल हुआ है। जो विभाग की इस योजना पर कई प्रश्न चिन्ह लगा रहा है।कहा जाता है कि इसके PTD के योजनाकारों  ने कोरोना काल के दौर में प्रदेश के आर्थिक व भौगोलिक स्थिति, डिजिटल तकनीकी कौशल,  स्मार्ट मोबाईल फोन की उपलब्धत्ता , नेटवर्क की स्थिति , छात्रो की संख्या व पालकों की जागरूकता को नजर अंदाज किया है।CGWALL NEWS के व्हाट्सएप न्यूज़ ग्रुप से जुडने के लिए यहा क्लिक कीजिये

कार्यक्रम को हर हाल में सफल दिखाने के लिए अधिकारियों ने कमर कस ली है।जिसका दवाव शिक्षको पर आ रहा है जिस वजह से शिक्षक अब छात्रो पर दबाव बना कर आन लाइन पढ़ने के लिए कह रहे है। कई शिक्षक जिसके लिए कई शिक्षक गांव और स्कूल का दौरा भी कर रहे है।नतीजन छात्र अपने पालकों पर मोबाईल लेकर देने के लिए दबाव बना रहे है। मजबूरन कोरोना संकट के समय निशुल्क शिक्षा के नाम पर औसतन ₹10000 का मोबाइल बच्चों के लिए पलकों को लेना पड़ रहा है।  कई पालक उधार लेकर बच्चो के लिए इंतजाम कर है। ऊपर से रिचार्ज का खर्च अलग उठाने को मजबूर है।

सीजी स्कूल डॉट इन , ऑनलाइन मिटिंग सिस्को वेबेक्स  एप,  वाट्सएप, टेलीग्राम और यूट्यूब  इन पांच के साथ छटवा प्लेटफार्म   की पैड मोबाइल के लिए  फ्रीकॉन्फ्रेंसकॉल डॉट कॉम, इस सब की बुनियाद पर प्रदेश में आन लाईन शिक्षण व्यवस्था की नींव रखी गई। जो  प्रदेश में सरकारी शिक्षको की संख्या बल के दम पर पढ़ाई तुंहर द्वार कार्यक्रम का पोर्टल cgschool.in   लॉक डाउन और अनलॉक डाऊन में पड़ने और पढ़ाने का एक बड़ा माध्यम बना कर  .. पेेेश किया गया है..!  इस कार्यक्रम की सफलता के जितने दावो का ..  ठोस व सरल चित्र बताया जाता है..!  वह उतना ही तरल व विचित्र है। PTD छत्तीसगढ़ का यूट्यूब चैनल  हो या वेबेक्स मीटिंग्स पर शिक्षक व छात्र का स्क्रीन शॉट या फिर  PTD पोर्टल के आंकड़े तुलसीदास जी के द्बारा कही गई रामायण की चौपाई  समरथ को नहीं दोष गुसाईं’ पर सटीक लगते है।

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प्रदेश के लगभग सभी गाँव या आश्रित गावँ तक सरकारी स्कूलो की पहुँच तो है। परन्तु सब जगह नेटवर्क नही है और नेटवर्क है भी तो स्लो है।  अधिकांश पालकों के पास मोबाईल फोन तो है पर 4G या 3G स्मार्ट फोन नही है।  शिक्षक डेक्सटॉप व लैपटॉप का काम एक या डेढ़ GB वाले रैम्प के  साधारण स्मार्ट फोन से कर रहे है। अधिकांश छात्र भी इन डिजिटल प्लेटफार्म का  उपयोग ऐसे ही कर रहे है। जो समस्या शिक्षक महसूस कर रहे है वे छात्र पालक भी ठीक ऐसी ही समस्या का सामना कर रहे है।

शिक्षक बातते है कि पढ़ाई तुंहर द्वार कार्यक्रम  को सोशल मिडिया प्लेटफार्म की खिचड़ी बना दी गई है। और मोबाईल को चूल्हा  और शिक्षक को खाना बनाने वाला व छात्र खाना खाने वाले हो गए है। इन सब मे पालक अलग पीस रहे है। इससे शिक्षक छात्र व पालक तीनो ही परेशान है। एक पोर्टल में कुछ नही। सब अलग अलग है पर सब एक ही है।

मोबाईल पर ही शिक्षक सीजी स्कूल डाट इन पर पहले पंजीयन करते है। उसके बाद सिस्को एप पर पंजीयन करते है। फिर सिस्को एप पर मीटिंग हर बार क्लास लेने के लिए मीटिंग का समय तारीख तय करते है। फिर उसमें लिंक जनरेटर करते है। उसके बाद इसे पढ़ाई तुंहर द्बार  सीजी स्कुल डाट इन में अपने खाते में अपने  अपनी कक्षा में  उस लिंक को को अपलोड करते है। उसके बाद उसे वाट्सएप, टेलीग्राम व अन्य जगहों पर शेयर करते है। जिससे वह छात्रो तक पहुँच सके। इस मीटिंग का पासवर्ड पहले शेयर नहीं होता है। शिक्षको को उसके लिए अलग से एडिट करना पड़ता है। पढ़ने के लिए दो लिंक बनते है। एक सिस्को वेबेक्स से दूसरा  PTD सीजी स्कुल डाट इन से बनता है। छात्र दोनो ही लिंक से आन लाइन जुड़ सकते है।

