मेरा बिलासपुर

बिलासपुर नहीं..कुनबा को बनाया जाएगा स्मार्ट …

bilaspurबिलासपुर—एक महीने बाद थोड़ी बहुत पिक्चर साफ हो रही है। बिलासपुर का कोई एक हिस्सा ही स्मार्ट बनेगा। बाकी हिस्सा पैन सिटी की सुविधा का आनन्द लेगा। मोदी के स्मार्ट सिटी में बहुत दांव पेंच हैं। टाप 20 स्मार्ट सिटी में शामिल होने के लिए आम जन की राय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस बात को ध्यान में रखते हुए एक दिन पहले निगम आयुक्त ने पत्रकारों के साथ एक बैठक कर सुझाव मांगा। बैठक चालाकी की भेंट चढ़ गयी। इस दौरान पत्रकार काफी भ्रमित नज़र आए। उन्हें महसूस किया कि इस पूरे मामले में कुछ छिपाया जा रहा है। नतीजन चाय नाश्ता के बाद दूसरी बैठक के आश्वासन के साथ बैठक खत्म हुई।

                 बहरहाल बैठक के बाद लोगों को समझ में आया कि बिलासपुर का कोई एक हिस्सा ही स्मार्ट बनेगा। बाकि  पैन सुविधा के सहारे रहेंगे। बावजूद इसके बैठक में बहुत कुछ स्प्ष्ट किया जाना बाकी था।  लेकिन पत्रकारों ने इसका इंतजार नहीं किया। इसलिए दूसरी बैठक में उम्मीद है कि सारा मामला सामने आ जाएगा।

               सीजी वाल ने कई लोगों से मिलकर स्मार्ट सिटी परिकल्पना को सामने लाने का प्रयास किया है। इसमें कांग्रेस ही नहीं बल्कि भाजपा के नेता भी शामिल हैं। कांग्रेस नेता और निगम पार्षद दल प्रवक्ता शैलेन्द्र जायसवाल ने बताया कि बिलासपुर को स्मार्ट सिटी में शामिल होने के लिए तीन में से किसी एक प्रारूप को चुनना होगा। फिलहाल तीनों में से किसी भी एक प्रारूप को चुनने में निगम को बहुत हाथ पांव मारने होंगे। जो फिलहाल संभव होता दिखाई नहीं दे रहा है।

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                          बिलासपुर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए तीनों में से किसी एक फार्मेट पर तय समय सीमा में मुहर लगाना होगा। इनमें से SMART_CITY_BITE_SHAILENDRA 005एक योजना रिट्रोफिटिंग है। इसके तहत बिलासपुर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए पांच सौ एकड़ क्षेत्र की जरूरत है। क्षेत्र को अधिक सक्षम और रहने योग्य बनाने की बात की जा रही है। इस योजना में पुरानी बसाहट को वर्तमान स्वरूप में ढालने के लिए तोड़फोड़ किया जाएगा। शैलेन्द्र जायसवाल ने बताया कि शहर में कहीं भी पांच सौ एकड़ जमीन नहीं है और ना ही एक मुश्त बसाहट ही है। जो है वह तैयार नहीं होंगे। ऐसी सूरत में इस योजना का बिलासपुर में लागू होना संभव नहीं है। इतनी जमीन केवल अरपा विकास प्राधिकरण के पास है। हो सकता है कि विवाद की स्थिति में क्षेत्र को रिट्रोफिटिंग के जरिए योजना को मूर्त रूप दिया जाए। क्योंकि शहर के पास इसके अलावा ऐसा कोई स्थान भी नहीं है।

                       स्मार्ट सिटी का दर्जा पाने का दूसरा विकल्प पुनर्विकास का है। इस योजना को पचास एकड़ वाले क्षेत्र में तैयार किये जाने की बात कही जा रही है। योजना के तहत् शहर में पचास एकड़ बसाहट वाले क्षेत्र का पुनर्विकास किया जाएगा। इसमें पुराने वसाहट को पूरी तरह से खत्म किया जाएगा। ले आउट के अनुसार क्षेत्र को सर्वसुविधायुक्त नया स्वरूप दिया जाएगा। ऐसी सूरत में नागरिक क्या इसके लिए तैयार होंगे कह पाना मुश्किल है। फिलहाल निगम ने ऐसे क्षेत्रों को  तलाशना शुरू कर दिया है।  रहा है। यदि तलाश पूरी होती है तो शहर के अन्य हिस्सों में इस बात को लेकर काना फूंसी शुरू हो जाएगी कि व्हीआईपी क्षेत्र को ध्यान दिया जा रहा है। अभय नारायण कहते हैं कि हम यह मानकर चलते हैं कि स्मार्ट सिटी के लिए निगम अंत में पुनर्विकास के विकल्प पर ही मुहर लगाएगा। जाहिर सी बात है कि इस योजना पर भाजपा अपने वोट बैंक को ध्यान में रखकर ही काम करेगी। उन्होंने कहा कि अब तो स्मार्ट सिटी का अर्थ देशभक्त से होना लगाया जा रहा है। चाहे शहर को नुकासन ही क्यों ना हो।

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IMG_20151003_140640                   स्मार्ट सिटी का तीसरा विकल्प ग्रीन बेल्ट योजना है। इसे यदि गुजरात माडल कहें तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। इस योजना में सरकार को 250 एकड़ खाली जमीन की जरूरत है। इसके तहत सुव्यवस्थित समाधान के साथ गरीबों के लिए सस्ते दर पर मकान तैयार किये जाँएंगे। इस योजना के तहत् गुजरात राज्य में जीआईएफटी शहर बसाया गया है। यह क्षेत्र या तो यूएलबी के अन्तर्गत आएगा या फिर शहरी विकास प्राधिकरण के अधिकार सीमा में होगा। नाम नहीं छापने के शर्त पर भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि यह योजना अरपा विकास क्षेत्र में ही लागू होगा। उसने बताया कि इसके अलावा हमारे पास कोई क्षेत्र नहीं है जहां हम 250 एकड़ जमीन की व्यवस्था कर सकें।

               बहरहाल यह तो हुई स्मार्ट सिटी की योजना। इसमें एक योजना और भी शामिल हैं जिसे लोग पैन सिटी कहते हैं। इस योजना के तहत बिजली पानी सड़क,पेयजल, सालिड वेस्ट मैनेंजमेंट,परिवहन को शामिल किया गया है। यही एक मात्र योजना है जिसका सुख समूचे बिलासपुर को मिलेगा। कितना मिलेगा। यह तो समय बतायेगा। फिलहाल जमीन और स्मार्ट सिटी के लिए माथा पच्ची चल रही है।

                                    सीजी वाल कल बतायएगा कि इन योजनाओं में से जो भी योजना बिलासपुर में लागू होगी उसमें किस प्रकार से तकनीकि रूकावट और नेताओं की राजनीति सामने आएगी। साथ ही सीजीवाल यह भी बतायेगा कि इसमें किसे कितना नुकसान और किसे कितना फायदा हो सकता है।

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