बैंक को करोड़ों का फटका…रायपुर में पकड़े गए तीनों नटवरलाल…मास्टर माइंड फरार…

IMG20170814180913 बिलासपुर— पुलिस के आधाधिकारी एडिश्नल एसपी नीरज चन्द्राकर,आईएएस शलभ सिन्हां और अतिरिक्त एसपी नवीन शंकर चौबे ने बिलासागड़ी में करोड़ों रूपए की धोखाधड़ी का खुलासा किया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि फर्जी नाम दस्तावेज और पहचान बताकर आरोपियों ने देना बैंक को फटका दिया है। तीन आरोपियों को रायपुर से धरदबोचा गया है। जबकि मुख्य सरगना अभी फरार है। पुलिस के अनुसार तीनों आरोपियों से अभी पूछताछ की जा रही है। यदि कुछ बड़े कारनामे सामने आए तो कोई आश्चर्चय नहीं होगी।

                               पुलिस अधिकारियों ने पत्रकारों को बताया कि दयालबंद स्थित दैना बैंक मैनेजर ने 13 अगस्त को सिटी कोतवाली में शिकायत की…कि आदित्य जैन पिता कमल जैन ने बैंक को करोड़ों रूपए का फटका लगाया है। आरोपियों ने बैंक का किश्त देना बंद कर दिया है। तीनों का पता ठिकाना भी गलत है।

                   बैंक मैनेजर की शिकायत पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए रायपुर से तीन लोगों को हिरासत में लिया है। पुलिस के अनुसार आदित्य जैन का असली नाम तीनों ने गिरफ्तारी के बाद फर्जीबाड़ी करना स्वीकार कर लिया है। नीरज चन्द्राकर ने बताया कि आदित्य जैन का असली नाम आलोक कानून गो पिता तरूण कानून गो है। सुन्दर नगर रायपुर का रहने वाला है। आलोक कानूनगो आदित्य जैन बनकर बिलासपुर स्थित देना बैंक से 2013 में लक्ष्मी अर्थ मुवर्स के नाम जेसीबी के लिए करीब 40 लाख रूपए लोन लिया।  बैंक को लोन के लिए सारे दस्तावेज जमा कराए। अपना पता ठिकाना कृष्णा विहार कालोनी बताया। कुछ दिनों तक किश्त दिया। बाद में आदित्य जैन ने किश्त पटाना बंद कर दिया। बैंक मैनेजर ने अपनी शिकायत में बताया कि जमा किए सभी दस्तावेज फर्जी हैं।

                    बैंक मैनेजर ने कोतवाली थाने को बताया कि आदित्य जैन ने दो अन्य लोगों का देना बैंक में खाता खुलIMG20170814175701वाया। खातेदारों का नाम रितेश शाह पिता जगदीश चन्द्र शाह और जितेश शाह पिता किशोर चन्द्र शाह है। रितेश और जितेश शाह ने भी बैंक से लोन लिया। रितेश ने बैंक को बताया कि उसका घर पारिजात कालोनी में है। उसने करीब चालिस लाख रूपए लोन लिए। 19 सितम्बर 2013 को देना बैक ने जुनवानी रोड़ भिलाई देना बैंक की शाखा को पोस्टर आटोमोबाइल्स आरटीजीएस से 45 लाख से अधिक रूपए दिए।

                                           इसी तरह जितेश शाह ने भी देना बैंक से दिसम्बर 2013 को लोन लिए। बैंक ने जुनवानी रोड भिलाई देना बैंक को पोस्टर आटो मोबाइल्स के नाम 45 लाख रूपए से अधिक रकम आरटीजीएस के जरिए जमा करवाया। लेकिन तीनों ने समय के साथ किश्त देना बंद कर दिया।

               पुलिस ने जांच पड़ताल में पाया कि लोन के सभी दस्तावेज फर्जी हैं। आदित्य जैन की फोटो की पहचान भिलाई स्थित अर्थ मुवर्स और पोस्टर आटोमोबाइल्स में की गयी। आदित्य जैन की फोटो पोस्टर आटोमोबाइल्स संचालक अनिकेत सिंह और अर्थ मुवर्स संचालक की फोटो आलोक कानूनगो में समानता पायी गयी। पुलिस ने पता साजी के बाद आदित्य ऊर्फ अनिकेत ऊर्फ आलोक को शंकर नगर स्थित उसके घर से गिरफ्तार किया गया। आदित्य की निशानदेही पर पुलिस ने रितेश और जितेश शाह को भी हिरासत में लिया।

                                             नीरज चन्द्राकर ने बताया कि रितेश शाह का असली नाम विजय शुक्ला पिता स्वर्गीय गोविंंद प्रसाद शुक्ला है। डंगनिया रायपुर का रहने वाला है। जितेश शाह का असली नाम रामअवतार शर्मा पिता जयराम प्रसाद शर्मा है। इसका भी घर डंगनिया रायपुर में है। दोनों ने बताया कि फर्जी द्तावेज बनाने का काम आलोक कानून गो का साला आशीष शुक्ला ने किया है। फिलहाल आशीष शुक्ला अभी फरार है। जल्द ही उसे भी पकड़ लिया जाएगा।

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