मेरा बिलासपुर

मानवता की दिशा में…एक सार्थक कदम

BHURE_1बिलासपुर— सबकी तरह मै भी ऐसे परिवार हूं…जहां…हर छोटे बड़े घटनाक्रम को आदर्श के सांचे में रखकर देखा जाता था..और आज भी कायम है…। घर से लेकर स्कूल तक… मानव धर्म को…सबसे श्रेष्ठ बताया गया है..। बाद में समझ में आया कि …धर्म.. जीवन पद्धति का दूसरा नाम है..। दुनिया के तमाम धर्मों के बीच…मानव धर्म सबसे महान है…। इस महानता को…मानव ने अपने कर्मों से हासिल किया है…। दूसरों के लिए जीना,,,पर पीड़ा का अहसास करना… ऐसे गुण केवल मनुष्यों में ही देखने को मिलते हैं। जिसने दूसरों का दर्द अपना बनाया….वहीं सच्चा इंसान है..। इंसान ही, एक मात्र प्राणि है…जो तर्पण करता है…अर्पण के लिए हमेशा तत्पर रहता है…कभी परंपरा के नाम पर…तो कभी विश्वबन्धुत्व के नाम पर….। सीजी वाल से ये बातें आईएएस मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ.सर्वेश्वर नरेन्द्र भूरे ने कही।

             डॉ.भूरे ने बताया कि…मानवता ही है..जो हमें.. एक दूसरे से बांध कर रखती है…। ऐसा नहीं होता…तो मनुष्य किसी भी सूरत में…अन्य जीवों से अलग हो ही नहीं सकता था…। मानव ने जो भी परंपराएं स्थापित किये…उसका अर्थ अब धीरे—धीरे समझ में आने लगा है। कभी परंपरा के नाम पर… तो कभी मानवता के नाम पर.. लोग एक दूसरे का सहारा बनते हैं…। सीवीआरयू के कुल सचिव ने भी तर्पण के बहाने वही करने का निर्णय लिया है …जिसकी वजह से एक सामान्य मानव…उत्तम विचारों के साथ.. बड़ा चेहरा बन जाता है।

                    कभी पितृ पक्ष में लोग मांगलिक कार्यो से बचा करते थे। समय के साथ जब मानव की सृजनशीलता बढ़ी.. उसके विचार भी परिष्कृत होते गये। विचारों के परिष्करण से सेवा के नए आयाम सामने आए…। नई परम्पराएं गढ़ीं गयी…। मेरा मानना है कि …जिस परम्परा में गरीबों के लिए दया..छोटों के लिए प्यार..भूखों के लिए रोटी..बड़ों के प्रति सम्मान नहीं है…। ऐसी परम्पराएं मानव समाज के लिए कभी हितकर साबित हो नहीं सकती …।

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                 कुल सचिव शैलेन्द्र पाण्डेय के तर्पण और अर्पण अभिय़ान का मैं मुक्त कण्ठ से सराहना करता हूं…। हो सकता है कि किसी को यह अटपटा लगे…लेकिन मैं इस अभियान में विश्वबन्धुत्व की भावना को देखता हूं…। मैने हर ऐसे अभियान का सम्मान किया है…जिसमें दूसरों के दर्द और पीड़ा को दूर करने के भाव हों..। हमारे समाज में हमेशा ऐसी सोच का स्वगात हुआ है।  इससे लोगों के बीच नजदीकियां बढ़ी हैं…तर्पण के बहाने अर्पण… मानवता की दिशा पर चला गया शैलेश पाण्डेय का सराहनीय कदम है।

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