बैंक यूनियन ने किया हड़ताल का एलान ..कहा..IBA ने किया सड़क पर उतरने को मजबूर..10 लाख बैंकर करेंगे झूठ का पर्दाफाश

बिलासपुर—यूनाईटेड फोरम ऑफ बैंक यूनिंयस ने प्रेस नोट जारी कर कहा है कि अब धैर्य की बहुत परीक्षा हो चुकी है। समय सड़क पर उतरने का आ गया है। 31 जनवरी और 1 फरवरी को बैंक कर्मचारी सड़क पर उतर अपनी मांग को पुरजोर तरीके से रखेंगे। लेकिन उन्हें इस बात का जरूर खेद रहेगा कि इन दो दिनों में ग्राहकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ेगा।
 
            संयोजक, युनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस, बिलासपुर ललित अग्रवाल ने बताया कि बैंक कर्मचारियों को सरकार ही सड़क पर उतरने को मजबूर कर रही है। और अब हम इसके लिए तैयार भी हो चुके हैं। अपनी मांग को लेकर 31 जनवरी और 1 फरवरी अखिल भारतीय स्तर पर बैंक का कामकाज नहीं करेंगे।
 
                            ललित अग्रवाल ने बताया कि आईबीए के अड़ियल रवैये से हमें कठिन फैसला लेने के मजबूर होना पड़ रहा है।अफसोस की बात है कि आईबीए मांग पूरी करने की वजाय अब जनता को गुमराह भी करना शुरू कर दिया है। जबकि सच्चाई यह हैं कि 30 माह से अधिक समय मे  बैंक  कर्मचारियों के  संगठन के  साथ  28  दौर  की  वार्ता हो चुकी है। बावजूद इसके आईबीए कुल व्यय में मात्र 2 से 15 प्रतिशत बढोतरी की बात कर रहा है। इसमें भी मूल वेतन में केवल 2 प्रतिशत बढ़ोतरी ही प्रस्तावित हैं। इसीलिए  बैंक  कर्मचारियों  के  संगठन ने  31 जनवरी और  1 फरवरी  को  हड़ताल पर  जाने  का फैसला किया है। यह तय है कि ऐसा करने से आम  जनता को परेशानी होगी। लेकिन इसके लिए केवल और केवल सरकार ही जिम्मेदार है। 
 
              अग्रवाल ने बताया  कि  बैंक का  देश  की  अर्थव्यवस्था  में  अहम  रोल होता है। देश  की  अर्थव्यवस्था  अभी  अच्छे  दौर  से गुजर रही हैं। जब हम  अन्य सभी बैंकिंग मापदंड में विदेशों से तुलना करते है तो फिर 5 दिवसीय बैंकिंग  की  मांग  को  पूरा क्यों नहीं किया जा  सकता है।
 
          ललित ने बताया कि सरकार नोटिस जारी कर आम  जनता के बीच भ्रम फैला रही है। ऐसा करना सरासर गलत है। क्योंकि बैंक  कर्मचारियों का  वेतन बढोतरी 01.11.2017 से लम्बित है। आम  जनता  की  हमदर्द कहने वाला आईबीए गलत जानकारी देकर गुमराह कर रहा है। अब इसी बात को दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए ही सड़क पर उतर रहे हैं। ललित ने कहा कि आईबीए को बताना चाहिए कि आरबीआई,  केन्द्र  सरकार  के  मंत्रालय और  विभिन्न  विभाग सप्ताह  में केवल पांच दिन ही काम करते हैं। लेकिन बैंक के साथ ऐसा नहीं है..आखिर क्यों…। आईबीए ने यह भी नहीं बताया कि दो  दिवसीय हड़ताल करने  वाले  कर्मचारियों को  दो  दिनों  का  वेतन  काट दिया जायेगा। जबकि अपनी बातों को रखने का हमारा संवैधानिक अधिकार है। लेकिन जनता को आईबीए ने गलत जानकारी देकर गुमराह करने का काम किया है।
 
                ललित ने बताया कि हड़ताल के लिए केवल और केवल आईबीए जिम्मेदार है। बैंक  कर्मचारी  वेतन  बढोतरी और  5 दिवसीय बैंकिंग  की  मांग  नवम्बर  2017 से  कर  रहे  हैं। आईबीए को इस मांग को अब पूरा करना ही होगा। यह बताना जरूरी है कि कोई भी बैंक कर्मचारी हरगिज नहीं  चाहेगा कि उसका वेतन काटा जाए। लेकिन आईबीए के अड़ियल रवैया से वह वेतन कटवाने को मजबूर है।
 
बैंकरों ने किया विरोध प्रदर्शन
 
युनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस, बिलासपुर संयोजक ललित ने बताया कि शुक्रवार की सुबह 10.30 बजे बड़ी संख्या में बैंकर्स स्टेट बैंक मुख्य शाखा के सामने एकत्रित होकर विरोध प्रकट किया। प्रदर्शन में राजकुमार शर्मा, डी के हाटी, सत्येंद्र सिंह, सूरज रजक, राजेश रावत, जितेंद्र शुक्ला, अशोक ठाकुर, मनोज मिरी, शरद बघेल, सौरभ त्रिपाठी, रूपम रॉय, प्रल्हाद अग्रवाल, एनवी राव, दीपक साहू सहित बड़ी संख्या में हड़ताली कर्मचारी व अधिकारी उपस्थित रहे। शनिवार एक फरवरी को  जब वित्तमंत्री संसद में बजट पेश करेंगी..उस समय  देश के दस लाख बैंकर्स हड़ताल पर रहेंगे।

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