हमार छ्त्तीसगढ़

भू-अधिग्रहण कानून को लेकर रमन सरकार की जल्दबाजी

 

 

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छत्तीसगढ़ में भू-अधिग्रहण को लेकर रमन सरकार मोदी सरकार से ज्यादा जल्दी में दिखाई दे रही है। शायद यही वजह है कि राज्य सरकार ने केन्द्र के भू-अधिग्रहण अध्याधेश के अनुरूप बकायदा अधिसूचना जारी कर दी है। मतलब ये कि अब सरकार ग्रामसभा के बिना पूछे ही जमीन ले लेगी। इधर भू-अधिग्रहणों मसलों के जानकार और समाज सेवी इसे असैंवधानिक और सरकारी मनमानी करार दे रहे हैं। तो वहीं इसे लेकर व्यापक विरोध की रणनीति भी बनने लगी है।

 

इस मसले को समझने के लिए राज्य सरकार की ओर से जारी किए गए इस राजपत्र पर नजर डाल सकते हैं। यह सरकार की ओर से भू-अधिग्रहण को लेकर जारी की गई अधिसूचना है। यह अधिसूचना केन्द्र सरकार की भू-अधिग्रहण अध्यादेश के प्रावधानों के अनुरुप है। जिसमें यह अब स्पष्ट कर दिया गया है कि प्रदेश में सार्वजनिक उपक्रमों की स्थापना या औद्योगिक विकास के लिए कही से भी जमीन का अधिग्रहण कर लिया जाएगा। छत्तीसगढ़ सरकार के राजस्व, आपदा प्रबंधन एवं पुर्नवास विभाग ने यह अधिसूचना जारी की है। इसमें जिन पांच प्रावधान को रखा गया है उसे ‘ भूमि अर्जन, पुर्नवास और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकार और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013’  के दायरे से बाहर कर दिया गया है।

मतलब यह कि अब सरकार को जहां भी लगेगा कि औद्योगिक विकास जरूरी है उसके लिए सरकार बिना किसानों की सहमति जमीन ले लेगी । सरकार ने अधिसूचना में यह बताया कि कई बड़ी परियोजना प्रदेश में लंबित में है जिनके जमीन की आवश्यकता है और सरकार के पास शासकीय पड़त या बंजर भूमि पर्याप्त मात्रा में है। लिहाजा जमीन अधिग्रहण जरूरी है।
लेकिन सरकार के पहले पूर्व में जब दो अध्याधेश जारी हुए तब क्यों  जल्दाबजी नहीं दिखाई अब क्यों इसे लेकर  सवाल उठ रहे हैं । सामाजिक कार्यकर्ता और भू-अधिग्रहण कानून के जानकार गौतम बंधोपाध्ये का कहना है कि यह पूरी तरह से असैंवधानिक है सरकार को केन्द्र के कानून के पास होने का इंतजार करना चाहिए था । चुंकि केन्द्र के इस नए भू-अधिग्रहण कानून को लेकर विवाद बना हुआ। अध्याधेश का मसौदा संसदीय समिति के पास लंबित है तो फिर रमन सरकार ने जल्दबाजी क्यों की ?

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अधिसूचना में 5 वें बिंदु सरकार की ओर से कहा गया है कि राज्य में कई बड़ी परियोजनों के लिए बंजर या पड़त भूमि नहीं है । लेकिन गौतम बंधोपाध्ये का कहना है कि छत्तीसगढ़ में पर्याप्त रूप में बंजर और पड़त भूमि  है सरकार झूठ बोल रही है। इस अधिसूचना से विकास के नाम पर जमीन की अफरा-तफरी होगी, किसानों को लूटा जाएगा। अधिसूचना जारी होने के बाद अब  यह सवाल उठ रहे हैं कि जब केन्द्र के भू-अधिग्रहण अध्याधेश को लेकर विवाद बना हुआ है, इसका मसौदा संसद की संयुक्त समिति के पास लंबित है तो राज्य सरकार ने आखिर अधिसूचना जारी करने में जल्दी क्यों दिखाई। जानकारों ने तो इसे असैंवधानिक तक करार दिया है। क्या सबकी नजर छत्तीसगढ़ की उपजाऊ और हरी-भरी जमीन पर है ?

 

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