फर्जी डिग्री देने वाले विवि को लेकर सीएम का रवैया सख्त:मान्यता रद्द करने की चेतावनी

327विवि समन्वय समिति की मीटिंग में राज्यपाल ने कहा – उच्च शिक्षा की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं

रायपुर।राज्यपाल एवं कुलाधिपति बलरामजी दास टंडन की अध्यक्षता में बुधवार को राजभवन में विश्वविद्यालय समन्वय समिति की 25वीं बैठक हुई। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, उच्च शिक्षा मंत्री प्रेम प्रकाश पाण्डेय, कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल, स्वास्थ्य मंत्री अजय चन्द्राकर, मुख्य सचिव विवेक ढांड सहित राजकीय और निजी विश्वविद्यालयों के कुलपति एवं समिति के सभी सदस्य उपस्थित थे। प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने एवं छात्र हित में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय इस बैठक में लिए गए। राज्यपाल ने इस मौके पर कहा कि उच्च शिक्षा में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

                          सभी विश्वविद्यालय अपनी प्रतिष्ठा को ध्यान में रखकर सावधानी से कार्य करें। उन्होंने कहा कि सभी विश्वविद्यालयों में अकादमिक कैलेण्डर का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए।समन्वय समिति के बैठक में निर्णय लिया गया कि स्नातक प्रथम वर्ष में प्रवेश की प्रक्रिया 01 जून 2017 से 30 जून 2017 तक पूर्ण की जाए।पहले प्रवेश प्रक्रिया 16 जून से शुरू होती थी।

                        बैठक में जानकारी दी गई कि राज्यपाल के निर्देशानुसार विश्वविद्यालयों में पेंडिंग डिग्री जो विद्यार्थियों को नहीं बंटी है, उसके निपटारे के लिए एक समिति गठित की गई है। समिति के अध्यक्ष उच्च शिक्षा के आयुक्त होंगे। लंबित डिग्रियों का वितरण तीन माह के भीतर सुनिश्चित किया जाएगा।

                          मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालयों को शिक्षा की गुणवत्ता पर अधिक फोकस करना चाहिए। शैक्षणिक कैलेण्डर का अनिवार्य रूप से पालन करना चाहिए। उन्होंने सख्त लहजे में सचेत किया कि अनुचित रूप से डिग्री देने वाले विश्वविद्यालय सुधर जाएं, नहीं तो ऐसे विश्वविद्यालयों की मान्यता भी रद्द की जा सकती है।

                    बैठक में निर्णय लिया गया कि स्नातक के विद्यार्थियों के वार्षिक परीक्षा परिणाम में आंतरिक मूल्यांकन भी जोड़ा जाएगा ताकि विद्यार्थी वर्ष भर सतत् रूप से अध्ययन से जुड़े रहें।

                        राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश में दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से संचालित कोर्सेस प्रभावी ढंग से संचालित किये जाएं। दूरस्थ शिक्षा पद्धति का प्रमुख उद्देश्य प्रदेश के दूरस्थ क्षे़त्रों तक उच्च शिक्षा उपलब्ध कराया जाना है। किन्तु यह ध्यान रखना भी जरुरी है कि जो विद्यार्थी दूरस्थ शिक्षा पद्धति से जिस पाठयक्रम का अध्ययन कर रहा है, उसका स्तर ऐसा हो कि वह व्यक्ति योग्य एवं सक्षम बन सके, ताकि उसके पढ़ाई के उद्देश्य की पूर्ति हो सके।

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