लोकअदालतःखर्च और समय की बचत,खुश होकर लौटते हैं लोग-जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर

pritinkar+diwakarबिलासपुर– हाईकोर्ट के न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर पत्रकारों से रूबरू हुए। उन्होने प्रति दो महीने में होने वाले लोकअदालत की जानकारी दी। जस्टिस दिवाकर ने बताया कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सरलता के साथ न्याया मिले…सुप्रीम कोर्ट का उद्देश्य है। इसलिए साल में एक बार लगने वाले लोक अदालतों को प्रत्येक दो महीने में लगाया जाना निश्चित किया गया है। यह बातें राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष हाईकोर्ट जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर ने कही।
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                                      पत्रकारों को जस्टिस दिवाकर ने बताया कि लोकअदालत में मोटे तौर पर दो प्रकार के मामलों में सुनवाई होती है। पहले ऐसे मामले जो अदालत में लंबे समय से चल रहे है। दूसरे अन्य में प्रीलिटिगेशन के प्रकरणों को रखा जाता है। प्रीलिटिगेशन मामलों को कोर्ट में पहुंचने से पहले ही लोकअदालत में निराकृत किया जाता है। बैंक लोन.बिजली बिल,पेंशन,कम्पाउन्ड अफेन्स समेत शादी और पारिवारिक सामाजिक प्रकरणों की सुनवाई की होती है।

                                   जस्टिस दिवाकर ने सवालों का जवाब दिया। उन्होने बताया कि कोर्ट की कुछ प्रक्रिया है। कुछ अपनी व्यस्तता है। इसके चलते निर्णय आने में बहुत देरी हो जाती है। सामान्य रूप में देखा जाता है कि छोटी छोटी बातों को इंगो पर लेकर लोग कोर्ट पहुंच जाते है। जबकि मामले को अपने स्तर पर सुलझाया जा सकता था। ऐसे ही मामलों को लोक अदालत में निराकृत किया जाता है।

                                       राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रभारी अध्यक्ष ने बताया कि लोक अदालत में मात्र एक आवेदन भरने के बाद सुनवाई होती है। दोनों पक्षों के सम्मान और इगो का ध्यान रखा जाता है। सुनवाई के समय समाज के जिम्मेदार लोग. न्यायिक अधिकारी और वकील भी मौजूद होते हैं। सभी लोग न्यायायिक प्रक्रिया में जज की भूमिका में होते हैं। सभी लोग दोनों पक्षों के बीच समझौता करवाकर विवादों का निराकरण करते हैं।

                                           जस्टिस दिवाकर ने बताया कि देखने में आया है कि पहले तो लोग कचहरी में देख लेने की बात करते हैं। बाद उन्हें अहसास होता है कि कचहरी तक नहीं आना चाहिए था। क्योंकि छोटी सी सुनवाई में समय के साथ आर्थिक नुकसान बहुत ज्यादा हो जाता है। लेकिन लोक अदालत में दोनों पक्षो को समझाया जाता है। हाथ मिलाकर दोनों पक्षों को राजी खुशी घर लौटाया जाता है।  जस्टिस प्रीतिंकर ने बताया कि चेकबाउन्स भी अपराध है…लोक अदालत में उसका भी निराकरण किया जाता है। लोकअदालत में कोर्ट का काम केवल मध्यस्थता करना है।

                                       जस्टिस प्रीतिंंकर ने एक सवाल के जवाब में बताया कि..लोकअदालत में एक रूपए खर्च नहीं होते है। केश जीतने के बाद जो मामले कोर्ट में लंबित थे। उस कोर्ट पीस को भी  वापस कर दिया जाता है। न्यायधीश ने बताया कि 27 फरवरी की लोक अदालत में 2057,अप्रैल में 1900,8 जून 2017 को 3299 प्रकरणों का निराकरण किया गया। सितम्बर में लोकअदालत का आयोजन किया जाएगा। उम्मीद है ज्यादा से ज्यादा मामलों का निराकरण किया जाएगा।

                                      जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर ने कहा कि मीडिया समाज का जिम्मेदार अंग है। लोगों को समझाएं कि कोर्ट कचहरी से बचें। समय और धन को बचाए। विवादों को लोकअदालत में पेश कर माले को जड़ से खत्म करें।

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