मेरा बिलासपुर

वेस्ट से बेस्ट बन सकती हैं शहर की सड़कें…..

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           बिलासपुर । अगर वेस्ट से बेस्ट बनाने की मुहिम शुरू की जाए तो बिलासपुर शहर में गौरव-पथ, लिंक रोड, श्रीकांत वर्मा मार्ग, सिविल लाइन, लेहरू चौक से कलेक्टोरेट, सीपत रोड जैसी कई सड़कें सुंदर बनाई जा सकती हैं….। जरूरत है तो स्थानीय कलाकारों के सहयोग और हिस्सेदारी की….। जो समर्पण, लगन के साथ अपने हुनर का इस्तेमाल कर सड़कों को ऐसा सौंदर्य दे सकते हैं कि ये सड़कें अपने बिलासपुर की पहचाल बन सकती हैं । जिसे देखने लोग आएंगे और याद भी रखेंगे….। इसमें बहुत अधिक खर्च भी नहीं आएगा और शहर के कलाकारों के साथ ही आम लोगों का लगाव भी इसके साथ रहेगा..।

      यह मानना है आईटी इंजीनियर और वॉल डिजइनिंग से जुड़े सिर्फ बाइस साल के प्रकाश गर्ग का…। बचपन से ही कला की दुनिया से जुड़े प्रकाश को यह याद नहीं है कि वह कब से कागज और कैनवास पर चित्र उकेरने लगा था। गीत, संगीत,रंगोली,नृत्य, योगा जैसी कलाओँ के शौकीन प्रकाश नें इनर्फेशन टेक्नालॉजी में जीईसी बिलासपुर से बीई किया है। कॉलेज के दिनों में भी अपनी पेंटिग का हुनर दिखाकर वाह-वाही लूटते रहे। बाद में लगा कि अपनी हॉबी को ही पेशा क्यूं न बना ले…। फिर अहमदाबाद से इंटीरियर डिजाइनिंग में शार्ट-टर्म कोर्स भी कर लिया। अब वॉल डिजाइनिंग में काम कर रहे हैं। जो कि इंटीरियर डिजाइनिंग का एक हिस्सा है। वेस्ट को बेस्ट में तब्दील करना प्रकाश का शगल है….। उन्होने वेस्ट टाइल्स से चेयर- टी टेबल तैयार किया है…। रद्दी पेपर से सुंदर मूर्तियां बनाई हैं। कोशिश रहती है कि बेकार चीजों को कैसे बेहतर बनाकर उनका इस्तेमाल सुंदरता बढ़ानें मे किया जाए….। उनकी इस खासियत की वजह से उन्हे देश के कई स्थानों पर पेंटिंग कम्पीटीशन में जज के रूप में बी आमंत्रण मिलता रहा है। पुणे सहित कई स्थानों में उन्होने अपनी पेंटिंग की प्रदर्शनी लगाई है और उनकी पेंटिंग स्पेन,वियतनाम तक गई हैं। लोगो डिजाइनिंग में माहिर प्रकाश के कई लोगो पेटेंट भी हुए है।
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          प्रकाश गर्ग इन दिनों बिलासपुर में ही रहकर वॉल डिजाइनिंग का काम कर रहे हैं। इस ओर भी लोगों का रुझान बढ़ रहा है। आज की जीवन शैली में घर की दीवारों के सौंदर्य की ओर भी लोग रुचि ले रहे हैं। प्रकाश इसके लिए बेहतर डिजाइनिंग करते हैं और उनकी कोशिश रहती है कि कम से कम बजट में दीवारों को सुंदर बनाया जाए। रंगों के चयन में मॉस्टर प्रकाश गर्ग बताते हैं कि कलर पर काफी कुछ निर्भर करता है।  कलर भारतीय और विदेशी सभी तरह की क्वालिटी में मिलते हैं।  इस आधार पर ही बजट बनता है । सरकंडा में एक ऑफिस के जरिए  अपने काम में जुटे प्रकाश गर्ग ने बताया कि  मोबाइल नम्बर 9098662225 पर उनसे सम्पर्क किया जा सकता 
