भैयालाल ने कहा बाबा की बूटी फायदेमंद..लेकिन मेरे पास बाबा नहीं…गृहमंत्री पैकरा पर कुछ नहीं कहना

BHAIYALAL.RAJVADEबिलासपुर— प्रदेश में राम राज्य है…बिना रामराज्य सरकार नहीं चलती है। लोग रूपयों के लालच में पलायन करते हैं। सरकार सबको काम और जरूरी मदद करती है। लेकिन लोग घर बार छोड़कर ज्यादा पैसा कमाने के चक्कर में बाहर जाते हैं। मुसीबत में पड़ जाते हैं। सरकार ही उन्हें बचाती है। बावजूद इसके लोग सबक नहीं लेते। जिसे आप पलायन कहते हैं ऐसा कुछ है नहीं…। फिर गांव घर के भाई भतीजा लोग ही भोले भाले लोगों को काम दिलाने बाहर भेजते हैं। यहां दस हजार रूपए देकर…बाहर शोषण करते हैं। यह बातें श्रम एवं खेल कल्याण मंत्री भैयालाल रजवाड़े ने कही।

                                        अल्प प्रवास पर बिलासपुर पहुंचे भैयालाल रजवाड़े ने पत्रकारों से कहा कि सरकार सूखे से निपटने को तैयार है। किसी को पलायन करने की जरूरत नहीं है। सरकार सबके हितों का ख्याल रख रही है। लोग बहकावे में आकर अपना घर द्वार ना छोड़ें। बारिश नहीं हुई…खेती किसानी का काम बिगड़ा है। लेकिन किसी को परेशान होने की जरूरत नहीं है।

                     सवाल का जवाब देते हुए रजवाड़े ने कहा कि कुंआ,बांध,नहर, के अलावा हमारे पास बहुत काम है। सभी को काम दिया जाएगा। किसी को सूखा से परेशान होने की जरूरत नहीं है।

                               पलायन के सवाल पर रजवाड़े ने कहा कि भाई भतीजा नात रिश्तेदार ही अपनों को धोखा देते हैं। काम और अधिक रूपयों का लालच देकर बाहर भेजते हैं। किसी को दस हजार किसी को पचास हजार का लालच देते हैं। बाहर जाने के बाद लोग अपने को ठगा हुआ पाते हैं। हम लोग पलायन कराने वालों पर कार्रवाई कर रहे हैं।

जिन्हें जाना हो जाए हमारे पास कोई बाबा नहीं

                                 भैयालाल रजवाड़े ने कहा कि जिन्हें बाबा के पास जाना हो जाए। हमारे पास कोई बाबा नहीं है। उन्होने बताया कि कभी कभी बाबा की बूटी सुगर मरीजों के लिए रामवाण साबित होती है। खेल मंत्री ने कहा कि मैं गृहमंत्री पैकरा के बारे में चर्चा नहीं करूंगा। यदि वे बाबा के पास चले भी गए तो क्या गलत है। भैयालाल रजवाड़े ने कहा कि बाबा रामरहीम,आसाराम की बात अलग है। दुनिया देख भी रही है।

                      बाबा की बूटी के सवाल पर रजवाड़े ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं ढेंगा दिखाने जैसी कोई बात नहीं है। परेशान आदमी को जहां राहत की उम्मीद लगती है वहां जाता है। इसमें बुराई क्या है।

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