मेरा बिलासपुर

मरवाही कन्या….शाला यातना गृह की कहानी

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(भास्कर मिश्र की रिपोर्ट)बिलासपुर—जिला मुख्यालय से 120 किलोमीटर दूर मरवाही ब्लाक का एक मात्र कन्या उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय की हालत काफी बदतर है। शाला की हालत की हालत ठीक नहीं है इस बात की जानकारी जिले के सभी आलाधिकारियों को है। अलग बात है कि सभी अधिकारी हमेशा की तरह यहां भी जानकारी का ना होना ही बताते हैं। चाहे शिक्षा विभाग हो या कमिश्नर कार्यालय, जिला पंचायत हो या कलेक्टर कार्यालय सभी को पता है कि कन्या उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय मरवाही की स्थिति बद से बदतर है। स्थानीय लोगों ने कई बार प्रशासन का ध्यान इस ओर दिलाने के लिए व्यक्तिगत और पत्र व्यवहार के जरिए दिलाने प्रयास किया है लेकिन प्रशासन ने शिकायतों को कभी गंभीरता से नहीं लिया।

                 जिला मुख्यालय बिलासपुर से लभगग 120 किलोमीटर दूर मरवाही ब्लाक का एक मात्र कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गर्व करने लायक हो सकता था। लेकिन ऐसा न होकर ब्लाक का एकमात्र कन्याशाला भ्रष्टाचार और बदहाली का भेंट चढ़ गया है। स्कूल में माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालय को मिलाकर कुल 867 छात्राएं पढ़ती हैं। लेकिन 46 की इस भवन में ना ढंग से बैठने की व्यवस्था है और ना ही शौचालय और पीने के पानी का इंतजाम ही ।

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                     बाऊंड्रीवाल नहीं होने का फायदा सीधे असामाजिक तत्वों को मिलता है। देर रात जाम का दौर चलता है। जिसके प्रमाण यहां कभी भी देखने को मिल सकता है। बिना दरवाजे के स्कूल में मवेशी भी कुछ पल के लिए आराम फरमाते नजर आ जाते हैं। स्कूल की रखवाली करने के लिए शासन ने एक चौकीदार को नियुक्त किया है। लेकिन वह भी असामाजिक तत्वों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलता है।

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               मरवाही बिलासपुर जिले का आदिवासी बहुल्य ब्लाक है। आदिवासी क्षेत्र होने के कारण सरकार द्वारा क्षेत्र को विशेष हैसियत भी हासिल है। यहां बैगा विकास के लिए कई योजनाएं भी संचालित हैं। लेकिन काम कहीं दिखाई नही देता है। कुछ ऐसी ही हालत शिक्षा क्षेत्र की भी है। 15 अगस्त साल 2014 में ब्लाक का सबसे बड़ा कन्याशाला का उद्घाटन पूर्व मुख्यमंत्री अजीत प्रमोद जोगी ने किया। जानकारी के अनुसार ब्लाक के सबसे स्कूल में 46 लाख रूपए खर्च हुए हैं। जमीन कम होने के कारण बाद में निर्णय लिया गया कि स्कूल पूर्वनियोजित 11 कमरों का लेकिन दो मंजिला होगा। छात्राओं को ध्यान में रखते हुए तीन लाख रूपए का एक शौचालय का भी निर्माण कराया जाएगा। स्कूल के चारो तरफ बाऊंड्रीवाल होगा। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। 11 कमरों का घोषित स्कूल 6 कमरों तक ही सिमट कर रह गया। जिम्मेदार लोगों का कहना है कि शौचालय की आधी रकम से जगह कम होने कारण छत पर एक बड़ा हाल बनवाया गया है। पुराने शौचालय को 1 लाख 70 हजार रूपए खर्च कर नया स्वरूप दिया गया है। सीजी वाल की टीम ने जब एक लाख सत्तर हजार का शौचालय देखा तो व्यवस्था की सारी पोल खुद बखुद खुल गयी।

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                  शौचालय कब बना इसकी जानकारी किसी को नहीं है। शौचालय के नाम पर स्कूल में जर्जर तीन दीवार है। ऊपर से खुले इस शौचालय में टंकी का कोई नामोनिशान  नहीं है।  दीवार कब गिर जाए कहा नहीं जा सकता । स्कूल के एक मास्टर ने बताया कि जब लड़कियां शौच करने जाती हैं तो शाला के ही दो एक शिक्षक आसपास निगरानी का काम करते हैं।  छत पर कोई ना हो इसका भी ध्यान रखा जाता है। शिक्षक अरूण ने बताया कि स्कूल में दरवाजे नहीं है मवेशी आकर गंदगी करते हैं। सुबह इस गंदगी को या तो छात्राएं साफ करती हैं या फिर चपरासी। अरूण ने बताया कि बाऊंड्रीवाल नहीं होने से खुले दरवाजे वाले स्कूल में पढ़ाई के दौरान छात्राओं को काफी दिक्कत होती है। शाला के प्रांगण में मंदिर होने से सुबह शाम शोर का वातावरण तैयार हो जाता है।

