बेदखल करने गए..खाली हाथ लौटे…ग्रामीणों ने किया विरोध…तहसीलदार ने दिया 15 दिन का अल्टीमेटम

बिलासपुर—ग्रामीणों के आक्रोश और विरोध के बीच जमीन से बेदलखल कराए बिना तहसील प्रशासन को दो मुहानी से खाली हाथ लौटना पड़ा है। बेदखली का आदेश लेकर पहुंचे कर्मचारियों का स्थानीय लोगों ने जमकर विरोध किया। मौके पर पहुंचे पटवारी और तहसीलदार के सामने स्थानीय लोगों ने जमीन पर मालिकाना हक को लेकर दस्तावेज पेश किये। लोगों ने जमकर बेदखली आदेश के खिलाफ जमकर हंगामा किया। मौके पर तैनात पुलिस कर्मचारियों ने लोगों को किसी तरह शांत कराया। पंचनामा कार्रवाई के बाद तहसीलदार ने कहा कि 15 दिनों के अंदर जमीन खाली नहीं किया गया तो…पुलिस का सहारा लेना पड़ेगा।

             तहसीलार के आदेश के बाद दो मुंहानी में जमीन की बेदखली कराने पहुंचे तहसीलदार,पटवारी,आरआई समेत अन्य सभी सरकारी कर्मचारियों को लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा। तहसीलदार देवी सिंह उइके ने ग्रामीणों को बताया कि जमीन राजीव अग्रवाल की है।यदि 15 दिनों के अन्दर जमीन को खाली नहीं किया गया तो प्रशासन को  पुलिस का सहयोग लेने को मजबूर होना पड़ेगा।

ई भूइंयां में दर्ज

                              भारी विरोध के बीच ग्रामीणों ने बताया कि हम लोगों ने जमीन कब्जा नहीं किया बल्कि खरीदा है। हमारे पास भी दस्तावेज हैं। सरकारी रिकार्ड में काबिज जमीन पर मालिकाना हक है। हम लोग यहां से नहीं हटेंगे। चाहे पुलिस को ही क्यों ना बुलाए। जमीन पर काबिज एक युवक ने बताया कि ई भुइँयां में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि खसरा नम्बर के 76 टुकड़े हैं। सबके पास रिकार्ड  भी है। खसरा नम्बर 255 में कुल 40 टुकड़े हैं। सभी ने राजीव अग्रवाल से जमीन खरीदा है। बावजूद इसके हम लोगों को जमीन से बेदखल किया जा रहा है। युवक ने बताया कि खसरा नम्बर 235 और 255 को मिलकार कुल 17-18 एकड़ जमीन है। सभी के पास जमीन के दस्तावेज है। लेकिन जिला प्रशासन रसूखदारों के दबाव में गरीबों को हटाना चाहता है।

                                            मालूम हो कि दो मुहानी स्थित जमीन राजीव अग्रवाल निवासी जूनी लाइन की है। राजीव अग्रवाल ने शिकायत की थी कि दो मुहानी स्थिति पुस्तैनी जमीन पर लोगों ने कब्जा कर लिया है। जमीन को खाली करवाकर दिया जाए। राजीव अग्रवाल ने मामले की शिकायत मंत्रालय में की। मंत्रालय के आदेश पर जिला प्रशासन ने जमीन की जांच परख के लिए सात सदस्यीय टीम का गठन किया।जिला प्रशासन ने टीम में शामिल राजस्व निरीक्षक एय.एल.देवांगन,एनडी मानिकपुरी,अशोक राजपूत,संतोष कौशिक,रघुवीर सिंह, अमरनाथ जांगड़े और तिलक राम साहू को जांच पड़ंताल के बाद वस्तुस्थिति से अवगत कराने को कहा।

                   ग्रामीणों का आरोप है कि सात सदस्यी आरआई और पटवारियों की टीम ने बिना जांच पड़ताल किए रिपोर्ट पेश कर दिया। रिपोर्ट के आधार पर तहसीलदार ने बेदखली का आदेश जारी कर दिया है।

ग्रामीणों  में आक्रोश..खाली हाथ लौटा तहसील प्रशासन

                   मौके पर पहुंचे तहसीदार को ग्रामीणों ने बताया कि जांच टीम ने कब जांच की इसकी जानकारी किसी को नहीं है। जांच पड़ताल की जानकारी क्यों नहीं दी गयी। इस दौरान आक्रोशित लोगों को तहसीलदार ने समझाने का प्रयास किया। देवी सिंंह उइके ने कहा कि सभी  लोग सीमांकन के लिए तहसील कार्यालय में आवेदन लगाएं।  सभी की शिकायत दूर हो जाएगी। तहसीलदार ने बताया कि चूंकि नक्शे में बाटांकन नहीं हुआ है। इसलिए जमीन पर मालिकाना हक राजीव अग्रवाल का है। इतना सुनते ही ग्रामीण हंगामा मचाने लगे। आक्रोशित लोगों ने बताया कि मामला अभी कमिश्नर कोर्ट में हैं। बावजूद इसके जमीन से बेदखली का आदेश दिया गया। इससे जाहिर होता है कि बेदखली का आदेश रसूखदारों के इशारे में  हुआ है।

                                 लोगों के भारी विरोध और हंगामा के चलते तहसीदार,पटवारी आरआई और प्रोटोकाल अधिकारी को बैरंग वापस होना पड़ा। इसके पहले पंचनामा की कार्रवाई  पूरी की गयी। तहसीलदार ने कहा कि यदि 15 दिन के अन्दर जमीन को खाली नहीं किया गया तो पुलिस बल का सहारा लेना होगा।

विरोध के बीच नहीं हुई कार्रवाई

       मामले में तहसीदार देवी सिंंह उइके ने बताया कि बेदखली आदेश को अभी लंबित रखा गया है। लोगों ने मौके पर दस्तावेज दिखाए हैं। सभी को नामांंकन के लिए आवदेन देने को कहा गया है। लोगों को समझाइश दी गयी है कि 15 दिनों के अन्दर जमीन खाली कर दें। सीमांकन के बाद सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा। यदि लोग जमीन खाली नहीं करते हैं तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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