राहगिरि डे में पहुंच रही भीड़..आयुक्त

second raahgiri2बिलासपुर— अग्रसेन चौक से सीएमडी चौक के बीच लगातार तीसरी बार राहगिरि डे मनाया जाएगा। राहगिरि डे को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। शहर के सामाजिक संगठन, खेल संस्थान,संगीत प्रेमी और लाफ्टर समेत स्कूली बच्चों के बीच राहगिरि डे का जबरदस्त क्रेज है। पिछले दो रविवार को राहगिरि डे में युवाओं ने ना केवल भाग लिया बल्कि अपनी प्रतिभाओं का परिचय दिया। महापौर से लेकर निगम आयुक्त, कलेक्टर से लेकर संभागायुक्त ने सड़क पर आकर नगरवासियों का उत्साह वर्धन किया।

                                लगातार तीसरे रविवार को सीएमडी चौक से अग्रसेन चौक के बीच राहगिरि डे मनाया जाएगा निगम आयुक्त ने बताया कि हमें राहगिरि डे को लेकर शहरवासियों का जमकर समर्थन मिल रहा है। लोग अपनी प्रतिभाओं के साथ सामने आ रहे हैं। एक दूसरे से हुनर को साझा कर रहे हैं। राहगिरि डे में साहित्य क्षेत्र से लेकर कला क्षेत्र..खेल से लेकर  वाणिज्यिक क्षेत्र के लोग बढ़ चढकर हिस्सा ले रहे हैं। शासकीय कर्मचारियों को भी राहगिरि डे पसंद आ रहा है। रानू साहू ने बताया कि मार्शल आर्ट से लेकर विभिन्न खेल प्रतिभाओं से जुड़े पदाधिकारी और खिलाड़ियों ने राहगिरि डे को काफी गंभीरता लिया है।

                                      रानू साहू ने बताया कि पिछले दोनों रविवार की तरह इस बार भी सुबह साढ़े पांच से साढ़े आठ बजे के बीच राहगिरि डे मनाया जाएगा। सीएमडी चौक से अग्रसेन चौक के बीच आवागमन तीन घंटे के लिए पूरी तरह से बंद रहेगा।  राहगिरि डे में लड़कियां बढ़चढ़र हिस्सा ले रही है। बच्चे स्केटिंग कर लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। निगम आयुक्त ने बताया कि संभाग के आलाधिकारी भी राहगिरि डे का हिस्सा बनकर शहर के हेल्दी वातावरण का आनंद उठाने से नहीं चूक रहे हैं।

                         विरोध की बात को इंकार करते हुए रानू साहू ने कहा कि राहगिरी डे हमारे प्रदेश के लिए नया है। हो सकता है कि लोग इसे समझ नहीं पा रहे हों लेकिन यह भी सच है कि लोगों का जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। राहगिरि डे का मुख्य उद्देश्य भागती जिन्दगी में दो पल ठहरकर अपने और अपनों के लिए सुकुन पैदा करना है। जाहिर सी बात है कि सुबह हम प्रकृति के सबसे करीब होते हैं। जिसका सीधा लाभ राहगिरि के बहाने हमें मिलता है। सबसे बड़ी बात राहगिरि डे के बहाने हमारे परिचय का ना केवल विस्तार होता है बल्कि खुले आसमान के नीचे प्रकृति की गोद में एक दूसरे से औपचारिक हुए बिना अभिव्यक्ति का अवसर मिलता है।

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