हमार छ्त्तीसगढ़

भू- अर्जन संशोधन से छत्तीसगढ़ को मिलेगा लाभः रमन

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रायपुर । प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को  नई दिल्ली में उनके निवास में आयोजित नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की दूसरी बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। डॉ. सिंह ने कहा कि भूमि  अर्जन और पुनर्वास कानून 2013 में प्र्रस्तावित संशोधन देश में विकास और प्रगति का मार्ग प्रशस्त करेंगे । उन्होंने कहा कि 2013 के कानून के चलते देश के विकास की दौड़ में पिछड़ने का खतरा था । उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में राष्ट्रीय राजमार्गो , रेल और सिंचाई जैसे अधोसरंचना क्षेत्रों में औसत राष्ट्रीय औसत से बहुत कम है , इन संशोधनों से विकास का बंद रास्ता खुलने की संभावना है।  उन्होंने कहा कि वे इस बिल में सुझाए गए सभी संशोधनों को समर्थन करते है । बैठक में केन्द्रीय वित्त मंत्री  अरूण जेटली, केन्द्रीय गृह मंत्री   राजनाथ सिंह और अन्य अनेक केन्द्रीय मंत्रीगण तथा राज्यों के मुख्यमंत्री उपस्थित थे ।
डॉ.  रमन सिंह ने बैठक में कहा कि भूमि अर्जन के लिए धारा 10 ए में वर्णित प्रयोजनों जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित कार्यो , ग्रामीण अधोसंरचना का निर्माण , गरीबों के लिए आवास ,औद्योगिक कारीडोर के निर्माण और इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए ही प्रभावित परिवारों की पूर्व सहमति के प्रावधान से छूट दी जा रही है । उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के माध्यम से आम लोगो के लिए आवश्यक कल्याणकारी योजनाओं तथा आर्थिक विकास के साथ रोजगार के अवसरों का निर्माण तेजी के साथ हो सकेगा । इसलिए यह संशोधन व्यापक लोक हित में है और आवष्यक भी । उन्होंने कहा कि अन्य सभी प्रयोजनों के लिए भूमि अर्जन करने के पूर्व सामाजिक प्रभाव आकलन संबंधी प्रावधान संशोधन के बाद भी यथावत रहेंगे जिससे परियोजना क्षेत्र के लोगो के हितों का संरक्षण हो सकेगा । उन्होंने कहा कि अध्यादेश में प्रभावित परिवार की परिभाषा में संशोधन कर अर्जन के लिए प्रस्तावित कृषि भूमि पर आश्रित भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों को भी प्रभावित परिवार की श्रेणी में लाया गया है और उनके लिए भी पुनर्वास का प्रावधान अनिवार्य किया गया है । उन्होंने इसका समर्थन किया है । उन्होंने नये संशोधन के तहत भूमि अर्जन अवार्ड के विरूद्ध दिये जाने वाले अभ्यावेदनों की सुनवाई प्राधिकरण द्वारा जिले में ही किये जाने का भी स्वागत किया । उन्होंने कहा कि इससे किसानों को सुनवाई के लिए जिले से बाहर नहीं जाना होगा ।
डॉ. रमन सिंह ने कहा कि 2013 के कानून में 5 वर्ष में जमीन का उपयोग न होने पर उसे लौटाने का प्रावधान अव्यवहारिक था । राज्य सरकारे अपने अनुभवों से यह अच्छे से जानती है कि ऐसे कई कारणों से इन परियोजनाओं में विलंब होता रहा है जो न तो सरकार और न ही निवेशक के नियंत्रण में होते है । उन्होंने कहा कि इसमें किया गया  यह संशोधन  व्यावहारिक है और वे उसका समर्थन करते है ।      उन्होंने उन संशोधनों का भी समर्थन किया जिसमें विभिन्न कानूनों के तहत भूमि अर्जन के मामलों में मुआवजा निर्धारण में समानता लायी गयी है । इससे भू अर्जन से प्रभावित लोगों का हित संर्वधन होगा ।

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