एक मुलाकात

विकास की दौड़ में पीछे छूटा अपनापन-एस.पी.

IMG-20150909-WA0013बिलासपुर— आईएफएस सत्यप्रकाश मसीह देश का ऐसा…चेहरा जिसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पावर लिफ्टिंग का बेताज बादशाह कहा जाता है। कम लोगों को मालूम है कि सरल, सहज स्वभाव के सत्यप्रकाश ने कई बार एशियन और कामनवेल्थ पावर लिफ्टिंग खेल में ना केवल देश का नेतृत्व किया बल्कि सोने और चांदी का बरसात भी किया। खेल रत्न की होड़ और आत्ममुग्धता से मीलों दूर सत्यप्रकाश मानते हैं कि मेरी पहचान बिलासपुर से हटकर हो ही नहीं सकती । सीजी वाल से बातचीत में उन्होंने बताया कि सफल होने के लिए लक्ष्य के साथ जूनुन का होना बहुत जरूरी है।

प्रश्नआप बिलासपुर में कब से है और जुनूनियत की हद तक खेल के प्रति लगाव कैसे हुआ।

जवाब—मै बिलासपुर जिले के पेन्ड्रा से हूं। स्कूल और कालेज की पढ़ाई बिलासपुर में हुई। शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ्य रहने के लिए पिताजी ने शिक्षा के साथ खेल को भी महत्व दिया। धीरे-धीरे बड़ा खिलाड़ी बनने का सपना देखने लगा। घर में खान-पान पर बहुत ध्यान दिया जाता था। पिताजी कहते थे सफल बनने के लिए निरोगी शरीर का होना जरूरी है। उनकी प्रेरणा ने मुझे जूनूनी और पावर लिफ्टर बना दिया।

IMG-20150909-WA0014प्रश्न—पावर लिफ्टिंग को ही क्यों चुना? और भी खेल थे ?

जवाब— बचपन से ही मुझे खेल का शौक था। चाहे कोई भी खेल हो। पढ़ाई में भी ठीक ठाक था। मैने महसूस किया कि पावर लिफ्टिंग एक मात्र खेल है जहां लम्बे समय तक अपने को स्थापित रख सकता हूं। इस बात को ध्यान में रख मैने सीमित संसाधनों में जमकर मेहनत किया। उस समय बिलासपुर में जिम भी नहीं हुआ करते थे। जुनूनी प्रयास से सफलता की सीढियां चढ़ता गया। संघर्ष से मुंह नहीं मोड़ा। कड़ी मेहनत के बाद फेडरेशन कप के दरवाजे तक पहुंचा। इसके बाद अन्तर्राष्ट्रीय मंच साझा करने का अवसर मिला। पिछले साल लासबेगास में पावरलिफ्टिंग के सबसे बड़े आयोजन में देश के लिए तीन गोल्ड मेडल हासिल किया।

VIDEO: CGWALL से बोले विधायक रजनीश सिंह-भूपेश सरकार के बचे हैं अब 40 महीने,कहां है नरवा-गरवा-घुरवा-बारी..?

IMG-20150909-WA0016प्रश्न— देश के लिए कितना मेडल हासिल किया है? आगे आपकी क्या योजना है?

जवाब— मुझे अभी तक एक दर्जन से अधिक अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट में भारत की तरफ से खेलते हुए दर्जनों मेडल हासिल हुए। पुणे और लंदन के कामनवेल्थ खेल में सिल्वर मेडल मिला। ओपन एशियन गेम्स में खेलते हुए मंगोलिया, जापान, उजबेकिस्तान, कोयम्बटूर, में मेडल हासिल किया। विश्व के सबसे बड़े ओपन फेडरेशन पावर लिफ्टिंग टूर्नामेंट में शामिल होने का सौभाग्य मिला। अमेरिका के लासबेगास में तीन गोल्ड मेडल हासिल किया,विश्व रिकार्ड भी बनाया। राष्ट्रीय स्तर ओपन पावर लिफ्टिंग और विभागीय खेल गतिविधियों में हमेशा मेडल मिलता रहा है। फिलहाल मैं कनाडा में होने वाले टूर्नामेंट के लिए पसीना बहा रहा हूं।

प्रश्न– छोटे शहर का व्यक्ति पश्चिमी देशों में अपने को कहां पाता है? क्या कभी बिलासपुर की याद आती है?

