मेरा बिलासपुर

प्रकृति संग जुड़े व्रत – त्यौहार, और कर्तव्य विमुखता ..!!

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बिलासपुर ( प्राण चड्डा )।  आंवला नवमी पर आज औषधीय गुणों परिपूर्ण आंवला के पेड़ों का पूजन महिलाओ ने किया ।पार्क और जहाँ कुछ आंवला के पेड़ शहर में बचे हैं, वहां तो भोजन और पिकनिक हो गई..। शहर में गिने चुने आंवला के पेड़ है..ये और लगाये जाये, इसकी किसी को फ़िक्र नही।

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एक दिन बाद देवउठनी एकादशी होगी, बिलासपुर से 22किमी दूर ‘रानीगांव’ से काला मीठा गन्ना बाजार पहुँच गया। कभी इस गाँव में ‘पीला बंगला’ गन्ना होता था, नर्म और रसदार पर बाजारवाद ने इस नायब किस्म को लुप्त कर दिया ।ये विडम्बना है, अब हम जिनकी पूजा करते है, उनकी रक्षा और अभिवृद्धि के लिए कुछ नहीं कर रहे,,!

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