‘मंडल साहब’ का बिलासपुर से है गहरा नाता…यहां स्कूल में पढ़े और कलेक्टर भी रहे…यादें अब भी हैं ताज़ा

बिलासपुर।राजेन्द्र प्रसाद मंडल छत्तीसगढ़ के नए मुख्य सचिव बनाए गए हैं। बिलासपुर शहर के साथ उनका गहरा नाता रहा है और यह शहर उन्हे ‘मंडल साहब’ के नाम जानता है…। आर पी मंडल की स्कूल शिक्षा बिलासपुर के मल्टीपरपज स्कूल में हुई है और वे बिलासपुर में कलेक्टर भी रह चुके हैं। उनके कार्यकाल के दौरान शहर मे कई ऐसे काम हुए जो आज भी यादगार हैं। उनकी पहचान एक ऐसे अफसर के रूप में रही है, जो अपने चेंबर से निकलकर फील्ड में – ज़मीनी स्तर पर काम करने पर भरोसा करते हैं।  प्रदेश के प्रशासनिक हलके में सबसे बड़ा ओहदा मिलने के बाद बिलासपुर के लोगों को भी उम्मीद है कि इस नई पारी में भी उनके कामकाज की अपनी अलग छाप बरकरार रहेगी ।

राजेंद्र प्रसाद मंडल छत्तीसगढ़ के नए चीफ सिकरेट्री होंगे। राज्य सरकार ने आज उनकी नियुक्ति का आदेश जारी कर दिया। वे छत्तीसगढ़ के ग्यारहवे चीफ सेक्रेटरी होंगे। इसके पहले अरुण कुमार,एस के मिश्रा,ए के विज़यवर्गीय, आर पी बगई, शिवराज़ सिंह, पी जॉय उमेन, सुनील कुमार , विवेक ढाढ़, अजय सिंह और सुनील कुज़ूर चीफ सेक्रेटरी रह चुके हैं। आर पी मंडल 87 बैच के आईएएस हैं। वे मध्यप्रदेश के दमोह समेत बिलासपुर, रायपुर के कलेक्टर रह चुके हैं। वे कई विभागों के सेक्रेटरी भी रह चुके हैं।

सबसे पहले वे राजस्व सचिव बने थे। सचिव बनने के बाद उन्होंने एक बार कलेक्टरी की थी। सचिव रैंक में पहुंचने के बाद भी सरकार ने उन्हें रायपुर का कलेक्टर बनाया था। आर पी मंडल राजस्व, ट्रायबल, पंचायत, पीडब्लूडी, फॉरेस्ट, लेबर समेत कई विभागों के सेक्रेटरी रह चुके हैं। पंचायत और ग्रामीण विकास में वे दूसरी बार सचिव बने थे।

आर पी मंडल का बिलासपुर शहर से गहरा नाता रहा है।उनकी स्कूल शिक्षा बिलासपुर में हुई है।  उनके पिता बिलासपुर रेल डिवीजन के अस्पताल में डाक्टर थे। इसलिए  उनकी स्कूली शिक्षा बिलासपुर के मल्टीपरपस हायर सेकेंड्री स्कूल में हुई। रायपुर इंजीनिरिंग कालेज से उन्होंने इलेक्ट्रिकल में बीई किया। इसके बाद खड़गपुर आईआईटी से एमटेक की डिग्री हासिल की । एमटेक करने के बाद मंडल यूपीएससी में सलेक्ट होकर आईएएस बन गए। मध्यप्रदेश कैडर में आईएएस रहते हुए उन्होने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन किया ।

राज्य की स्थापना के बाद वे छत्तीसगढ़ आ गए  और बिलासपुर जिले में कलेक्टर के रूप में उनकी पोस्टिंग हुई। यह इत्तफाक है कि निवर्तमान चीफ सेक्रेटरी सुनील कुज़ूर बिलासपुर के कलेक्टर थे, उनकी जगह पर ही आर पी मंडल बिलासपुर के कलेक्टर बनाए गए थे। उन्होने बिलासपुर कलेक्टर का चार्ज सुनील कुजूर से ही लिया था और अब चीफ सेक्रेटरी का चार्ज उनसे ही ले रहे हैं।