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नवीन शिक्षा कर्मी संघ की प्रदेश प्रवक्ता गंगा पासी पढ़ाई तुंहर द्वार पर कहती है। शासन का आदेश है करना तो पड़ेगा । महिला शिक्षक मोबाईल का तकनीकी उपयोग नही करती थी वे अब सिख रही है।  यह योजना शहरी समृद्ध माता पिता के लिए ठीक है। पर गरीब छात्रो के बीच सफल नही है। इसमें  सबसे बड़ी कमी मोबाईल को लेकर ही है। जो शिक्षको के पास तो है पर सभी छात्रो के पास नही है। यहाँ तक अधिकाँश पालकों के पास भी नही है।प्रदेश के शिक्षक औऱ छात्र दोनो ही नेटवर्क की समस्या  से अलग  जूझ रहे है। मोबाईल गर्म हो रहा है। आँखों मे समस्या आ रही है। कोरोना काल मे डॉक्टर के पास जाने से भी डर लग रहा है।सभी शिक्षको के पास लैपटॉप नही है। छोटे से मोबाइल से ही सब काम करना पड़ रहा है। कई बार मोबाईल हैंग हो जाता है। मोबाईल से सबको एक समान शिक्षा देना सम्भव नही है। यह कार्यक्रम शिक्षा की समानता से दूर हो गया है। 

सँयुक्त शिक्षा कर्मी संघ के बिलासपुर सम्भाग अध्यक्ष मुकुंद उपाध्याय कहते है कि जिस कार्य को छत्तीसगढ़ दूरदर्शन के माध्यम से करना था उंसे मोबाईल से कराया जा रहा है। टीवी लगभग हर घर मे सुलभ है। घर पर नही तो पड़ोस में मिल ही जाता है।  ट्राईबल एरिया में मोबाईल का कवरेज ही समस्या है। अधिकांश गरीब छात्र के पास ठंड में भी स्वेटर पहन कर नही आते है। ऐसे में शिक्षक कैसे बच्चों को मोबाईल से जोड़ कर रखेंगे। पढ़ाई तुंहर द्वार का  छात्रो पर कही दुष्प्रभाव तो नही पड़ रहा है इसका मनोवैज्ञानिक अध्यन किया जाना चाहिए। अधिकांश शिक्षक भी तकनीकी रूप से अभी सभी मोबाईल के सोशल साइट्स ऑपरेट करने में सक्षम नही है। ये कार्यक्रम शिक्षको में तनाव ला रहा है। 

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पढ़ाई तुंहर द्वार की इस व्यवस्था में  अब एक और नया अध्याय जुड़ने वाला है।अधिकारी-कर्मचारियों की जवावदेही तय करते हुए ऑनलाइन कक्षा संचालन के लिए समय सारणी जारी करने की कयावद शुरू होने वाली है। विद्यालय स्तर से जिला स्तर तक नियमित माॅनिटरिंग की व्यवस्था भी की गई है। अब प्रतिदिन कक्षा पहली से बारहवीं तक सभी कक्षाओं की ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन दोपहर 12 बजे से किया जा सकता समस्त वर्चुअल स्कूलों के शिक्षक अनिवार्यतः ऑनलाइन कक्षाओं में भाग लेंगे। इसके लिए उन्हें पंजीकृत मोबाईल नम्बर से सीजी स्कूल डाॅट इन पोर्टल में कक्षा, विषय, दिनांक, समय के साथ लिंक शेयर करना होगा, साथ ही इसकी जानकारी विद्यालय स्तर पर तैयार व्हाट्सएप्प ग्रुप में भी देना होगा।

 कक्षाओं में बच्चों की शत-प्रतिशत उपस्थित लक्ष्य प्राप्त करने की जिम्मेदारी शिक्षकों की होेगी। शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों की जानकारी प्राचार्य, प्रधान अध्यापक को प्रतिदिन देंगे। इसके बाद प्राचार्य, प्रधानाध्यापक हफ्ते में एक दिन को संकुल समन्वयक के माध्यम से ब्लाॅक नोडल अधिकारी को उपस्थिति प्रतिवेदन सौपेंगे, जिसे हफ्ते में एक दिन जिला नोडल अधिकारी को सौंपी जाएगी। स्प्ताह भर के ऑनलाइन कक्षाओं की सम्पूर्ण समीक्षा जिला स्तर पर की जाएगी। लापरवाही बरतने पर सम्बन्धित अधिकारी एवं कर्मचारी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाने की बात कही जा रही है।

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