भूपेश बघेल सरकार के रुख से सरकारी कर्मचारी – अधिकारी निराश, 27 फरवरी को रैली के साथ करेंगे प्रदर्शन

रायपुर । छत्तीसगढ़ में नई सरकार बनने के बाद सरकारी विभागों के कर्मचारियों – अधिकारियों की मांगों पर कोई पहल नहीं होने की वजह से असंतोष शुरू हो गया है । यहां तक कि मंहगाई भत्ते को लेकर भी अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। इसे देखते हुए कर्मचारी -अधिकारी फेडरेशन ने अपनी मांगों को लेकर आँदोलन शुरू करने का निर्णय लिया है। इस सिलसिले में 27 फरवरी को रैली निकालकर प्रदर्शन किया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष पी.आर. यादव ने  अपने सभी प्रांतीय पदाधिकारी, केंद्रीय प्रबंध समिति/ समस्त अध्यक्ष जिला ,तहसील शाखाएं/ समस्त प्रांताध्यक्ष संबद्ध  विभागीय संघ /समस्त संयोजक विभागीय समितियों को पत्र लिखकर इसकी जानकारी दी है। पत्र में लिखा गया है कि   कांग्रेस सरकार के गठन के बाद हम सब  मुख्यमंत्री और मंत्रियों का स्वागत- सत्कार भरपूर किए हैं। अब मुख्यमंत्री  कह रहे हैं कि कर्मचारियों के मांगों पर अगले वर्ष याने कि 2020 में निर्णय लेंगे ।उनका यह वक्तव्य निराशाजनक है, वे कर्मचारियों की समस्याओं पर विचार करने तक को तैयार नहीं है। महंगाई -भत्ता जो वेतन का हिस्सा है उससे भी हमें वंचित रखा जा रहा है ।
श्री यादव नें अपने पत्र में लिखा है कि जो गलती हमने डॉ रमन सिंह के सरकार के समय की है उसकी पुनरावृत्ति अब नहीं करेंगे अर्थात अब हम अपने ट्रेड यूनियन अधिकारों का प्रयोग करते हुए अपनी जायज मांगों के लिए आवाज बुलंद करेंगे । उन्होने बताया कि इसकी शुरुआत कर्मचारी- अधिकारी फेडरेशन के बैनर तले आंदोलन के निर्णय से हुआ है। फेडरेशन में लिए गए निर्णय का क्रियान्वयन करते हुए 27 फरवरी के रैली- प्रदर्शन आंदोलन को फेडरेशन से संबंध संगठनों के पदाधिकारियों के साथ समन्वय कर सफल बनाएँ। उन्होने संगठन के पदाधिकारियों से अपील की है कि  स्थानीय समाचार पत्रों एवं सोशल मीडिया में 27 फरवरी  के रैली प्रदर्शन आंदोलन संबंध में व्यापक प्रचार-प्रसार भी करें ।

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