रंग..न हो..भंग कार्यशाला..कलेक्टर ने धैर्य से टाला जा सकता है खतरा.. डॉ.सजल और अटल ने बताया.. लापरवाही सब भर भारी

बिलासपुर— अपोलो अस्पताल ने रंग में न हो भंगः सेफ होली विषय पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। अपोलो सीईओ डॉ.सजल सेन ने बताया कि होली का दिन उत्साह और मौज मस्ती भरा होता है। बडे और बूढ़े सभी लोग त्यौहार को धूमधाम से मनाते हैं। त्यौहार को लेकर बच्चों में खास उत्साह देखने को मिलता है।इस दौरान हम उत्साह में कुछ गलत कर जाते हैं जिसका असर पूरे परिवार पड़ता है। हमें होली उत्साह और उमंग से मनाने के साथ कुछ ऐसा भी करना है कि इसका बुरा असर ना तो परिवार पर पड़े और ना ही समाज पर। 
 
                 अपोलो अस्पताल के बैनर तले रंग में न हो भंग सेफ होली विषय को लेकर कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कलेक्टर डॉ.संजय अलंग, अपोलो अस्पताल के सीईओ डॉ.सजल सेन विशेष रूप से मौजूद थे। डॉ.सजल सेन ने बताया कि रंगो की मस्ती के साथ जब वह उधम चौकड़ी मचाते है तो मां बाप का दिल थोड़ा बैचेन हो जाता है। मौज मस्ती के चक्कर में कही बच्चों के साथ पेरेंट्स की भी होली फीकी न पड़ जाए।  इसके लिये कुछ बातों का ख्याल रखना बहुती जरूरी है।  डॉ.सेन ने बताया कि आपकी जरा सी लापरवाही रंग में भंग का कारण बन सकती है।
 
                 कार्यशाला में प्रेसवार्ता का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथी  बिलासपुर जिला कलेक्टर डॉ. संजय अलंग ने बताया कि दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण हम में धैर्य की कमी है। यदि हम थोड़ा सा धैर्य रखें तो 80 प्रतिशत दुर्घटनाओं को टाला जा सकता है। वर्तमान में हर व्यक्ति जल्द से जल्द अपने गंतव्य तक पहुंचना चाहता है। लेकिन इस दौरान वह तमाम नियमों को ताक पर रख देता है। और मंडरा रहे खतरों को देखने में चूक कर जाता है। और दुर्घटना का शिकार हो जाता है।
 
                डॉ. अलंग के संबोधन से पहले उपसथित लोगों को दुर्घटनाओं से संबधित स्लाइड को दिखाया गया। डॉ.राजकुमार ने बताया कि दुर्घटना में होने वाली मौत और स्थायी अपंगता के इलाज में गोल्डन ऑवर अर्थात शुरू के एक से डेढ घंटे का समय मायने रखता है। यदि इस दौरान मरीज डॉक्टर तक पहुच जाता है तो जिन्दगी की बचने की संभवाना बहुत ज्यादा होती है।
 
            अपोलो हॉस्पिटल  के वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डॉ. राजकुमार ने बताया की होली के समय लापरवाही पूर्वक और  नश की स्थिति में गाड़़ी चलाने की वजह से रोड एक्सीडेंट की संभावनायें बढ़ जाती हैं। सिर और स्पाईन मे गंभीर चोट आने की संभावना बहुत अधिक होती है। होली के अवसर पर इस प्रकार की सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ो मे वृ़द्धी हुई है।
 
        हेलमेट के उपयोग को आवश्यक बताते हुए कहा की कई गंभीर  सड़क दुर्घटनाओं में हेलमेट का उपयोग जीवन रक्षक साबित हुआ है। इस दौरान सड़क दुर्घटनाओं का सामना कर चुके  मरीजो ने अपने विचार व्यक्त किये। सभी ने हेलमेट के उपयोग को जरूरी बताया।
 
                 कार्यक्रम में मौजूद अतिथी अटल श्रीवास्तव ने कहा होली एक ऐसा त्योहार है जिसकी गूंज सिर्फ देश ही नही देश की सीम के बाहर भी है। उन्होने युवाओं से गाड़ी धीमे और नियंत्रण में चलाने को कहा। साथ टाईम मैनेजमेंट पर ध्यान देने की बात कही। साथ ही शराब से दूर रहने और सुरक्षित होली मनाने की सलाह दी।         
 
                    अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. सजल सेन ने कहा की इस बात का हमेषा ध्यान रखे की जब भी आपका छोटा बच्चा रंग या पानी से होली खेले तो घर का कोई न कोई बड़ा सदस्य आसपास जरूर रहे। कैमिकल वाले रंगो का उपयोग करने से बचा जाए। प्राकृतिक रंगों से होली का आनन्द लिया जाए। उन्होने कहा किगुब्बारे के साथ होली खेलने मे मजा तो आता है , लेकिन यह किसी व्यक्ति को चोट का कारण भी बन सकता है। सजल सेन ने कहा कि युवाओं को गाड़ी चलाते समय मोबाईल उपयोग सा बचना चाहिए।

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