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                  सीजी वाल की टीम ने देखा कि बिना दरवाजे वाले स्कूल में जगह-जगह गोबर के निशान हैं। नए फर्नीचर कबाड़ की तरह रखे हुए हैं। उसी कबाड़ के बीच छात्राएं पढ़ाई भी करती हैं। हमेशा डर बना रहता है कि किसी छात्रा के साथ कोई अनहोनी ना हो जाए। आश्चर्य की बात तो यह है कि 867 छात्राओं की पढ़ाई मात्र 5 कमरे में संचालित होती है। एक कमरा प्राचार्य के लिए है। ऊपर का हाल जिसे शौचालय निर्माण के बाद शेष रकम से बनवाया गया है उसमें स्टाफ बैठता है। बच्चे जब घंटी बजने के बाद कक्षा में लौटते हैं तो आधा घंटा बैठने की व्यवस्था में खर्च हो जाता है। दिन में ऐसा तीन बार होता है। जाहिर सी बात है कि मैनेजमेन्ट के इस खेल में डेढ़ से दो घंटे छात्राओं के बरबाद हो जाते हैं।

                               पेन्ड्रा के एक युवा नेता महर्षी गौतम ने बताया कि स्कूल निर्माण में भारी भ्रष्टाचार हुआ है। कभी किसी ने किसी से प्रश्न नहीं किया कि 06 कमरों का स्कूल 11 कमरों का कब होगा। यदि नहीं होगा तो 46 लाख रूपए कहां खर्च हुए। जब मैं पूछता हूं तो लोग मुंह बंद करने की धमकी देते हैं। इस बिषय में मैंने कई बार सीईओ, कलेक्टर शिक्षा अधिकारी को अवगत भी कराया है। बावजूद इसके किसी ने ध्यान देने की कोशिश भी नहीं की। जाहिर सी बात है कि स्कूल निर्माण में भारी भ्रष्टाचार का खेल हुआ है।

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          स्कूल में पानी की व्यवस्था भी ठीक नहीं है। एक मात्र टेप नल जो जमीन से 6 इंच ऊपर है जिसके नीचे गिलास तक लगाना मुश्किल है। इसी से सभी छात्राएं अपना गला तर करती हैं। स्कूल शिक्षक अरूण के अनुसार पानी व्यवस्था के लिए कई बार लिखा पढ़ी हुई है। लेकिन हमेशा की तरह यहां भी उस लिखा पढ़ी का कोई अर्थ नहीं निकला। अब तो लोगों ने कहना और लिखना भी बंद कर दिया है।

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               स्कूल में एक पुराना एडूसेट रूम भी है। इस रूम में करीब 7 कम्प्यूटर कितने साल से रखे हुए हैं खुद उस कमरे में बैठने वाले शिक्षक को ही नहीं पता। जानकारी के अनुसार अब सभी कम्प्यूटर सामान्य डिब्बे से अधिक कुछ नहीं है। शायद अब कबाड़ी भी उसे लेना पसंद ना करें। ऐडूसेट रूम में लगा कम्प्यूटर चालू हालत में तो है लेकिन कब बन्द हो जाता है और कब चालू…कहना मुश्किल है। जब ठोक पीट की जाती है तो कम्प्यूटर बेशर्मी छोड़कर चलना शुरू कर देता है। इसके लिए शिक्षक कम आपरेटर को लगभग आधा घंटा इंतजार करना पड़ता है। कमरा भी शीलन से भरा हुआ है। जिसे कम्प्यूटर रूम के लिए किसी भी सूरत में मूफीद नहीं कहा जा सकता है।

                        IMG_20150608_165853     मरवाही ब्लाक के सबसे बड़े कन्या उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय में स्टाफ की भारी कमी है। कुल 21 शिक्षकों के स्टाफ में मात्र 16 शिक्षक ही स्कूल में पठन पाठन का काम करते हैं। इनमें से सात शिक्षाकर्मी भी शामिल हैं। एक शिक्षाकर्मी लेखापाल का काम करता है। यह जानते हुए भी स्कूल में शिक्षकों की कमी है। विद्यालय का लेखापाल कमिश्नर कार्यालय बिलासपुर में अटैच है। सीजी वाल को इसकी जानकारी नहीं है कि स्कूल का लेखापाल कमिश्नर कार्यालय में आखिर क्यों अटैच है। जबकि उनकी सबसे ज्यादा जरूरत कन्याशाला को है।

