बिना क्लियरेंस के हो रहा रेत उत्खनन

IMG-20151024-WA0018बिलासपुर— खनिज विभाग की मानें तो अभी रेतघाट की अनुमति किसी को नहीं दिया गया है। जो भी बिना अनुमति के रेत निकालेगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। बावजूद इसके अरपा की गोद से अंधाधुंध रेत का उत्खनन हो रहा है। मजेदार बात तो यह कि एक तरफ खनिज विभाग अनुमति नहीं देने का राग अलाप रहा है तो दूसरी तरफ रेत माफियों का कहना है कि शासन ने पंचायत के जरिए उन्हें रेत उत्खनन की अनुमति दी है। नतीजतन अरपा को सरेआम बीहड़ बनाने का खेल चल रहा है वह भी शासन के नाक के नीचे।

                                        नियमानुसार शासन के आदेश पर खनिज विभाग पंचायतों को रेतघाट का आवंटन करता है। रायल्टी पर्ची भी देता है। लेकिन इस बार अभी तक खनिज विभाग ने किसी ग्राम पंचायत को रेतघाट का जिम्मा नहीं दिया है। खनिज विभाग की माने तो किसी भी ग्राम पंचायत ने उन्हें रेतघाट के लिए अनुमति नहीं मांगा है। इसलिए अरपा से रेत उत्खनन किये जाने का सवाल ही नहीं उठता है।

                          खनिज विभाग के दावे के विपरीत सच्चाई कुछ अलग ही है। कोनी से लेकर सेंदरी घुटकू तक अंधाधुंध रेत उत्खनन का खेल चल रहा है। शायद विभाग को भी इस बात की जानकारी अच्छी तरह से है। बावजूद इसके उसका दावा है कि अरपा में फिलहाल किसी भी ग्राम पंचायत को रेतघाट आवंटित नहीं किया गया है। इसलिए रेत उत्खनन करने का सवाल ही नहीं उठता है।

                                 मालूम हो कि कोनी,सेंदरी में रात में ही नहीं बल्कि खुले आम दिन के उजाले में रेत उत्खनन चल रहा है। बड़ी-बड़ी मशीने और हाइवा दूर से ही दिखाई देती हैं। जानकारी के अनुसार रेतघाट खोलने के लिए पर्यावरण विभाग से भी अनुमति होना जरूरी है। लेकिन रेत माफियों ने अनुमति को अपने ठेंगे पर रखकर रेत उत्खनन करने से बाज नहीं आ  रहे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अभी तक किसी को रेत उत्खनन का जिम्मा तो नहीं दिया गया है लेकिन मिली भगत के खेल में रेत ठेकेदारों का एनओसी पहले से ही बनकर तैयार है। जिस दिन अधिकारी छुट्टी से कार्यालय पहुंचेगे उसी दिन इस अवैध उत्खनन को वैध का लायसेंस मिल जाएगा।

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