हमार छ्त्तीसगढ़

बिलासपुर में फोरेंसिक लेब. के लिए आठ करोड़़ मंजूर

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रायपुर ।   छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आपराधिक मुकदमों में गवाहों की सुरक्षा के लिए राज्य में बहुत जल्द ‘गवाह सुरक्षा कानून’ बनाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा है कि पुलिस को प्रकरणों में मजबूत साक्ष्य जुटाने और निष्पक्ष विवेचना के लिए और भी अधिक बेहतर संसाधन दिलाए जाएंगे। राज्य में डीएनए टेस्ट के लिए प्रयोगशाला भी शुरू की जाएगी। इसके साथ ही चार जिलों कोरबा, बिलासपुर, रायपुर और कांकेर में अपराध विज्ञान अनुसंधान प्रयोगशाला स्थापना के लिए आठ करोड़ रूपए से अधिक राशि मंजूर की गई है। मुख्यमंत्री ने शनिवार को  यहां न्यायपालिका और कार्यपालिका के वरिष्ठ अधिकारियों की पहली राज्य स्तरीय कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए अपने उदबोधन में यह घोषणा की।
उल्लेखनीय है कि यह एक दिवसीय कार्यशाला ‘आपराधिक न्याय प्रक्रिया में निष्पक्ष अनुसंधान और निष्पक्ष सुनवाई विषय पर निकटवर्ती ग्राम निमोरा स्थित ठाकुर प्यारेलाल ग्रामीण विकास संस्थान में आयोजित की गई। इसका आयोजन छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, राज्य न्यायिक अकादमी बिलासपुर और छत्तीसगढ़ पुलिस अकादमी (चंदखुरी) द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। शुभारंभ सत्र की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री नवीन कुमार सिन्हा ने की। मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया।
मुख्य अतिथि की आसंदी से संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद इस विषय को लेकर पहली बार इस तरह का आयोजन हो रहा है। इसके लिए उन्होंने आयोजक संस्थाओं को बधाई दी। डॉ. सिंह ने इस अवसर पर पुलिस मुख्यालय द्वारा तैयार की गई विभिन्न मामलों के जांच अधिकारियों के ‘ऑन लाइन डेटा बेस लिंक’ का लोकार्पण भी किया।
अध्यक्षीय आसंदी से छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश श्री नवीन सिन्हा ने अपने संबोधन में कहा कि जांच और सुनवाई के आधुनिक तरीकों से पुलिस और न्यायधीशों दोनों का अवगत होना जरूरी है। तभी निष्पक्ष जांच और सुनवाई में नवीन तकनीकों का सफलतापूर्वक उपयोग किया जा सकेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस कार्यशाला में पुलिस, प्रशासन, लोक अभियोजकों और न्यायधीशों को एक दूसरे के कार्यों, जरूरतों, अपेक्षाओं एवं सीमाओं को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी। श्री सिन्हा ने विश्वास व्यक्त किया कि निष्पक्ष जांच और लोगों को त्वरित न्याय दिलाने के लिए इस कार्यशाला के निष्कर्षों को कार्यपालिका और न्यायपालिका जिला स्तर पर भी लागू करेगी।
विशेष अतिथि की आसंदी से छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी के अध्यक्ष और बिलासपुर उच्च न्यायालय के न्यायधीश श्री प्रशांत कुमार मिश्रा ने कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में होने वाली चर्चा के बिंदुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने उम्मीद जताई कि पुलिस और न्यायपालिका द्वारा लोगों को त्वरित न्याय दिलाने की दिशा में यह कार्यशाला एक सार्थक कदम साबित होगा। कार्यशाला को पुलिस महानिदेशक श्री ए.एन. उपाध्याय ने भी सम्बोधित किया।
राज्य स्तरीय इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में उपस्थित सभी लोगों के प्रति राज्य न्यायिक अकादमी के निदेशक श्री गौतम चौरड़िया ने आभार प्रकट किया। कार्यशाला में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति श्री मनिन्द्र मोहन श्रीवास्तव, श्री प्रीतिंकर दिवाकर, न्यायमूर्ति श्री गौतम भादुड़ी, न्यायमूर्ति श्री संजय के. अग्रवाल और न्यायमूर्ति श्री चंद्रभूषण वाजपेयी सहित गृह विभाग के प्रमुख सचिव श्री बी.व्ही.सुब्रमणियम, छत्तीसगढ़ राज्य पुलिस अकादमी के निदेशक श्री आनंद तिवारी, प्रदेश के सभी अपर पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक, जिलों के जिला एवं सत्र न्यायाधीश, अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी, कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश और अपराधिक न्याय प्रक्रिया में निष्पक्ष जांच और सुनवाई विषय से जुड़े न्यायपालिका, कार्यपालिका, पुलिस, अभियोजन और विधि वैज्ञानिक वर्ग के प्रतिभागी अधिकारी उपस्थित थे। शुभारंभ सत्र के पश्चात कार्यशाला में पांच अलग-अलग समूहों में संबंधित विषयों पर गहन चर्चा की गई।

 

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