है।
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       एक सवाल के जवाब में प्रकाश ने कहा कि यदि हम जीवन की शुरूआत  में सिर्फ पैसे की सुरक्षा के बारे में सोचेंगे तो हमे वह आनंद नहीं मिल सकता , जिसकी हमें तलाश होती है। ऐसे में यदि किसी कला से जुड़ा व्यक्ति उस कला के ही अपना पेशा बना ले तो जीवन-यापन भी हो सकता है और आनंद भी मिल सकता है ।इसमें थोड़ा वक्त जरूर लग सकता है । लेकिन कामयाबी निःसंदेह मिलेगी। पैसा कमाना बड़ी बात नहीं है- संतुष्टि बड़ी बात है…। गौर करने की बात यह भी है कि प्रकाश ने यह सब कहीं भी सीखा नहीं है। सब कुछ अनायास ही आता गया। जो काम कभी नहीं किया उसे भी कर गुजरने की ख्वाहिश ने प्रकाश को कई कलाओँ का मास्टर बना दिया। उनका मानना है कि बिना कोशिश के कुछ भी नहीं हो सकता। कुदरत की खूबसूरती, भारतीय संस्कृति, और अध्यात्म पर केन्द्रित कला के कुशल चितेरे प्रकाश का नजरिया है कि बहुत अधिक खर्च की बजाय यदि अपने आस-पास की चीजों का इस्तेमाल कर कुछ नया तैयार कर लिया जाए तो उसमें अपनापन भी झलकता है…।
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       प्रकाश अपनी इस सोच को बिलासपुर शहर की बेहतरी और सुंदरता के लिए भी व्यावहारिक और उपयोगी मानते हैं। वे ऐसे नौजवान हैं,जिन्हे अपने बिलासपुर शहर से लगाव और प्रेम है। यही वजह है कि कई बड़ी कम्पनियों से ऑफर मिलने के बाद भी बिलासपुर को ही अपनी कर्म-भूमि के रूप में चुना है। और इस शहर के लिए कुछ करना चाहते हैं। स्कूलों में जाकर बच्चों को पेटिग सिखाना और प्रतिभाओँ को निखारना उनको शौक है। शहर को चौक-चौराहों और सड़कों को  सुंदर-आकर्षक बनाने उनके मन में जोश-उत्साह और प्लानिंग है।उनका मानना है कि शहर की सड़कों को वेस्ट का इस्तेमाल कर बेस्ट बनाया जा सकता है। शहर के सभी कलाकारों को जोड़कर मुहिम शुरू की जाए तो सभी की अपनी कल्पना खूबसूरती के रूप में सार्वजनिक स्थानों पर नजर आने लगेगी।  फिलहाल शहर की एक सड़क पर बस्तर ऑर्ट का प्रदर्शन किया गया है। लेकिन कई अलग-अलग सड़कों पर सुआ, भोजली, रावत- नाच,करमा,खोत-कलिहान, विकास यात्रा की झलक मिले तो यह बाहर के लोगों के लिए भी दर्शनीय और प्रशंसनीय हो सकता है।प्रकाश का मानना है कि अपना घर तो सभी सुंदर बनाना चाहते है और बना भी रहे हैं। लेकिन हर कोई यह भी चाहता है कि अपना शहर भी सुंदर और साफ रहे। सड़क किनारे की दीवारों को भी यदि खूबसूरत बना दिया जाए तो उसे देखकर कोई भी गंदगी नहीं फैलाएगा और शहर साफ-सुथरा रहेगा। जरूरत सिर्फ इस बात की है कि समाज कला के जानकारों को मौका दे कि वे अपनी कल्पना को साकार कर सकें…..।               

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