मेरा बिलासपुर

रेलवे में मनाई गई मुंशी प्रेमचंद की जयंती

35d89cc7-28de-4116-a56a-e5db05a77c61बिलासपुर।शुक्रवार को दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, बिलासपुर के हिंदी प्रशिक्षण कक्ष में हिंदी के प्रख्यात साहित्यकार एवं उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती मनाई गई। इस अवसर पर श्री प्रवीण एन तुराले/उप मुख्य इंजीनियर (निर्माण), राजेन्द्र मौर्य/वरिष्ठ साहित्यकार/बिलासपुर, विक्रम सिंह, वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी तथा विभिन्न विभागों के कुल 18 कर्मचारी उपस्थित थे । कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ प्रवीण एन तुराले/उप मुख्य इंजीनियर (निर्माण) एवं विक्रम सिंह, वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी द्वारा मुंशीजी के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर किया गया। इसके पश्चात उपस्थित कर्मचारियों ने भी उनकेे छायाचित्र पर ससम्मान पुष्प अर्पित किए।

                                  सबसे पहले अपने संबोधन में वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी विक्रम सिंह ने कहा कि प्रेमचंदजी का जन्म 31 जुलाई को हुआ था पर उस दिन रविवार होने के कारण इस कार्यक्रम को आज आयोजित किया गया है। मुंशीजी उपन्यास सम्राट थे, कथा सम्राट थे । उनकी रचनाएं लोगों को हिंदी पढ़ना सिखाती हैं। अतः इस कार्यक्रम के आयोजन से प्रत्यक्षतः एक सरकारी कार्यक्रम का आयोजन हो जाता है तो परोक्षतः राजभाषा हिंदी का प्रचार-प्रसार भी हो जाता है और लोगों को हम पुस्तक पढ़ने के लिए पुस्तकालय तक लाने हेतु प्रेरित करने में भी सफल हो जाते हैं।

                                 आगे उक्त कार्यक्रम में विभिन्न वक्ताओं द्वारा उनकेे जीवनवृत्त एवं रचना-संसार पर तरह -तरह के विचार व्यक्त किए गए। मसलन, खुर्शीद हयात/मुख्य नियंत्रक (कोचिंग) ने कहा कि प्रेमचंद की रचनाओं के पा़त्र आज भी सहज देखने को मिल जाएंगें। ‘‘ बड़े घर की बेटी‘‘ की रचना के 110 वर्ष पूरे हो गए हैं, ‘‘6 सवा सेर गेहूॅं ‘‘ के शंकर को 125 वर्ष हो गए हैं, पर इनके पात्र आज की तेज रफ्तार जिंदगी में अब भी मौजुद हैं । प्रेमचंद की रचनाएं लोगों को अच्छा इंसान बनने के लिए प्रेरित करती हैं । इसी प्रकार राजेन्द्र मौर्य/वरिष्ठ साहित्यकार एवं पी एल जाटवर/वरि. अनुवादक ने भी सारगर्भित विचार व्यक्त किए।

चार नाबालिगों से आठ मोबाइल जब्त

                                कार्यक्रम का संचालन पी.एल.जाटवर, वरि. अनुवादक ने किया । पी.के. गवेल, कनिष्ठ अनुवादक द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के बाद कार्यक्रम समाप्ति की घोषणा की गई। कार्यक्रम को सफल बनाने में राजभाषा विभाग के सभी कर्मचारियों ने सक्रिय योगदान दिया ।

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