स्वस्छ शौचालय उत्सव

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        मेरे संज्ञान में यह सब पहली बार आया है। मैं विद्यालय देखने जाऊंगा। शौचालय निर्माण में कितना खर्च हुआ है इसकी जांच होगी। स्कूल भवन 11 कमरे का होना चाहिए यदि यह सही है तो पता लगाएंगे कि 6 कमरे ही क्यों बने। 46 लाख रूपयें कहां खर्च हुए इसकी जांच होगी। दोषी के खिलाफ कार्रवाई भी होगी। शौचालय क्यों नहीं बना इस बारे में मै व्यक्तिगत रूप से स्कूल का निरीक्षण करने सोमवार के पहले मरवाही जाऊंगा। यह भी पता लगाऊंगा कि क्षेत्र में ऐसे कितने स्कूल हैं जहां शौचालय बाऊंड्रीवाल और साफ पानी की व्यवस्था नहीं है। 867 छात्राएं स्कूल में पढ़ती हैं यदि ऐसा है तो छात्रों को गर्दी में बैठाना ठीक नहीं। पढ़ाई प्रभावित होती है। इसके लिए पुराने भवन में कक्षा चलाने की व्यवस्था करेंगे। व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कठोर कार्रवाई करेंगे। हमने जनपद सीईओ से इस पूरे मामले में जानकारी मांगी है। शाला प्रवेश के पहले बाउंड्रीवाल और शौचालय का निर्माण कन्याशाला में कर लिया जाएगा। इस बार शाला प्रवेश सम्पूर्ण शौचालय उत्सव के रूप में मनाया जाएगा।

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              सर्वेश्वर नरेन्द्र भूरे…जिला परियोजना अधिकारी..जिला पंचायत बिलासपुर

लिखा पढ़ी सब बेकार

            स्थानीय नेता महर्षि गौतम ने बताया कि कन्याशाला मरवाही की अव्यस्था को लेकर कई बार लिखा पढ़ी मैने की है। लेकिन उसका कोई अर्थ नहीं निकला। एक तरफ सरकार बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओं की बात करती है। दूसरी तरफ बेटियों के लिए स्कूल में शौचालय की व्यवस्था भी नहीं है। 867 बच्चियों के साथ अन्याय क्यों। अब समझ में आ रहा है कि अभिभावक अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाना पसंद क्यों नहीं करते। लेकिन गरीब के बच्चे जाएं तो जाएं कहां। जहां सुरक्षा नहीं होती वहां बच्चियों के मन में हमेशा दहशत बनी रहती है। मैने कई बार शिक्षा अधिकारी से शिकायत भी की है कि यहां शौचालय नहीं है। बिना दरवाजे का स्कूल होने के कारण मवेशी कमरों में गंदगी करते हैं। शराबी रात में जाम छलकाते हैं। शिकायत के बाद भी किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। सरपंच भी अपने में मस्त रहता है।

                                                                                                                          महर्षि गौतम….युवा नेता पेन्ड्रा

देखने के बाद बताऊंगा

           मुझ तक कन्याशाला मरवाही की अव्यवस्था को लेकर कभी शिकायत नहीं आई। यदि आपके बताये अनुसार गड़बड़ी सामने आती है तो दोषियों पर कार्रवाई होगी। शौचालय और बाऊंड्रीवाल बनाया जाएगा। स्कूल में दरवाजे क्यों नहीं लगे इसकी जांच होगी। शौचालय निर्माण में भ्रष्टाचार बर्दाशत नहीं किया जाएगा।

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                                                                                                                  दीपक साहू..अध्यक्ष जिला पंचायत बिलासपुर

जानकारी नहीं है—   

 मरवाही कन्याशाला में भारी अव्यवस्था है इसकी शिकायत मुझ तक नहीं पहुंची है। आज मेरा स्वास्थ्य ठीक नहीं है। कार्यालय पहुंचते ही मामले को जानने का प्रयास करूंगा। व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए प्रयास किया जाएगा। स्टाफ की कमी है इसे भी दूर करने का प्रयास किया जाएगा।

                                                                                                           हेमन्त उपाध्याय… जिला शिक्षा अधिकारी..बिलासपुर

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