मस्तूरी विधायक डॉ.बांधी ने कहा…भूख से हुई 25 गायों की मौत…सरकार ने चारा खाया…गौ माता का लगेगा श्राप

बिलासपुर— मस्तूरी विधायक ने बताया कि सरकार की ड्रीम प्रोजेक्ट नरवा गरवा घुरवा बारी योजना पूरी तरह से फ्लाप है। देखते रहिए अभी प्रदेश के गौठानों में क्या कुछ होने वाला है। क्योंकि सरकार के पास फण्ड नहीं है। योजना तो बना लिए लेकिन गायों के लिए एक रूपए नही है। सोन लोहर्सी में 25 गायों की मौत भूख से हुई है। क्योंकि सरकार के लोग ही गायों का चारा खा गए। जिसके चलते ही भूखे गायों की मौत हुई है।

                              मस्तूरी विधायक ने आज पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि सरकार की ड्रीम प्रोजेक्ट किताबी है। नरवा गरवा घुरवा बारी योजना पूरी तरह से फ्लाप है। गौठानों की हालत बद से बदतर है। देखते रहिए आने वाले समय में गौठानों की क्या दुर्गति होती है। बांधी ने बताया कि सोन लोहर्सी में 25 गायों की मौत भूख से हुई है। क्योंकि गायों का चारा सरकार के लोगों ने खा लिया है।

               सवाल जवाब के दौरान मस्तूरी विधायक ने बताया कि गायों की मौत का श्राप सरकार के जिम्मेदार लोगों को लगेगा। गायों को दफनाते समय सारी मानवीयता को ताक पर रखा गया। हिन्दू रीति नीति का भी ख्याल नहीं रखा गया। जेसीबी और ट्रैक्टर से गायों को घसीटा गया। गड़्डा खोदकर बेरहमी से दबा दिया गया। इसके साथ ही मौत के कारणों को भी गड्ढे में दफन किया गया है।

                          बांधी ने कहा कि अभी तक जवाबदेही तय नहीं हुई है कि आखिर गायों की मौत के लिए जिम्मेदार कौन है। अधिकारियों की तरफ से रोज अलग अलग बयान आ रहे हैं। कोई कहता है कि मौके पर गौठान नहीं है। कोई गायों की मौत गौठान में होना बता रहा है। कोई मौत का कारण महामारी को तो कोई विषैला पदार्थ को खाने से गायों की मौत हुई है बता रहा है। सच्चाई तो यह है कि गायों की मौत भूख से हुई है। जब गायों को चारा देने के लिए फण्ड नहीं था तो गौठान का निर्माण ही क्यों किया गया। सच तो यह है कि पंचायत और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने गौठान और गाय को रामभरोसे छोड़ दिया। गायों का चारा खुद खा गए।

                           एक सवाल पर बांधी ने कहा कि गौठान अच्छी परिकल्पना है। हमने बेशक तारीफ की है…लेकिन मौत की गौठान की जरूरत नहीं है। एक समय गाव में इंंसान से अधिक पशुओं की संख्या हुआ करती थी। सभी पशुओं को पेट भरता था। अब ऐसा नहीं है। अधिकारियों और सरकार के नेताओं का पेट बड़ा हो गया है। जाहिर सी बात है कि गायों के लिए बजट नहीं है। ऐसे मेंं गौठान की परिकल्पना ही क्यो की गयी।

          बांधी ने बताया कि मुख्यमंत्री को बताना चाहिए कि अब तक गौठान निर्माण के बाद कितना वर्मिपोस्ट कम्पोस्ट तैयार हुआ। उन्हें यह भी बताना होगा कि क्या गौठानों का निर्माम गायों को मारने के लिए किया गया है। गायों की मौत पर बांधी ने बताया कि जिम्मेदार लोगों को गौ माता का श्राप लगेगा।

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