मेरा बिलासपुर

बीयू की कमेटी ने ही खारिज कर दी थी री-काउंटिंग की अर्जी

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बिलासपुर । बिलासपुर विश्वविद्यालय (बीयू) के छात्र संघ चुनाव का विवाद गहराता जा रहा है। इस सिलसिले में जो जानकारी मिल रही है, उसके मुताबिक वि.वि. छात्र संघ चुनाव से संबंधित समस्या निवारण समिति की 2 सितम्बर को हुई मीटिंग में ही एव्हीवीपी उम्मीदवार सौरभ सराफ के पुनर्गणना आवेदन को खारिज कर दिया गया था। सीजीवाल को इस मीटिंग में हुए फैसले की कॉपी मिली है। इसके बाद जिस तरह वोटों की गिनती फिर से कराए जाने पर हंगामें की स्थिति बनी है यह सवाल अपनी जगह कायम है।

मिली जानकारी के मुताबिक बीयू छात्रसंघ  अध्यक्ष के चुनाव में  सात वोट से   पिछड़ने के बाद अध्यक्ष पद के उम्मीदवार सौरभ सराफ ने पुनर्गणना के लिए अर्जी लगाई थी। इस पर विचार करने के लिए समस्या निवारण समिति की आवश्यक बैठक 2 सितम्बर की तारीख पर ही रखी गई थी। जिसमें समिति के सदस्य डा. एच.एस.होता, डा. यू.के. श्रीवास्तव और श्रीमती सुमोना भट्टाचार्य शामिल हुए। मीटिग की प्रोसीडिंग में तीनो के दस्तखत हैं।प्रोसीडिंग के मुताबिक पुनर्गणना के आवेदन पर समिति ने विचार किया। जिसमें फैसला किया गया कि चूंकि मतपत्रों की गणना का काम महाविद्यालय स्तर पर सम्पन्न हुआ है। वि. वि में प्रत्येक जिले के चिन्हित महाविद्यालयों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर गिनती कर चुनाव नतीजे का ऐलान किया गया है। इस बीच किसी भी कॉलेज या किसी भी जिले के चिन्हित कॉलेज से मतपत्रों की गणना के समय किसी तरह की आपत्ति दर्ज किए जाने की शिकायत विश्व विद्यालय को नहीं मिली है। लिहाजा इस आधार पर समिति का निष्कर्ष है कि मतपत्रों  की गणना में कहीं भी त्रुटि नहीं रही है। साथ ही उम्मीदवार की ओर से पेश आवेदन में केवल नतीजे से संतुष्ट नहीं होने की बात लिखी गई है।समिति ने माना कि यह तर्कसंगत आपत्ति की श्रेणी में नहीं है और केवल इसी आधार पर पुनर्गणना नहीं कराई जा सकती है। बैठक की कार्यवाहीके आखिर  में साफ लिखा गया है कि उम्मीदवार सौरभ सराफ के पुनर्गणना के आवेदन को अमान्य किया जाता है।

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गौरतलब है कि बुधवार को चुनाव कराए जाने और अध्यक्ष पद पर सात वोट से एनएसयूआई समर्थित उम्मीदवार ज्ञानेस्वर रामटेके की जीत की खबर आने के बाद यह खबर भी आई कि वि.वि. री-काउंटिंग कराने राजी हो गया है। जिसके विरोध में  गुरूवार को एनएसयूआई और कांग्रेस के लोग बड़ी संख्या में वि.वि. कैंम्पस पहुंचे और हंगामें की स्थिति बनी। यदि वि,वि. प्रशासन ने पहले ही फिर से वोट गिनने की अर्जी खारिज कर दी थी फिर हंगामे की स्थिति क्यूं बनी और सभी को भरोसे में लेकर सहमति कायम करने की पहल क्यूं नहीं की गई  ? इस सवाल के जवाब के लिए कैम्पस में भारी हंगामे के बीच वि.वि. प्रशासन के रुख का इंतजार   इस खबर को लिखे जाने तक   किया जा रहा है।

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