जवाब— मैं अपने वतन और शहर से बहुत प्यार करता हूं। विदेश की चकाचौंध ने मुझे कभी प्रभावित नहीं किया। अपने शहर को लेकर मै हमेशा सुपिरियारिटी जोन में रहा। बिलासपुर वासियों जैसी सहजता और सरलता कहीं नहीं है। तिनपनिया, लालभाजी, चावल की याद विदेशों में बहुत सताती है। अरपा की बहुत याद आती है। मेरी पहचान फारेस्ट अधिकारी या फिर अन्तर्राष्ट्रीय खिलाड़ी से पहले बिलासपुर से है। इससे अलग होकर मेरा कोई अस्तित्व नहीं है।

प्रश्न-–विकास के साथ शहर में क्या बदलाव आया ? कैसा होगा कल का बिलासपुर?IMG_20150909_142706

जवाब—बिलासपुर का भविष्य उज्जवल है। हमारा शहर पहले बहुत छोटा हुआ करता था। लोग एक दूसरे को जानते थे। समय के साथ बाहरी राज्यों से लोग आते गये और शहर का विस्तार होता गया। बिलासपुर की तासीर ही ऐसी है जो आया यहीं का होकर रह गया। शहर बढ़ने के साथ ही लोगों में दूरियां भी बढी हैं। बड़े-बड़े उद्योग स्थापित हुए हैं। शहर को हाईकोर्ट, एसईसीएल, एनटीपीसी रेल जोन हासिल हुआ है। महानगरीय कल्चर ने पैर जमा लिया है। हमारा शहर स्मार्ट सिटी बनने वाला है। अब सुनियोजित विकास होगा। हमारे शहर को एयरपोर्ट की जरूरत है। वह भी पूरा हो जाएगा। विकास की दौड़ में हमने बहुत कुछ हासिल किया है, बहुत कुछ हासिल होना बाकी है। लेकिन विकास की दौड़ में हमारे बीच का अपनापन पीछते छूटता जा रहा है।

महिला की उन्नति में भी पुरूष का हाथ...हर्षिता

प्रश्न—नौकरी और खेल में आप किस तरह सामंजस्य बैठाते हैं ?

जवाब— पिछले 25 साल से नौकरी और खेल में सामंजस्य बैठाकर चल रहा हूं। सबकी तरह मुझ पर भी काम का दबाव है। कुछ करने का जज्बा हो तो लक्ष्य आसान हो जाता है। मै सामाजिक और पारिवारिक गतिविधियों से समय चुराकर तीन चार घण्टे अपने खेल को देता हूं। चूंकि मैं देश का इकलौता आईएफएस पावर लिफ्टर हूं। लोगों को मुझसे उम्मीद भी बहुत है। उम्मीदों को पूरा करने में विभागीय साथियों का भी भरपूर योगदान है।IMG-20150909-WA0011

प्रश्न—आप खेल रत्न क्यों नहीं चाहते ? क्या अकादमी खोलने की कोई योजना है ?

जवाब— मेरे पास समय का अभाव है। खेल रत्न के लिए भाग दौड़ की जरूरत होती है। विभाग प्रयास करे तो ठीक..ना करे तो ठीक। यदि समय मिला तो खेल रत्न के लिए भी दावा कर दूंगा। बिलासपुर से पावर लिफ्टर तैयार करना मेरा सबसे बड़ा मकसद है। इस दिशा में प्रयास भी चल रहा है। परिणाम भी एक दिन सामने आ जाएगा। सत्यप्रकाश ने सीजी वाल से एक शेर साझा करते हुए कहा कि…

                                परिंदों को मंजिल मिलेगी यकीनन, यह फैले हुए उनके पर बोलते हैं।

                                  वे लोग रहते हैं खामोश अक्सर, जमाने में जिनके हुनर बोलते हैं।

Back to top button
CLOSE ADS
CLOSE ADS