रेल बजट– हर बार छला गया बिलासपुर जोन

R_CT_RPR_54_26_SABAK_VIS2_VISHAL_DNGबिलासपुर—रेल बज़ट की तारीख धीरे-धीरे नजदीक आ रही है। इस बार भी दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे यानि बिलासपुर जोन को रेल मंत्री से बहुत उम्मीद है। पिछले बज़टों की बात करें तो छत्तीसगढ़ को अब तक जितनी उम्मीद थी। उससे कहीं कम ही मिला है। हर बार बिलासपुर जोन रेल बज़ट के नजदीक आते ही अपनी जरूरतों के फेहरिस्त को रेल मंत्री तक पहुंचा तो देता है लेकिन जोन को कुछ खास नहीं हाथ नहीं लगता। हर बार छत्तीसगढ़ छला जाता है।

            भारत के 17 रेलवे जोन में बिलासपुर सर्वाधिक आय देने वाले जोन में गिनती होती है। लेकिन इस कमाऊ जोन को अभी तक उम्मीद से अधिक कभी कुछ नहीं मिला है। अभी भी ट्रेनों के विस्तार,नई ट्रेनों के परिचालन,यात्री सुविधा में बढ़ोत्तरी जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए बिलासपुर जोन तरस रहा है। अब तक बिलासपुर जोन की प्रमुख जरूरतों को पूरा नहीं किया गया है।

                 बिलासपुर जोन में बहुप्रतीक्षित बिलासपुर-मुंगेली रेलवे लाइन का काम अंग्रेज जमाने से लटका हुआ है। हर बार जनप्रतिनिधि बैठकों में इसे प्रमुखता के साथ उठाते हैं। लेकिन परिणाम शून्य हासिल होता है। अब तक बिलासपुर-मुंगेली रेल लाइन को लेकर केवल बातें हुई हैं। हर लगता है कि इस रेल लाइन को बजट में शामिल किया जाएगा लेकिन हासिल कुछ नहीं होता है।

                     इसके अलावा न्यायधानी बिलासपुर और राजधानी रायपुर के बीच हर दो घंटे में फास्ट ट्रेन चलाने की मांग पहले कई बार की जा चुकी है। बावजूद इसके इस ओर किसी रेल मंत्री ने ध्यान नहीं दिया है। बज़ट विशेषज्ञों की माने तो हावड़ा के लिए दुर्ग या रायपुर से कोई सीधी ट्रेन नहीं है। जिससे बंगाल और छ.ग के लोगों को बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ता है । मुंबई के लिए भी बिलासपुर से अबतक कोई सीधी ट्रेन नहीं है। रायपुर-पुरी एक्सप्रेस को बिलासपुर तक विस्तार करने की मांग पुरानी है जो अबतक पूरा नहीं किया गया।

                           बज़ट विशेषज्ञ पुरानी लंबित प्रस्तावों पर भी नाराजगी जाहिर करते हैं। मालूम हो कि पिछले बज़ट में बिलासपुर में मेडिकल कालेज,रेलवे नीर कारखाना बनाने की बात कही गई थी। अब तक लोगों को इंतजार है। इस दिशा में कोई पहल होता दिखाई नहीं दे रहा है। यात्रियों की बुनियादी सुविधाओं की हालत बहुत अच्छी नहीं कही जा सकती है। चाहे स्टेशन में साफ पानी की बात करें या फिर जरूरत के अन्य सामानों की…यात्री हमेशा परेशान रहा है।

            पिछले  रेल बज़ट आने से पहले ही किराए में भारी भरकम बृद्धि की घोषणा के बाद से ही वर्तमान सरकार को देश में जगह-जगह विरोध का सामना करना पड़ा रहा था। विशेषज्ञों की माने तो एकसाथ इतनी बृद्धि किसी भी नजरिए उचित नहीं है। किराया बढ़ाना जरूरी भी है तो इसे किश्तों में लाना चाहिए। बहरहाल किराए में बृद्धि की शुरुआती झटके के बाद भी हर बार की तरह बिलासपुर जोन… रेल मंत्री प्रभु से बेहतर बज़ट की उम्मीद करता है। कम से कम ऐसा संतुलित बज़ट जिसमें आम आदमी राहत महसूस करे और ऊपर वालों पर भी प्रभु की कृपा बनी रहे।

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