यूपी सरकार का सुझाव-प्राइवेट कंपनी करे ताज महल की देखभाल, अरविंद केजरीवाल बोले- सीएम की कुर्सी भी दे दो

नई दिल्ली: ताज महल के रखरखाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने अपनी ओर से एक विजन डॉक्यूमेंट कोर्ट को सौंपा है. जिसमें योगी सरकार ने सुझाव दिया है कि ताज महल को भी केंद्र सरकार की अडॉप्ट अ हेरिटेज स्कीम के तहत लाया जा सकता है. इस स्कीम में आने के बाद कोई भी पब्लिक या प्राइवेट कंपनी ताज महल के रखरखाव का पूरा ध्यान रखेगी और साफ सफाई का जिम्मा भी उसकी को दिया जा सकता है.यूपी सरकार की ओर से कोर्ट में डाले गए इस विजन डॉक्यूमेंट में पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केंजरीवाल ने कहा है कि कंपनी सीएम की कुर्सी भी को भी गोद ले लें. अगर बीजेपी एक स्मारक को सहेज के नहीं रख सकती है तो सरकार से इस्तीफा दे देना चाहिए. यूपी सरकार की ओर से ताज महल की रखरखाव के लिए 250 पेज के विजन डॉक्यूमेंट को उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त वकील जनरल ऐश्वर्या भाटी ने सुप्रीम कोर्ट को सौंपा.

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में फाइल इस 250 के विजन डॉक्यूमेंट में यूपी सरकार ने ताज महल के रखरखाव के लिए और तरीके बताए हैं. डॉक्यूमेंट में आगरा और उसके सटे जिलों में प्रदूषण को कम करने के साथ ही प्लास्टिक बैन की बात भी कही गई है. योगी सरकार ने ये सुझाव 10,400 स्क्वेयर किलोमीटर क्षेत्रफल के आगरा शहर और ताज ट्रेपेजियम जोन के लिए भी रखे हैं. इस क्षेत्र में ताज महल के साथ-साथ आगरा का किला और फतेहपुर सीकर सहित 40 से अधिक संरक्षित ऐतिहासिक स्थल आते हैं.

इसके अलावा यूपी सरकार ने यह भी कहा है कि वे इस मसले पर स्कूल ऑफ प्लानिंग ऐंड आर्किटेक्चर से भी सलाह ले रही है. योगी सरकार ने कहा है कि संरक्षित ऐतिहासिक स्थलों के साथ-साथ आसपास के इलाकों को अडॉप्ट अ हेरिटेज स्कीम के तहत लाया जाना चाहिए ताकि उन इलाकों में रहने वाले सामन्य नागरिक सुविधाओं में सुधार हो सके. डॉक्यूमेंट ने सरकरा ने कहा कि वे इस मामले पर सभी विभागों से फीडबैक ले रही है.

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