प्रकृति से जोड़ता है रविन्द्र साहित्य…अमर अग्रवाल

Gurudev ravindranath taguar janti (3)बिलासपुर—- कविन्द्र रविन्द्र नाथ टैगोर देश के धरोहर हैं।  उनके साहित्य को आत्मसात करने के बाद जीवन के आनन्द को आसानी से समझा जा सकता है। रविन्द्र नाथ की रचनाएं प्रकृति का बोध कराती हैं। मन को प्रफल्लित करने वाली होती हैं। उन्होने ही राष्ट्रगान की रचना की। राष्ट्रगान सुनते ही पूरा देश सम्मान के साथ खड़ा हो जाता है। यह बातें नगरीय प्रशासन मंत्री अमर अग्रवाल ने सांई धाम तोरवा में आयोजित गुरू रविन्द्र नाथ टैगोर जयंती कार्यक्रम में कहीं।

                                निकाय मंत्री ने कहा कि रविन्द्र नाथ टैगोर, बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। नोबेल विजेता गुरू रविन्द्र का जीवन दर्शन को नई पीढ़ी को जानना बहुत जरूरी है। उनके लिखे राष्ट्रगान के सम्मान में पूरा देश खड़ा हो जाता है। अमर ने कहा कि बिलासपुर में उनकी कविता को रेलवे स्टेशन बिलासपुर के वेटिंग हाल में लगाया गया है। कविता में प्रकृति और विश्व मानव के प्रति प्रेम छलकता है।

            अमर ने बताया कि गुरू रविन्द्र नाथ टैगोर की  रचनाओं को पढ़ने से जीवन के प्रति उत्साह मिलता है। वे एक एक भारतीयों के प्रेरणा स्त्रोत हैं।ऐसे महापुरूषों की जयंती से भावी पीढ़ी को जानने का अवसर मिलता है।

                                 कार्यक्रम के प्रारंभ में अमर समेत सभी अतिथियों ने गुरू रविन्द्र नाथ टैगोर के चित्र के सामने दीप प्रज्वलित किया। कार्यक्रम में कु. चुमकी घोष ने रविन्द्र संगीत  और श्रीमती बरूआ ने शास्त्रीय नृत्य पेश किया।

                                 कार्यक्रम में महापौर किशोर राय, विद्या केडिया, अशोक विधानी समेत बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक मौजूद थे।

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