मंत्री के तेवर से सहमा प्रशासन…आनंद किसपोट्टा को फटकार..दो घंटे बाद मिली राहत

ajay_chandrakar_index_aprailबिलासपुर— छत्तीसगढ़ पंचायत ग्रामीण विकास लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण चिकित्सा शिक्षा मंत्री अजय चंद्राकर ने दोपहर को कलेक्ट्रेट स्थित सभागार में लोक सुराज समीक्षा बैठक ली। बैठक के दौरान अधिकारी कभी बगल तो कभी नीचे झांकते पाए गए। आधी अधूरी जानकारी होने पर प्रभारी मंत्री ने एक एक कर सभी अधिकारियों को फटकारा।  नाराज प्रभारी मंत्री ने महिला एवं बाल विकास अधिकारी से बात नहीं करने को कहा।

               बुधवार को जिला प्रभारी मंत्री अजय चन्द्राकर ने मंथन  सभागार में लोकसुराज की समीक्षा बैठक ली। मंत्री अजय चंद्राकर ने महिला बाल विकास विभाग अधिकारी आनंद किस्पोट्टा को जमकर फटकारा। आनंद किसपोट्टा ने मंत्री के किसी सवाल का जवाब ठीक से नहीं दिया। आंगनबाड़ी केन्द्र में कितनी गर्भवती महिलाओं को दूध दिया जा रहा है..पौष्टिक आहार कितनी महिलाओं को मिल रहा है। उन्होने किसपोट्टा से योजनाओं से लाभ लेने वाले हितग्राहियों के आंकड़ें मांगे। लेकिन आनंद किसपोट्टा ने किसी भी सवाल का जवाब ठीक से नहीं दिया। जो दिया वह भी संतोषजनक नहीं था।

                               नाराज प्रभारी मंत्री ने अानंद किसपोट्टा को जमकर फटकारा। उन्होने कहा कि ऐसे अधिकारियों से बात नहीं करना चाहूंंगा। बेहतर हो कि यहां से चले जाएं या फिर चुप बैठे।  स्वास्थ्य मंत्री ने श्रम विभाग अधिकारी अनिता गुप्ता को भी नहीं छोड़ा। योजनाओं की सही जानकारी दिए जाने से नाराज मंत्री ने जमकर फटकारा।

                                                    प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारी से सही जानकारी नहींं मिलने पर नाराज मंत्री ने शलभ सिन्हा को बैठक से बाहर निकाल दिया। सिन्हा ने चिटफंड कंपनियों खिलाफ हुई कार्रवाई की संतोष जनक जानकारी नहींं दी। नाराज मंत्री ने शलभ सिन्हा को बैठक में तैयारी के साथ आने को कहा।

                   मंत्री अजय चंद्राकर ने समीक्षा बैठक में कोटा एसडीएम के बारे में भी पूछा। कलेक्टर अन्बलंगन पी ने बताया कि कोटा एसडीएम ने प्रतिनिधि को भेजा है। जवाब सुनते ही मंत्री गुस्से से भर गए। उन्होने बैठक के दौरान कोटा एसडीएम प्रतिनिधि की तरफ देखा तक नहीं।

                                         समीक्षा बैठक के दौरान प्रभारी मंत्री ने अधिकारियों से शासन की योजनाओं के बारे में एक एक कर सवाल किया। अधिकारियों ने  आंकड़ा पेश करना शुरू कर दिया। नाराज मंत्री ने कहा कि योजना के बारे में पूछ रहा हूं…आप लोग आकडें बता रहे हैं। क्या इसी तरह काम किया जाता है।

           करीब दो घंटे चली समीक्षा बैठक में पूरे समय अधिकारी बगले झांकते रहे। कमोबेश सभी अधिकारी के नजरों से बचते रहे। मंत्री अजय चन्द्राकर ने कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में लारपवाही बर्दास्त नहीं की जाएगी। यदि किसी ने नसीहत को गंभीरता से नहीं लिया तो वह परिणाम के लिए तैयार रहे।

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