Watch VIDEO:बिलासपुर का जनरल ओ डायर…कांग्रेस कार्यालय में घुसकर लाठी चार्ज..अटल समेत दर्जनों कांग्रेसियों को गिराकर पीटा…पुलिस की गुन्डागर्दी देख दहशत में शहर

बिलासपुर— जलियावाला काण्ड तो सबको याद ही होगा। बिलासपुर कांग्रेस कार्यालय में आज ऐसा ही कुछ हुआ। लोग ठीक ही कहते हैं कि इतिहास अपने आप को दुहराता है। जिस इतिहास के छात्र ने कांग्रेस भवन में पुलिस का गंदा और खुंखार चेहरा देखा। उसने यही कहा कि ऐसा ही कुछ जलियावाला काण्ड 1919 में हुआ होगा। अन्तर बस इतना ही था कि जलियावाला काण्ड में गोली चली और बिलासपुर कांग्रेस कार्यालय में लाठी चार्ज हुआ। कुल मिलाकर पुलिस ने दिखा ही दिया कि उससे बड़ा गुण्डा कोई दुसरा हो ही नहीं सकता। क्योंकि आज कांग्रेस भवन में  केवल और केवल पुलिस की गुण्डागर्दी थी..लोकतंत्र और कानून तो जैसा पुलिस के पैरों की दासी बनकर रह गयी। कांग्रेस नेताओं को ना केवल गिरफ्तार किया गया। बल्कि जिस तरह से गिरफ्तारी हुई वह रोंगटे खड़े करने वाला था। महिलाओं को वाशरूम से घसीटकर निकाला गया। अटल,नरेन्द्र विनोद और कई पूर्व विधायकों को घसीटकर इतना मारा गया कि कई के टांग टूट गए तो अटल समेत कई कांग्रेसी नेताओं के सिर भी फूट गए। और बिलासपुर पुलिस का जनरल ओ डायर एडिश्ल एसपी नीरज चन्द्राकर पांगलों की तरह सीना ठोककर कहता रहा। पत्रकारों को जो उखाड़ना हो उखाड़ लें..जो छापना हो छाप लें। मेरा काम करने का अंदाज ही कुछ ऐसा है। जरूरत पड़ी तो अभी और मारूंंगा। क्योंकि मेरा कोई कुछ नहीं उखाड़ सकता है..बड़े अधिकारी भी।

यह सच है कि इतिहास अपने आपको दुहराता है। पुलिस का नया जनरल ओ डायर यानी नीरज चन्द्राकर ने आज कांग्रेस भवन को जलियावाला काण्ड का नया कलेवर पेश किया।मामला कुछ इस तरह है। जब कांग्रेस नेता  मंत्री के बंगले में कचरा फेंकने में कामयाब हो गए। इसी के साथ व्हीआईपी सुरक्षा में भारी चूक को देखकर हाथ मलते रहे। कचरा फेंकने के बाद कांग्रेसी गिरफ्तारी देने भी गए..अपने आप से नाराज एडिश्नल एसपी ने गिरफ्तार करने से मना कर दिया। शायद उनके दिमाग में इतिहास दुहराने की मंशा थी। शायद इसलिए ही उन्होने गिरफ्तारी नहीं की।कचरा फेंकने के बाद सभी कांग्रेसी अभी कांग्रेस भवन पहुंचे ही नहीं थे कि इसी बीच एडिश्नल एसपी तीन चार डग्गा और दो सौ से अधिक लेकर कांग्रेस भवन पहुंच गए। एडिश्नल एसपी के आदेश के बाद देखते ही देखते कांग्रेस भवन को पुलिस ने घेर लिया। घेराव कुछ जलियावाला बाग काण्ड की ही तरह था।
करीब एक घंटे बाद घुसकर गिरफ्तारी
कांग्रेस भवन कांग्रेसियों को गिरफ्तार करने पहुंची पुलिस कांग्रेस भवन को सैकड़ों पुलिस के साथ घंटो घेरकर खड़ी रही। अन्दर महिला और पुरूष कांग्रेस नेता कार्यकर्ताओं के साथ रामधुन गाते रहे। इसी बीच हाथ में बेंत लेकर पुलिस कांग्रेस कार्यालय के अन्दर दाखिल हुई। पुलिस ने जिस तरह की कार्रवाई की देखकर रोंगटे खड़े हो गए। महिलाओं को वाशरूम से घसीटकर बाहर निकाला गया। एक-एक नेताओं पर दस-दस लाढियां बरसाई गयी। कांग्रेस नेताओं को पुलिस ने घसीट घसीट कर मारा। इतना मारा कि किसी की आंख फूटी तो किसी का कान फट गया।

अटल,विनोद,चतुर्र्वेदी और विनोद समेत दर्जनों नेताओं को घसीटकर मारा
 पुलिस जब कांग्रेस कार्यालय के अन्दर गिरप्तार करने पहुंची तो कुछ कांग्रेसी अपने आप पुलिस डग्गा में बैठने निकले। इसी बीच एडिश्नल एसपी के इशारे पर कांग्रेस के बड़े नेताओं को चुन चुनकर निशाना बनाया गया। अटल और विनोद साहू समेत नरेन्द्र बोलर को तो पुलिस ने बस के नीचे घसीटककर लात घूंसो से मारा। अटल का सिर फूट गया। बावजूद इसके जनरल ओ डायर का गुस्सा शांत नहीं हुआ। महिला नेत्रियों की पीठ पर दो-दो पुलिस वालों ने बेत चलाए। इसके बाद सभी नेताओं को लेकर पुलिस थाने चली गयी। बताया जा रहा है कि अटल समेत कई कांंग्रेसियों की हालत बहुत गंभीर है।

पागलों की तरह दहाड़ता रहा नीरज चन्द्राकर
 इधर जब लाठिया बरस रही तो..दूसरी तरफ कुछ दूर बिलासपुर पुलिस का जनरल ओ डायर दहाडता रहा। गाली गलौच कर कहता रहा मेरा कोई कुछ नहीं उखाड़ सकता। पत्रकारों को खुला चैलेंज किया कि जितना छापना हो छाप लोग। बड़े अधिकारी भी मेरा कुछ नहीं कर सकते। तैश में आकर उसने पत्रकारों के साथ भी गाली गलौच किया।

भूपेश बघेल रायपुर से बिलासपुर रवाना
बताया जा रहा है कि घटना की जानकारी मिलने के बाद भूपेश बघेल समेत कांंग्रेस के आला नेता बिलासपुर की तरफ रवाना हो गए हैं। भूपेश ने कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होने कहा कि लोकतंत्र में पागलों का स्थान पागल खाने में है। बाकी बातें बिलासपुर पहुंचने और हालात के बाद होगी।

महिला नेत्रियों पर भी लाठी चार्ज
पुलिस की लाठी महिलाओं पर भी जमकर चली। कई वरिष्ठ और उम्रदराज नेत्रियों को गहरी चोट आयी है। बताया जा रहा है कि नेत्रियों की भी हालत खराब है।

Comments

  1. By Chandra shekhar soni

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  2. By Dp suraj

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  3. By अमन छाबड़ा

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    • By चंद्रशेखर वर्मा

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