एक मुलाकात

भयावह होगी बिलासपुर की हालत—आनंद

बिलासपुर—(भास्कर मिश्र) कम से कम मेरे ज़हन में इस प्रकार की विकास की परिकल्पना बिलासपुर के लिए नहीं थी। मेरा बचपन अनगढ़े कस्बाई संस्कृति वाले बिलासपुर शहर में बीता। तब बिलासपुर बहुत मीठा था। लोग स्वार्थी नहीं थे। एक-दूसरे के दुख सुख की परिभाषा समझते थे। समय के साथ बाजारवादी नेतृत्व ने बिलासपुर को खिचड़ी बना दिया है। वातावरण में जहर घोल दिया है। एक जमाना था कि नेता की एक आवाज पर बिलासपुर शहर खुद के खर्च पर उसके पीछे खड़े हो जाया करता था। दावे के साथ कह सकता हूं कि अब ऐसा नहीं है। उस समय, जन-नेता हुआ करते थे। अब राजनेता होते हैं। थोपे गए नेताओं से समुचित और समग्र विकास की उम्मीद नहीं की जा सकती है। पीड़ा होती है, सब देखकर। आज बिलासपुर यदि तीखा नहीं, तो…मीठा भी नहीं है। यह बातें सीजीवाल से लम्बी बातचीत के दौरान सामाजवादी विचारधारा के पोषक और आम आदमी पार्टी के नेता आनंद मिश्रा ने कही।

                 जबलपुर में एग्रीकल्चर का छात्र रहते हुए मुझ पर गांधी जी और लोहिया का प्रभाव पड़ा। उसी दौरान जबलपुर में ही इंजीनियरिंग की डिग्री ले रहे हरीश केडिया से समान विचारधारा होने के कारण आत्मीयता बढ़ी। दोनों, इस संकल्प के साथ बिलासपुर लौटे कि लोहिया और गांधी जी के विचारधारा को बिलासपुर में जन-जन तक पहुंचाना है। हमने प्रयास किया..सफलता भी मिली…लेकिन उतनी नहीं…जितना हमने सोच रखा था। इसका प्रमुख कारण देश और प्रदेश के साथ बिलासपुर में भी तेजी से घटनाक्रम में बदलाव आ रहा था। लोग गरीबी के दुष्चक्र से निकलना चाहते थे। लेकिन देख रहा हूं कि…सब लोग वहीं खड़े हैं जहां पहले थे। किसानों की हालत और भी बदतर हो गयी है। थोपे हुए पढ़े लिखे लोग सरल लोगों से बाजी मार ले गये हैं।

                              आनंद मिश्रा ने बताया कि आजादी के बाद से आज तक किसानों का शोषण होता आ रहा है। किसान कहीं के हों..लेकिन उन्हें आज तक न्याय नहीं मिला है। हिन्दुस्तान में आज भी कृषि आनार्थिक विषय है। देश की एक बहुत बड़ी आबादी की हालत बदतर है। आज उत्पादन के क्षेत्र में रोज रिकार्ड टूट रहे हैं। जोत घटी है। लेकिन परम्परागत किसानों की हालत किसी प्रकार का सुधार नहीं हुआ है। उनके पास धन नहीं है। इसलिए टेक्नालाजी का फायदा उन तक नहीं पहुंचा है। किसान तब भी कंगाल था आज भी है। बेरोजगारी के साथ अपराध ने अपना जगह खुद बना लिया है। जबलपुर से आने के बाद हम बिलासपुर में कृषि के क्षेत्र में कुछ ऐसा करना चाहते थे कि टेक्नालाजी का फायदा किसानों को मिले और कृषि को भी आर्थिक महत्व का विषय बनाया जाए।

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anand1             राजनीति में आने का भी मकसद किसान और गरीब ही था। राजनीति ही वह प्लेटफार्म है जहां से सब तक आवाज पहुंचाय़ी जा सकती है। मुझे जनता परिवार से जुड़कर चुनाव लड़ने का अवसर मिला। बी.आर.यादव अच्छे राजनेता साबित हुए और जीत गय़े। दुबारा चुनाव लड़ा..हार के बाद भी मैं अपनी आवाज जन तक पहुंचाने में सफल रहा। आम आदमी पार्टी से जुड़कर भी मै वही किया जो हमेशा करता आया । मंच कोई भी हो लेकिन मै समृद्धि धरती के गरीब किसानों की आवाज बनता रहुंगा।

                 शहर जब नया आकार लेता है तो अच्छाइयों के साथ विसंगितयां भी आती हैं। कुछ सामान्य तो कुछ प्रायोजित होती हैं। बिलासपुर के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ…और हो रहा है। बिलासपुर का जल स्तर तेजी घट रहा है। तालाब गायब हो गये हैं। किसानों में हाहाकार है। लेकिन इनके दर्द को सुनने वाला कोई जननेता नहीं है। देवी प्रसाद वर्मा,मदनलाल शुक्ला, अग्निहोत्री जी ,ई.राघवेन्द्र राव, रमणीक जी, यह सब जन-नेता हुआ करते थे। आनन्द मिश्रा ने बताया कि ऐसे जन-नेताओं की कमी बिलासपुर को खल रही है। सीजी वाल से उन्होंने बताया कि राजनेता ऊपर से आते हैं। जब तक पद पर हैं दुनियां उन्हें बहुत प्यार करती है। पद से हटते ही उन्हें भूला दियाज जाता है। क्योंकि उनका जुड़ाव कार्पोरेट से होता है। गरीबों से नहीं। जन-नेताओं के उलट उनमें मौलिक सोच का भी अभाव रहता है।

                 अरपा विकास और स्मार्ट सिंटी योजना  पर आनंद ने बताया कि अरपा को टेम्स की तर्ज पर बनाया जाएगा। प्रश्न उठता है कि क्या फिर बिलासपुर के लोगों को भी बदला जाएगा।क्या..लोगों की जरूरतों और वातावरण में भी बदलाव किया जाएगा। क्या स्वभाव और संस्कृति में भी बदलाव होगा। यदि नहीं तो सच मानिए कि अरपा,…टेम्स बने या ना बने..लेकिन शहर का सबसे बड़ा  नाला जरूर बन जाएगा। बिना विजन और स्थानीय आवश्यकताओं को नजरअंदाज कर कोई भी योजना शहर के लिए हितकर नहीं होगी। हमारे राजनेताओं को गांधी को समझना होगा। पश्चिम के लोग जिससे तौबा कर रहे हैं उसे हम लपक रहे हैं। स्मार्ट सिटी योजना की हालत सिवरेज जैसी ही होगी ।

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               स्मार्ट सिंटी चिदंबरम की देन है। विश्ववैंक ने अब जाकर अरबों रूपए दिया है। मोदी जी इसका श्रेय ले रहे हैं। स्मार्ट सिटी योजना से बिलासपुर के हजारों हाथ बेगार होने वाले हैं। जो भी देश पैसा लगायेगा…वह रोजगार भी खरीदेगा। खेत पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों का कब्जा होगा।

               आने वाला समय बिलासपुर के लिए बहुत नारकीय और दुखदायी होने वाला है। समय के साथ धुंध छंटेगा। जब आंखें खुलेंगी तो बिलासपुर का स्थिति भयावह नजर आएगी।

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