मेरे बैच के दृष्टिबाधित IAS एमपी में कलेक्टर हैं,हौसला रखें तो कुछ भी नामुमकिन नहीं-कलेक्टर भीम सिंह

राजनांदगांव।जब मैं सोचता हूँ कि किसी तरह की शारीरिक बाधा आपकों मंजिल पाने से रोक सकती है तब मुझे अपने बैचमेट आईएएस जो एमपी के एक जिले में कलेक्टर हैं की सहज ही याद आ जाती है। 99 प्रतिशत तक दृष्टिबाधित होने के बावजूद भी वे लक्ष्य से पीछे नहीं हटे और अपना सपना पूरा किया। कलेक्टर भीम सिंह ने यह बात दृष्टिबाधित लोगों के राष्ट्रीय सम्मेलन में कही। सम्मेलन का आयोजन माहेश्वरी भवन में किया गया था। कलेक्टर ने कहा कि लुई ब्रेल हम सबके आदर्श हैं जिनका आज जन्मदिन है और जिनके जीवन में दृष्टिबाधा थी, इसे उन्होंने अपनी ताकत बनाया और करोड़ों लोगों के लिए ब्रेल लिपि आविष्कृत की जिससे दृष्टिबाधित लोगों का पढ़ना-लिखना आसान हो गया। अभिव्यक्ति के आसान होने से उनके समक्ष जीवन की अनेक चुनौतियां आसान हो गई। कलेक्टर ने हेलन केलर का उदाहरण दिया। वो न सुन सकती थीं, न देख सकती थीं न बोल सकती थीं। फिर भी उन्होंने दुनिया के समक्ष अपनी बुद्धिमŸाा की मिसाल कायम की।

आप में अगर प्रतिभा है तो आपको आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। कलेक्टर ने जिले में कार्य कर रही अभिलाषा, सामर्थ्य जैसी संस्थाओं की प्रशंसा भी की जो इस क्षेत्र में अच्छा काम कर रहे हैं। उन्होंने उदयाचल जैसी सेवाभावी संस्थाओं की भी प्रशंसा की जो दृष्टिबाधा निवारण के क्षेत्र में अच्छा काम कर रही हैं। कलेक्टर ने कहा कि प्रशासन द्वारा दिव्यांगता के चिन्हांकन के लिए विशेष शिविरों का आयोजन किया जा रहा है ताकि लोगों के प्रमाणपत्र बन सके। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों को आगे बढ़ाने एवं उन्हें पूरी सुविधा उपलब्ध कराने प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

कार्यक्रम का आयोजन संस्कार श्रद्धांजलि संस्था ने किया था। संस्था ने इस अवसर पर दिव्यांगजनों के लिए अच्छा कार्य कर रही संस्थाओं एवं व्यक्तियों का सम्मान भी किया। इस अवसर पर दिग्विजय कॉलेज की पूर्व प्राचार्या श्रीमती हेमलता महोबे, क्रांति कार्तिक यादव, उदयाचल क विष्णु लोहिया, किशन जोशी, अशोक मोदी, वेंकटेश राव, सीजी डेंटल कॉलेज टीम, डॉ. विकास अग्रवाल, टीएल देवांगन का सम्मान किया। इस अवसर पर संस्कार श्रद्धांजलि की ओर से सतीश भट्टर ने उपस्थिति के लिए सबका अभिवादन किया। उन्होंने कहा कि चौदह साल से सफलता पूर्वक यह आयोजन किया जा रहा है। पहले यह आयोजन जिला स्तरीय था, अब यह राष्ट्र स्तरीय हो गया है।

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