मेरा बिलासपुर

पीएचई में विज्ञापन घोटाला.. आरटीआई ने किया खुलासा

IMG_20150903_132418बिलासपुर….सरकारी योजनाओ के प्रचार प्रसार और कार्य निष्पादन के लिए पेपरों मे विज्ञापन के नाम पर शासन को करोडो रूपये का चूना लगाने का मामला सामने आया है । बिलासपुर प्रेस क्लब मे पत्रकारों से चर्चा के दौरान आरटीआई कार्यकर्ता अमर नाथ अग्रवाल ने यह बाते कुछ प्रमाण के जरिए सामने रखी ।

               छत्तीसगढ शासन की विभिन्न निर्माण एजेन्सीयां अपने अधीन होने वाले कार्यो के लिए विज्ञापन के माध्यम से ठेकेदारो और निर्माण कार्य मे लगी एजेन्सीयो को आमंत्रित करती है । पूरा कार्य पेपरो मे विज्ञापन के माध्यम से जनसम्पर्क विभाग करता है । जो अखबारो को विज्ञापन प्रदान कर निर्माण कार्य की निविदा प्रकाशित करवाता है। इसके लिए जनसम्पर्क कार्यालय जी नम्बर जारी करता है ।

     जी नम्बर के आधार पर ही जनसम्पर्क आरो लेटर जारी करता है । निविदा की प्रक्रिया मे पारदर्शिता होने के बाद भी अधिकारी ठेकोदारो से सांठ-गांठ कर शासन की नाक के नीचे करोड़ो का भ्रष्टाचार कर रहे है । जिसका खुलासा आज आरटीआई कार्यकर्ता अमर नाथ अग्रवाल ने प्रेस कान्फ्रेन्स मे किया । अमरनाथ अग्रवाल ने बताया की शासन के अधीन निर्माण ऐजेन्सीयां अधिकारियो से मिलीभगत कर शासन को चूना लगा रही है । हर साल विकास कार्यो मे पारदर्शिता लाने और गुणवक्ता युक्त कार्य कराने के उद्देश्य से राज्य शासन निविदा जारी करती है । जिसके आधार पर संबंधित कार्य शुरू करवाया जाता है ।

             इस प्रक्रिया के लिए शासन के नियमानुसार जन सम्पर्क के माध्यम से अखबारो मे विज्ञापन छपवाया जाता है। निर्माण विभाग निविदा विक्रय करता है। लेकिन अधिकारी ठेकेदारों से सांठगांठ केवल कागजों में ही निविदा दर्ज करने का गोरख धंधा कर रहे हैं। ठेकेदार अधिकारियों की शह पर अखबारों में निविदा का इश्तहार न करते हुए जाली अखबार के जरिए सारी रकम हड़प रहे हैं।

डा. मिश्रा की स्मृति में स्वास्थ शिविर

                अग्रवाल ने बताया कि अधिकारी और ठेकेदार खाना पूर्ती के लिए जनसंपर्क के नाम पर झूठा पत्र जारी कर रकम हड़प रहे हैं। विज्ञापन यदि किसी अखबार में जारी होगा ही नहीं तो रकम अदायगी का सवाल ही नहीं उठता। कुछ इसी तर्ज पर नकली जी नम्बर तैयार कर लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारी और ठेकेदार जाली आरओ,जाली अखबार का प्रिंट के जरिए निविदा के नाम प्रकाशित विज्ञापनों की राशि का बंदरबांट कर लेते हैं।

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