बिलासपुर  कलेक्टर रहते हुए आर पी मंडल ने कई ऐसे काम किए जो आज भी यादगार हैं।उन्होने यहां पर बेहतर काम करने वाले लोगों की टीम बनाई और टीम वर्क के साथ कई कामों को अंजाम तक पहुंचाया , जो आज़ भी मील के पत्थर हैं। उन्हे काम करने वालों की बेहतर पहचान थी और उन्हे साथ लेकर काम करते रहे। जिससे बेशक कामयाबी उनके साथ चलती रही । लोगों को अब भी याद है कि जिस समय बिलासपुर कलेक्टर के पद पर उनकी पोस्टिंग हुई थी, उस समय पेण्ड्रारोड में लाइफ लाइन एक्सप्रेस का मुकाम था। तब लगातार वहां संपर्क में रहकर आर पी मंडल ने टीम वर्क के साथ कुछ इस तरह काम किया कि आस पास इलाके के जरूरतमंद लोगों को इलाज की सुविधा मिली । जो आज भी यादगार है। बिलासपुर के लोग अब भी नहीं भूले हैं कि शहर के विकास पर मंथन के लिए आर पी मंडल ने बिलासा गुड़ी में प्रमुख लोगों की एक मीटिंग बुलाई थी। जिसमें प्रमुख मुद्दों पर चर्चा कर शहर के विकास की दिशा तय की गई । आर पी मंडल चाहते थे कि कोई ऐसा सुझाव सामने आए जिस पर तुरत काम शुरू हो और उसे समय रहते अंजाम तक पहुंचाया जा सके ।

इस दौरान सुझाव आया कि सीमेंट की खाली  बोरियों में रेत भरकर अरपा नदी में पानी रोका जा सकता है। मंडल साहब को यह बात जम गई और मीटिंग के बाद सीधे अरपा पहुंचकर आगे की योजना बना ली गई । दूसरे दिन सुबह से वे कुछ लोगों को साथ लेकर पहुंचे और रेत की बोरियां रखने की शुरूआत हो गई । इसके बाद तो यह बिलासपुर का जन अभियान बन गया । रोजाना सुबह आम लोगों के साथ स्कूली बच्चे अरपा तट पर पहुंचने लगे। एक –एक हाथ लगाकर लोग रेत की बोरियां जमाते गए और एक दिन आया जब रेत की बोरियों की बनी दीवार से अरपा की धार रुक गई।

उस दिन लगा था कि बिलासपुर शहर के लोगों में बहुत कुछ कर गुजरने का जज्बा है , जरूरत है तो सिर्फ उसे एक दिशा देने की  और मंडल साहब ने यह काम कर दिखाया था। इस जन अभियान से प्रभावित होकर उस समय के मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने अरपा पर चेकडेम की बरसों पुरानी मांग को मंज़ूरी दी और रिकॉर्ड समय में चैकडेम भी बनकर तैयार हो गया ।

मंडल साहब के कार्यकाल में कानन पेंडारी का भी कायाकल्प हुआ। वहां नए निर्माण हुए और इसकी एक अलग पहचान बनी, जो आज भी कायम है। उनके दौर में ही कानन पेंडारी के बाजू की खाली ज़मीन पर स्मृति वाटिका तैयार हुई । पौधे इस तरह लगाए गए , जो आज एक जंगल का रूप ले चुके हैं। इसी तरह अरपा तट पर छठ घाठ के नज़दीक भी पौधरोपण हुआ , जहां की हरियाली आज भी लोगों को आकर्षित करती है। आर पी मंडल के कार्यकाल में ही छत्तीसगढ़ भवन आकार ले सका । उस दौर में कंपनी गार्डन के कायाकल्प का भी काम हुआ था। पुराने बसस्टैंड के पास राजीव प्लाज़ा का भी ख़ाका उस समय ही तैयार हुआ था, जो आज शहर का प्रमुख व्यावसायिक केन्द्र है। इस तरह विकास के चौतरफा काम उस समय हुए । जिसकी ख़ास बात यह रही कि योजनाए कागज़ पर नहीं ….. ज़मीन पर नज़र आईं और लोगों तक यह मैसेज़ पहुंचा कि अगर इरादा हो तो हक़ीक़त की जमीन पर भी काम किया जा सकता है।

इस ख़ास अँदाज की वज़ह से ही  बिलासपुर शहर के कई लोगों के साथ मंडल साहब का गहरा नाता जुड़ गया था, जो आज भी बरकरार है। मंडल साहब ने उसे हमेशा जिंदादिली के साथ जिंदा रखा ।  चीफ सेक्रेटरी के रूप में नई जिम्मेदारी मिलने के बाद अब बिलासपुर के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि नई पारी में भी मंडल साहब के कामकाज की अपनी अलग छाप बरकरार रहेगी ।

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