पहले दरियाई घोड़ा..फिर भालू..अब नीलगाय की मौत…बेजुबानों का कब्रगाह बना कानन पेन्डारी मिनी जू..

बिलासपुर—प्रदेश में गर्व का पर्याय कानन पेन्डारी अब जानवारों को मौतगाह बनता जा रहा है। पिछले कुछ दिनों में मरने वालों की संख्या दिनो दिन बढ़ती जा रही है। कानन पेंडारी प्रबंधन की लापरवाही एक बार जानवरों पर भारी पड़ गयी है। पहले दरियायी घोड़ा,फिर भालू अब नीलगाय की मौत का मामला सामने आया है। मीडिया के भय से प्रबंधन ने गुपचुप तरीके से नीलगाय का अंतिम संस्कार भी कर दिया है।

                  प्रदेश का गौरव कानन पेंडारी अब शर्मिन्दगी का रिकार्ड स्थापित कर रहा है। प्रबंधन की लापरवाही के चलते रविवार को सुबह एक नीलगाय और हिरन की बच्चे की मौत की जानकारी मिली है। कानन पेन्डारी प्रबंधन ने कुछ ज्यादा ही जल्दबाजी करते हुए जानवरों का अंतिम संस्कार कर दिया है।

                        जानकारी के अनुसार रविवार की सुबह खबर मिली कि एक नीलगाय और हिरन के बच्चे की मौत हो गयी है। कानन प्रबंधन ने आनन फानन में जानवरों का पोस्टमार्टम कर अंतिम संस्कार कर दिया है। प्रबंधन ने अभी तक यह भी बताना मुनासिब नहीं समझा है कि आखर जानवरों की मौत की वजह क्या है। मौत पर पर्दा डालने का कानन पेंडारी प्रबंधन पूरी तैयारी से सक्रिय है।

                          मामले मैें जब मीडिया के लोगों ने वन और कानन प्रबंधन से जानकारी लेने का प्रयास किया तो अधिकारियों का मोबाइल बंद पाया गया। इतना ही नहीं प्रबंधन ने कानन मिनी जू में मीडियार्मियों को भी घुसने नहीं दिया।

               जानकारी को हिक दो दिन पहले कानन पेन्डारी में एक भालू की मौत हो गयी थी। उसकी मौत को भी छिपाने का प्रयास किया गया। अब एक बार फिर नीलगाय की मौत को छिपाने का प्रयास किया गया है। बताते चलें कि करीब बीस दिन पहले रेस्क्यू कर रायगढ़ से भालू को कानन पेंडारी जू लाया गया था। प्रबंधन की लापरवाही और बेहतर स्वास्थ मुहैया नहीं होने पर भालू की दो दिन पहले मौत हो गयी। भालू की मौत का मामला अभी ठण्डे बस्ते में नहीं गया। रविवार को नीलगाय की मौत ने वन विभाग की व्यवस्था पर प्रश्न खडा कर दिया है।

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