रेटिंग में गिरा बिजली विभाग,भूपेश बघेल बोले-CM के पास ऊर्जा विभाग और उपभोक्ता बेहाल

रायपुर।भारत सरकार के उपक्रम पावर फाईनेंस कार्पोरेशन लिमिटेड की वार्षिक रेटिंग में छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी का 31वें स्थान पर गिर जाने पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुये इसे राजस्व वसूली एटी एण्ड सी लास और बिजली चोरी पर प्रभावी रोक नहीं लगा पाने अभी भी लाईन लास 26.64 फीसदी होने का परिणाम निरूपित किया है। भारत सरकार के उपक्रम पावर फाईनेंस कार्पोरेशन लिमिटेड ने राज्यों के बिजली वितरण कंपनियों की वार्षिक रेटिंग जारी की है।

इस रेटिंग में छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी को A+,  A ,  B+ के नीचे B रेटिंग दी गयी है और B रेटिंग पाने वाले राज्यों की कंपनियों में भी सबसे निचला स्थान प्राप्त करते हुये छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी को 31वीं पायदान में स्थान मिला है।

छत्तीसगढ़ सरकार में लगातार मुख्यमंत्री रमन सिंह जी खनिज एवं ऊर्जा जैसे विभागों का प्रभार अपने पास रखे हुये है। परिणाम स्वरूप इन विभागों में भारी गड़बड़ियां एवं भ्रष्टाचार व्याप्त है। बिजली के राजस्व की सही वसूली नहीं हो पाना छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी की रेटिंग गिरने का प्रमुख कारण रहा है। बिजली वसूली की रफ्तार धीमी है। कर्ज भुगतान में देरी और लेखा परीक्षित खातो को अंतिम रूप देने में भी देरी हो रही है।

कर्मचारियों पर व्यय भी बढ़ा है। जब छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के कर्मचारी संतुष्ट नहीं हैं तो यह व्यय क्यों बढ़ा है, इसका जवाब ऊर्जा विभाग का प्रभार सम्हाल रहे रमन सिंह जी को राज्य की जनता को देना चाहिये।

राज्य में ऊर्जा विभाग की दुरावस्था के लिये रमन सिंह को उत्तरदायी ठहराते हुये प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कहा है कि रमन सिंह जी की सरकार ने अपने 14 साल के कार्यकाल में 10 बार बिजली की दरें बढवाईं हैं।

यही नहीं नियामक आयोग ने केवल सुनवाई की औपचारिकता पूरी करते हुए हर बार बढ़ोत्तरी को मंजूरी दी है। 2007-08 में घरेलु उपभोक्ताओं के लिए दर 2.45 रूपए प्रति यूनिट थी जो 2017-18 में बढ़कर 7.15 रुपए हो गई है। इसी प्रकार किसानों से 1 रूपया प्रति युनिट 2007-08 में जो उर्जा शुल्क लिया जाता जो अब बढ़कर पांच रूपए प्रति युनिट हो गया है। आज घरेलू उपभोग की बिजली दर सात रू. और किसान की बिजली दर 5.19 रू. प्रति यूनिट हो गई।

इस प्रकार बिजली की दरों में 300 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई। बिजली दरों की इस लूट के लिये विद्युत विभाग राज्य की जनता के प्रति जवाबदेह है।

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