बस्तर में उत्साह के साथ मनाया गया हरेली पर्व, मंत्री प्रेमसाय सिंह ने कबड्डी खेल कर किया प्रतियोगिता का शुभारंभ

दरभा।छत्तीसगढ़ की ग्रामीण संस्कृति का पहला और प्रमुख हरेली- आमुस तिहार आज बस्तर जिले में पारम्परिक ढंग से पूरे उत्साह से मनाया गया।  हरेली में पारंपरिक कृषि यंत्रों की पूजा करके किसान संतुष्ट दिखे, वहीं ग्रामीण खेल कूद प्रतियोगिता के आयोजन से युवाओं में नया जोश और सरकारी छुट्टी के कारण बच्चों में अलग उत्साह दिखा। जिले का मुख्य कार्यक्रम दरभा विकासखंड के ग्राम कोयनार में आयोजित किया गया, जिसमेे स्कूल शिक्षा, आदिम जाति कल्याण और जिले के प्रभारी मंत्री डॉ प्रेमसाय सिंह टेकाम शामिल हुए। मंत्री के पहुचने पर ग्रामीणों का उत्साह दोगुना हो गया।

प्रभारी मंत्री डॉ टेकाम ने कोयनार के चालकी गुड़ा में नवनिर्मित गोठान का लोकार्पण किया। उन्होने गायों की पूजा की। लड्डू खिलाया और गोठान में वृक्षारोपण किया। उन्होंने गोठान में उपलब्ध सुविधाओ का जायजा लिया। डॉ टेकाम ने कबड्ड़ी खेलकर प्रतियोगिता का शुभारंभ किया। विधायक श्री रेखचंद जैन और अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी बच्चों के साथ कबड्डी खेला। उन्होंने वालीबाल और खो-खो प्रतियोगिता का भी शुभारंभ किया। प्रभारी मंत्री ने कोयनार के चालकीगुड़ा गोठान के संचालन के लिए गोठान संचालन समूह मोगराफूल महिला स्वसहायता समूह को एक लाख रूपए का चेक प्रदान किया। डॉ. टेकाम ने कर्ज माफी प्रमाण पत्र, किसानों को मिनी किट, फलदार पौधे, सब्जी बीज का वितरण किया और सांस्कृतिक दलों को शील्ड प्रदान कर सम्मानित किया।

प्रभारी मंत्री श्री टेकाम ने इस अवसर पर कहा कि हरेली तिहार में सरकार अपनी भागीदारी निभा कर छत्तीसगढ़ की परम्परा और संस्कृृति को सहजने का काम कर रही है। उन्होंने बस्तरवासियों को हरेली आमुस तिहार की बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार बनने के बाद सबसे बड़ा फैसला किसानों के हित में लिया गया। किसानों का कर्ज माफ किया गया। किसानों का धान ढाई हजार रूपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदा। बिजली बिल हॉफ किया गया। उन्होंने कहा कि नरवा, गरवा, घुरवा और बाड़ी भी किसानों के लिए लागू किया गया है। इससे छत्तीसगढ़ की पुरानी पहचान स्थापित होगी, वहीं इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी।

यूनीवर्सल सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन कार्ड का नवीनीकरण किया जा रहा है। जिनका राशन कार्ड का नवीनीकरण नहीं हो पाया है, उन्हें भी पुराने राशन कार्ड से राशन मिलता रहेगा। प्रभारी मंत्री ने कहा कि बस्तर में कुपोषण दूर करने के लिए अब चना के साथ दो किलो गुड़ भी दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों को रोजगार देने के लिए बस्तर कनिष्ठ चयन बोर्ड का गठन किया जा रहा है। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा। इसके साथ ही वनोपज और खाद आधारित प्रसंस्करण इकाईयों की स्थापना भी बस्तर मंे की जा रही है।

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