मेरा बिलासपुर

भाजपा पार्षदों में खींचतान…

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बिलासपुर— जिला कांग्रेस कार्यालय में कांग्रेस पार्षदो ने एक बैठक में महापौर पर लापरवाही और जनविरोधी का आरोप लगाया है। बैठक में चर्चा के दौरान कांग्रेस पार्षदों ने बताया कि चुनाव के छः महीने पूरे हो चुके हैं। महापौर ने एक भी बार सामान्य सभा की बैठक नहीं बुलाया है। जाहिर सी बात है कि महापौर को बिलासपुर वासियों के दुख दर्द से कोई लेना देना नहीं है। मानसून की पहली फुहार ने निगम व्यवस्था को तहस नहस कर दिया है। बावजूद इसके महापौर को तफरी करने से फुरसत नहीं है।

                         जिला कांग्रेस कार्यालय में कांग्रेसी पार्षदों ने बैठक के दौरान भाजपा शासित निगम की कार्यशैली को लेकर नाराजगी जाहिर की है। बैठक के बाद कांग्रेस पार्षद दल के प्रवक्ता शैलेन्द्र जायसवाल ने बताया कि चुनाव के छः महीने गुजर चुके हैं। महापौर ने एक भी बार सामान्य सभा बैठक का आयोजन नहीं किया है। इससे जाहिर हो जाता है कि जिले का प्रथम नागरिक विलासपुर वासियों का कितना हितैषी है। जायसवाल ने बताया कि नगरीय निकाय अधिनिगम के अनुसार प्रत्येक 2 महीने में सामान्य सभा की बैठक अनिवार्य है। अभी तक एक भी सामान्य सभा की बैठक नहीं आहूत की गयी है। अभी तक जो दो बैठकं हुई हैं वह विशेष बैठक थी। उसमें जनहित को लेकर किसी प्रकार की चर्चा भी नहीं हुई।

                 कांग्रेस पार्षद दल प्रवक्ता ने बताया कि शहर की साफ सफाई और पेयजल की स्थिति ठीक नहीं है। वार्डों में कचरों का अंबार है। एक महीने हो गए लेकिन शासन से प्राप्त एक करोड़ रूपयों का अभी तक उपयोग नहीं हुआ है। कामकाज नहीं होने से वार्डों की स्थिति बद से बदतर हो गयी है। यदि उन रूपयों का समुचित उपयोग हो जाए तो वार्ड वासियों की कई समस्याएं सुलझ जाएंगी। लेकिन भाजपा पार्षदों की खींचतान से विकास के सारे काम लंबित हैं।  जायसवाल ने कहा कि नालियां सड़क से बहने लगी हैं। गंदा पानी घरों में घुस रहा है। नालियों से गुजरने वाले सभी पाइप फूट गयी है। दूषित पानी पीने से लोग बीमार हो रहे हैं। जगह-जगह डायरिया और पीलिया की शिकायतें आ रही हैं। वाबजूद इसके महापौर का ध्यान समस्याओं की तरह की तरफ नहीं  है जो समझ से परे है। शैलेन्द्र ने बताया कि इन तमाम समस्याओं को देखते हुए कांग्रेस पार्षदों ने निर्णय लिया है कि 10 दिनों के भीतर महापौर यदि सामान्य सभा की बैठक नहीं बुलाते हैं तो कांग्रेस सामन्य सभा की बैठक बुलायेगा।

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                         बैठक के बाद शैलेन्द्र ने बताया कि जानते हुए भी कि स्मार्ट सिटी के लिए कुछ शर्ते हैं। जिसे बिलासपुर शहर पालन नहीं करता है। यदि तीन साल पहले निगम ने 29 गावों को बिलासपुर शहर में मिलाने शासन को भेजा था। यदि उसे मान लिया गया होता तो आज हम स्मार्ट सिटी के दौड़ में होते। लेकिन राज्य शासन ने कभी इसे गंभीरता से नहीं लिया। यदि समय सभी 29 गावों को बिलासपुर से जोड़ लिया जाता तो अपोलो, कानन पेन्डारी,चकरभाठा हवाई पट्टी, हाईकोर्ट, केन्द्रीय विश्वविद्यालय पंचायत का ना होकर निगम का हिस्सा होता। जाहिर सी बात है कि बिलासपुर स्मार्ट सिटी का दावेदार होता। बैठक के दौरान कांग्रेसी पार्षदों ने शहर में चलने वाली डेयरियों को गोकुलनगर में शिफ्ट करने का दबाव बनाने का एलान किया है।

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