मेरा बिलासपुर

बेटी ने दिया पिता को यादगार उपहार

award_slcबिलासपुर। बेटी बाबुल से कभी जुदा नहीं होती, परायी होकर भी वो मायके को मन से सदा करती हैं। इस बार ‘फादर डे’ पर अपने पिता को सभी ने फेसबुक में पोस्ट कर स्मरण किया,पर ये पोस्ट उस लड़की डा, सुषमा शर्मा के नाम है। जिसने अपने 92 वर्षीय हिंदी और जाने माने साहित्यकार पिताश्री प्, श्याम लाल जी चतुर्वेदी जी पर केन्द्रित पुस्तक का प्रकाशन कर मुख्यमंत्री डा रमन सिंह से विमोचन कराया, इस मौके पर केन्द्रीय मंत्री राजनाथ सिंह और सांसद लखन लाल साहू भी उपस्थित रहे।

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                     s l chaturvediपंडित श्यामलाल चतुर्वेदी,किसी परिचय के मोहताज नहीं, उन्होंने अपना करियर शिक्षक से शुरू किया और हिंदी लेखन और व्याख्यान कला में आप विश्वविद्यालय से कम नहीं, वो छतीसगढ़ राजभाषा आयोग के प्रथम अध्यक्ष रहे। उनकी पुत्री डा सुषमा शर्मा,संस्कृत ओर समाज शास्त्र में एम्ए है और सागर विश्विद्यालय से एम्,जे.एम् सी है।ये उनकी चौथी पुस्तक है। जिसे तीन माह के अथक प्रयास से स्तरीय प्रकाशन किया है।

                    ढाई सौ पेज की इस पुस्तक में, मोतीलाल वोरा, अमर अग्रवाल, डा, सुशील त्रिवेदी, डा.विमल कुमार पाठक,डा. डा,दामोदर प्रसाद तिवारी, रमेश नैयर, नंदकिशोर तिवारी, डा विजय सिन्हा, बांकेबिहारी शुक्ल, गिरीश पंकज, रुद्र अवस्थी, संजय दिवेदी,राजू तिवारी,प्रमोद शुक्ला,डा.एम् एस तम्बोली, कार्तिक राम साहू,डा विनय कुमार पाठक, डा आशा दीवान, डा अंजूशुक्ला, आशा दीवान, डा जगमोहन मिश्र,डा बलदेव,रामेश्वर,कामेश्वर प्रसाद पांडे जी सहित कई विद्वानों के आलेख है। ये सभी वे लेखक हैं जो कभी न कभी या लम्बे समय तक पंडित श्यामलाल चतुर्वेदी के सन्निध्य में रहें है।

                  लेख नई पीढ़ी का पथ प्रदर्शन करते हैं कि गाँव का एक व्यक्ति किस तरह अपने को इस ऊंचाई तक ले जा सका और रचना जगत में अपना योगदान दे सका। डा सुषमा शर्मा ने अपने पिता पर जो सधी कलम से लिखा है वो बताता है एक बेटी अपने पिता के कितने करीब होती है।

Shri Mi

पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ राजनैतिक खबरों पर पैनी नजर
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