मेरा बिलासपुर

बुलेट चलाने वाला कौन…

27 june 15

बिलासपुर—गोली चलाने वाला कौन…शहर में आज लोगों के बीच जमकर चर्चा है…कोई शराब व्यावसायी का पंडा बता रहा है…तो कोई सिक्यिरिटी कर्मचारी….पुलिस भी इस मामले में कुछ स्पष्ट नहीं कर रही है कि गोली चलाने वाला क्या काम करता है…हां नाम जरूर बता रही है कि उसका नाम दिनेश सिंह है।

                              कल देर रात राजकिशोर नगर और बिलासपुर को जोड़ने वाले पुल पर एक युवक ने हवाई फायर की। हवाई फायर की गूंज जहां तक पहुंची वहां के लोगों को तो पता चल गया कि कहीं कुछ गड़बड़ हुआ है। लेकिन सुबह शहर में सनसनी फैल गयी कि सन्नाटा में किसी ने हवाई फायर कर अपने आतंक का झण्डा गाड़ने का प्रयास किया है। यद्पि देर रात ही दिनेश सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया। सुबह होने तक सबको यही मालूम था कि हवाई फायर करने वाला किसी शराब व्यवसायी का पंडा है लेकिन बाद में सारे बयान पुलिस ने उलट दिये कि हवाई फायर करने वाला युवक सिक्यूरिटी कर्मचारी है।

                           जानकारी के अनुसार बिलासपुर में तीस से अधिक एजेंसियां सुरक्षा कर्मचारी मुहैया कराती हैं। यह आंकड़े ज्यादा भी हो सकते हैं। आश्चर्य की बात नहीं कि जितनी भी सुरक्षा एजेंसियां शहर में संचालित हो रही हैं। वे सभी बाहर से आए हुए लोगों के हैं। इनमें मालिक ही नहीं बल्कि सभी कर्मचारी भी शामिल हैं। जाहिर सी बात है कि इन सबकी जानकारी पुलिस महकमें को जरूर होगी। तो ऐसे में प्रश्न उठता है कि बार बार दो प्रकार के बयान क्यों आ रहे हैं। इसे समझने के लिए ज्यादा माथा पच्ची की जरूरत नहीं है….लेकिन इतना तो सच है कि देर रात शहर हवाई फायर के बाद शहर सदमें में है। साथ ही पुलिसिंग कार्यप्रणाली को लेकर चिंतित भी।

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                 आरोपी को पकड़ लिया गया है। शुक्र है कि उस समय पुलिस दस्ते की टीम वहीं से गुजर रही थी। अन्यथा आरोपी तोरवा थाने तक भी नहीं पहुंचता। कहने का मतलब है कि वह अपने मालिक का काम दूसरे दिन भी मुस्तैदी के साथ करता।

                         फिलहाल पुलिस दिनेश सिंह को पकड़कर अपना पीठ ठोक रही है। लेकिन लोगों का प्रश्न अब भी निरूत्तर है कि आखिर सुरक्षा एंजेसियां चलाने वालों की जानकारी पुलिस को है की नहीं। अगर नहीं है तो…यदि थोड़ा बहुत है भी तो…. क्या उनकी गहन जांच होगी। यदि ऐसा हुआ तो उनके सामने सब कुछ आइने की तरह साफ हो जाएगा कि बिलासपुर इन दिनों असामाजिक तत्वों का अड्डा बनता जा रहा है। इसे बनाने वाले स्थानीय नहीं बल्कि बाहर के आए हुए किराये के वफादार लोग है।

                       जानकारी के अनुसार पुलिस को पता चला है कि दिनेश सिंह के पास पिस्टल रखने का लायसेस नहीं है। इससे जाहिर होता है कि लोग लायसेंस किसी दूसरे हथियार का बनवाते हैं और रखते है कुछ दूसरा…निश्चित रूप से यह जांच का विषय है।

                            बहरहाल दिनेश सिंह को बचाने का प्रयास चल रहा है। इसमें शराब व्यवसायी, सुरक्षा  एजेसी और कुछ पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं। जरूरत है इस गठजोड़ को तोड़ने की। उस कानून को भी खंगालने की जिसे पुलिस महकमा भली भांति जानता है। इनमे बाहर से आने वालों की मुसाफिरी के साथ ही मकान मालिकों को किरायेदारों की जानकारी थाने में देना प्रमुख है। बिलासपुर में सुरक्षा एजेंसियों की इतनी बाढ़ आयी कहां से…इसे भी पता लगाने की जरूरत है। जिन्हें सुरक्षा गार्ड के लिए चुना गया है…वे हैं कौन..वे आए कहां से हैं…..उनका पिछला रिकार्ड क्या है…और वे कितना शिक्षित हैं….पुलिस विभाग ने यदि ऐसा कर दिया तो बताने की जरूरत नहीं कि बिलासपुर स्वर्ग था..स्वर्ग है..और स्वर्ग रहेगा…अन्यथा…एक दिन हवाई फायर का बुलेट हवा में नहीं बल्कि किसी के सीने को पार कर देगी।

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जांच की जरूरत

        पिछले कुछ सालों से बिलासपुर में सुरक्षा एजेंसियों की बाढ़ आ गयी है। यह कहां से आते हैं..इनका रिकार्ड क्या है…इन्हें किस प्रकार के हथियार रखने की इजाजत है..इन तमाम मुद्दों को लेकर पुलिस को एक अभियान चलाने की जरूरत है। देखने में आया है कि लोग किसी को भी हथियार थमाकर सुरक्षा एजेंसी में शामिल कर लेते हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि काफी हद तक शहर की अमन शांति भंग करने वालों में इन सुरक्षा एजेंसियों का भी हाथ है। मुझे एक जानकारी यह भी मिल रही है कि किसी शराब कंपनी में युवक काम करता था। यदि ऐसा है तो इस बात की भी जांच होनी चाहिए

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