मेरा बिलासपुर

“……..”मौत की खबर….अपनी कलम से?

roadside_college(रुद्र अवस्थी)बिलासपुर । शहर के एक शख्स ( कोई भी नाम) की एक सड़क हादसे  में  मौत हो गई….। यह दर्दनाक हादसा उस समय हुआ जब वे बीती रात मुंगेली रोड पर अपने घर के पास पैदल सड़क पार कर रहे थे। तभी एक तेज रफ्तार कार ने उन्हे अपनी चपेट में ले लिया ….। और मौके पर ही उन्होने दम तोड़ दिया…।लोगों की मौजूदगी में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया….।”
                 इस तरह की खबरें अक्सर मीडिया पर नजर आती हैं। लेकिन मुझे लग रहा है कि किसी शख्स के नाम पर अपने मौत की यह खबर मैने खुद लिखी है। सचमुच अगर मौत होती तो मैं अपनी कलम से यह खबर नहीं लिख सकता ….। बल्कि किसी और की कलम से लिखी इस खबर को आप सभी इस वक्त पढ़ रहे होते…..। लेकिन आप सभी की दुआओँ से ऐसा नहीं हुआ। लेकिन जो कुछ बीती रात मेरे साथ हुआ, वह मुझ जैसे खबरख्वाह आदमी के लिए इस तरह  की खबर को अहसास करने जैसा ही था।

हुआ यूं कि रात के समय  36 माल के पास के अपने गरीबखाने से सड़क उस पार दवाई दुकान गया था…..। पानी हल्का बरस रहा था। रात अंधेरी थी….।मेरे हाथ में छाता और टार्च था….। दवाई लेकर लौटा ते दवाई की छोटी थैली भी मेरे हाथ में थी….। मेडिकल दुकान से सड़क के दूसरे ओर जाने के लिए कदम बढ़ाते समय मुझे सावधानी का पूरा अहसास था। तभी तो पहले उस्लापुर ओव्हरब्रिज की तरफ नजर मारा…..।दूर तक किसी गाड़ी की बत्ती नजर नहीं आई तो तुरत मुंडी घुमाकर अपनी दाईं ओर ( 36 माल की तरफ) भी नजर मार लिया। उधर से भी कोई गाड़ी नहीं थी। पूरी तसल्ली के बाद कदम  आगे बढ़ाने का मन बना लिया। लेकिन सजगता की सहजता में मुंडी फिर बाईं तरफ यानी ओव्हरब्रिज की ओर घूम गई। जब तक मेरा बायां पैर उठने को तैयार हो गया था।
                               तभी मेरे नजदीक ही नर्मदानगर बाई-पास की ओर से तेजी से आकर एक ऑटो-रिक्शा रुका और ओव्हरब्रिज की ओर से तूफान का रफ्तार से चलकर आ रही एक कार मेरे बिल्कुल करीब नजर आई……। यह ईश्वर की कृपा और आप सभी की शुभकामनाओँ का असर है कि सेकेण्ड्स के भी सौंवे हिस्से में उस पल मेरी आँख-दिमाग और पैर के बीच बिजली की रफ्तार से तालमेल हो गया….और मैने अपना बायां पैर पीछे की तरफ खींच लिया….। मेरी रूह तक हवा का भयावह झोंका देकर वह कार कीचड़ बरसाते हुए कुछ मिलीमीटर-सेंटीमीटर की दूरी से गुजर गई…. और पल भर में सनसनाहट के साथ ओझल भी हो गई….।
           
                                मैने कांपते पैरों से भी सरपट सड़क पार किया और उस छोटे से लम्हे के भीतर यह अहसास भी कर लिया कि ऐसी मौत की खबरें कैसे बनती हैं ? कैसे पल के सौवें हिस्से में एक परिवार अपना एक सदस्य खोकर बिखर जाता है…..? लेकिन यह बात न तो उन तेज रफ्तार फर्राटा भरने वालों को समझ में आती है औऱ न व्यवस्था के जिम्मेदार लोग इसे समझ पाते हैं…..।
                                road_side_3road_sode_2घटना उस जगह की है… जहाँ से कुछ समय पहले ही नर्मदानगर के लिए एक बाई-पास सड़क खोल दी गई है। मुंगेली रोड की बसें और गाड़ियां अब इस ओर से ही चल रही हैं। मंगला चौक और 36 माल के सामने वाहनों का दबाव कम करने के लिए यह बहुत जरूरी भी था। लेकिन बाइ-पास और मेन रोड को जोड़ने वाली जगह पर कोई इंतजाम नहीं किया गया है। स्वाभाविक रूप से उस ओर जाने वाले मुसाफिर सड़क किनारे खड़े होकर बस का इंतजार करते हैं……। तिराहे पर गड्ढे ही गड्ढे हैं..। भीड़ के बीच ऑटो रिक्शा और ठेले….। दूसरी तरफ ओव्हरब्रिज से उतरकर तेज रफ्तार आने वाली फर्राटेदार गाड़ियां….। जो कभी भी-किसी को अपने साथ समेटते हुए आगे बढ़ते रहने पर उतारू नजर आती हैं।
                             अपना शहर जिस रफ्तार से आगे बढ़ रहा है उसके हिसाब से अपने- आप को तैयार करने के लिए न व्यवस्था के जिम्मेदार लोग तैयार हैं और न अव्यवस्था के जिम्मेदार लोग ही तैयार दिखते हैं। शहर की करीब सभी सड़कों पर लोगों की भीड़..गाड़ियों की भीड़…मालवाहक लारियों की रेलम-पेल..कुलाचें भरते किशोर-नौजवानों की हवा से बातें करती मोटरबाइक…सड़क तक फैली दुकानें…उस पर कोकड़ा गाड़िय….। ऐसे में भला पैदल सड़क नापने वाला अपने को कैसे बचाए..रखवाला सिर्फ और सिर्फ ऊपरवाला ही है…।
            अपनी ही मौत पर कोई न तो खबर लिख सकता और ना ही आँसू बहा सकता है…..। लेकिन मैने इस खबर की शुरूआत कुछ इसी तरह की अनुभूतियों के साथ की है…….। मौत को इतने करीब से देखने के बाद दरअसल मुझे लग रहा है कि इस तरह के हादसे के शिकार  होकर दुनिया से बिदा हो चुके लोगों की हसरतों को हाजिर-नाजिर मानकर मैं उनकी ओर से भी शहर की इस बदहाली को दूर करने गुजारिश के चार शब्द लिख सकूँ…..। यह जानते हुए भी कि किसी की मौत के बाद हम उसके जज्बात का अहसास नहीं कर पाते। लेकिन जो जिंदा हैं उनके जज्बात को तो कोई महसूस कर सकेगा…….। यही उम्मीद है………।

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Shri Mi

पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ राजनैतिक खबरों पर पैनी नजर
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