भारत मां के रतन बेटा,छत्तीसगढ़िया हौं गा..मुंगेली के किसान का अनूठा अंदाज..हेलीकॉप्टर में जाएंगे बारात

बिलासपुर– मुंगेली में 22 जनवरी को प्रदेश के लिए नहीं भूलने वाला इतिहास लिखा जाएगा। इसकी चर्चा दशकों-दशकों तक होगी। हो सकता है कि बाद में इसे मुहावरों, लोकोक्तियों और हाना में सदियों तक दुहराया जाए। ठीक ऐसे ही–जिस तरह हसन का पायजामा आज मुहावरों में सदियों से दुहराया जा रहा है। मुंगेली जिले के घोरपुरा निवासी किसान धर्मराज अपने नाती की शादी 22 जनवरी को मुंगेली से मात्र 150 किलोमीटर दूर शहडोल में करने जा रहे हैं। इस दूरी को धर्मराज अपने नाती के साथ हेलीकाफ्टर से चन्द मिनटों में पूरी करेंगे। जी हां नाती ने अपनी दादा की बारात में शामिल होने की शर्तों को ना केवल मंजूर किया। बल्कि मात्र 150 किलोमीटर के लिए लाखो रुपये खर्च कर दिए हैं।

                 मुंगेली जिला स्थित घोरपुरा गांव के पूर्व मालगुजार और किसान धर्मराज की जिद थी कि वह नाती अंकुश की शादी में हेलीकाफ्टर से जाएंगे। हेलीकाफ्टर में नाती सेहरा बांधकर अपने ससुराल जाएगा। समय बीता वह दिन भी आ गया। अंकुश सिंह की शादी बुढ़ार में सतना जिले के निवासी अरूण सिंह की पुत्री आदर्शिता सिंह से तय हुई। दादा धर्मराज ने पहले तो उम्र का हवाला देकर शादी में जाने से इंकार किया। लेकिन नाती ने दादा की शर्तों को याद रखा।

22 जनवरी के लिए 11 लाख रूपए में बैंगलुरू से आठ सिटर हेलीकाफ्टर हायर किया। परिवार के सदस्यों ने फैसला किया कि सभी बराती सड़क मार्ग से बुढ़ार जाएंगे। दादा धर्मराज सिंह, भूपेन्द्र सिंह, दूल्हा अंकुश के अलावा परिवार के पांच अन्य सदस्य हेलीकाफ्टर से शहडोल जिले के बुढ़ार जाएंगे।

                               परिवार के सदस्यों की मानें तो किसान धर्मराज सिंह की मनोकामना को पूरा किया है। उनकी तमन्ना थी कि अंकुश की बारात हवाई जहाज से ले जाएंगे। आठ लोगों को लेकर हेलीकाफ्टर मुंगेली हेलीपेड से ठीक चार बजे रवाना होगी। कुछ मिनटों बाद शहडोल पहुंचेगी। बाकी बाराती सुबह ही शहडोल के लिए रवाना हो जाएंगे। हेलीकाफ्टर लैंडिंग के लिए शहडोल और मुंगेली जिला प्रशासन से दो दिन पहले अनुमति मिल गयी है। दूसरे दिन हेलीकाफ्टर 23 जनवरी को ग्यारह बजे के बाद शहडोल से उडान भरेगा।

12 बजे मुंगेली हेलीपेड में दूल्हा और दुल्हन के साथ दादा को लेकर लैंड करेगा। फिलहाल इस अनूठे जिद और बारात को लेकर बिलासपुर ही नहीं बल्कि शहडोल संभाग में भी चर्चा है।

                     करीब दो दशक पहले लिखा गया मशहूर लोकगीतकार लक्ष्मण मस्तूरिया का गीत लोगों को आजा भी याद है। गीत की पंक्तियां कुछ इस तरह से है…। भारत मां के रतन बेटा बढिया हौं गा …. मैं छत्तीसगढिया हौं जी …। गीत के बीच कुछ ऐसी भी पंक्तियां हैं जो छत्तीसगढ़ी के आन बान शान को जाहिर करते हैं। माता कौशल्या की जन्मभूमि पर धर्मराज के परिवार ने जिस तरह से अपना वचन निभाया..उसे हमेशा हमेशा के लिए याद किया जाएगा।

                               अक्सर लोगों की जुबान से सुनने को मिलता है कि छत्तीसगढ़ की धरती अमीर है..लेकिन लोग गरीब हैं। लेकिन स्वाभिमान और वचन के बहुत पक्के भी हैं। यदि यहां के लोग कुछ ठान लें तो पत्थर की लकीर है। कुछ रघु कुल रीति की ही तरह। राम के ननिहाल में 82 वर्षीय किसान धर्मराज के परिवार ने वह कर दिखाया..जिसे पूरा करने लोग सोचे भी नां। खासकर किसान परिवार…।

लेकिन बुजुर्ग किसान की इच्छा 22 जनवरी को ना केवल पूरी होगी। बल्कि इतिहास के पन्नों में हमेशा हमेशा के लिए दर्ज भी हो जाएगा। जिसे लोग भविष्य में हाना,लोकोक्तियों और मुहावरों में दुहराएंगे। इसी के साथ दर्ज होगा कि बेशक छत्तीसगढ़ के लोग गरीब हों…लेकिन वचन के पक्के और दिल के बहुत बड़े अमीर हैं। एक बार ठान लिया तो…फिर पलटने का सवाल ही नहीं..चाहे फिर किसान हो या पूंजीपति।

Comments

  1. By umashankar sahu

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