शंकराचार्य स्वामी श्री निश्चलानंद सरस्वती पेंड्रा प्रवास पर 

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downloadबिलासपुर। जगन्नाथपुरी गोवर्धन मठ के जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी श्री निष्चलानंद सरस्वती जी महाराज दो दिवसीय प्रवास में पेड्रा आ रहे हैं। वे पेंड्रा सजंय चौक के हरीचंद भवन में धर्म सभा में 1 जून को दिव्य उद्बोधन देंगें। इस अवसर पर अखिल भारतीय पीठ परिषद,आदित्य वाहिनी व आनंद वाहिनी के सदस्यों के अलावा अंचल के लोग उपस्थित रहेंगे।

                              जगद्गुरू शंकराचार्य जी के आगमन के बारे में जानकारी देते हुए आदित्य वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष शैलेष पाण्डेय ने बताया कि शंकराचार्य जी का छत्तीसगढ़ से विशेष प्रेम है यहां के लोगों को उनका आशीर्वाद का दर्शन का सौभाग्य मिलता रहता है। अंचल के लिए बड़े सौभाग्य की बात है कि शंकराचार्य जी 2 दिवसीय प्रवास में पेंड्रा आ रहे हैं। दो दिनों तक सभी को उनका आशीर्वाद व सानिध्य प्राप्त होगा। इस दौरान 1 जून को शाम 5.30 पेड्रा के सजंय चौक के हरीचंद भवन में धर्म सभा में उनका दिव्य उद्बोधन होगा। दूसरे दिन चरण पादूका पूजन होगी। श्री पाण्डेय ने कहा कि इस अवसर पर पेंड्रा और आसपास के अंचल के लोग शंकराचार्य जी के दर्शन का लाभ लेने और दिव्य उद्बोधन श्रवण करने के लिए पद्वारें। इसके लिए पूरी व्यवस्था की जा रही है।

                       अधिक से अधिक लोग इस आयोजन में शामिल हों। श्री पाण्डेय का कहना है कि खासकर युवाओं को शंकराचार्य जी के दिव्य उद्बोधन को सुनना चाहिए। जिससे उन्हें शिक्षा के साथ अध्यात्म का ज्ञान हो। युवा अध्यात्म की दृष्टि से हिन्दु धर्म को समझें। शंकराचार्य जी के आगमन को लेकर तैयारियां अब अंतिम चरण में है। आयोजन में अखिल भारतीय पीठ परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आचार्य पं. झम्मन शास्त्री, आनंद वाहिनी के राष्ट्रीय महामंत्री सीमा तिवारी, संदीप पाण्डेय, प्रफूल्ल शर्मा, आदित्व वाहिनी के जिला अध्यक्ष अभिषेक पाण्डेय, मुरारी लाल अग्रवाल, जमुनाप्रसाद जायसवाल, राजेश अग्रवाल, मनोज अग्रवाल, विजय राय, नीरज जैन, निलेश साहू, नीरज साहू सहित बड़ी संख्या में श्रद्वालू उपस्थित रहेंगे।

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cvr shail newमाता-पिता व गुरू देवतुल्य-पाण्डेय
श्री पाण्डेय ने बताया कि युवाओं का धर्म है कि वह अपने माता-पिता और गुरूओं का देवतुल्य सम्मान करें। उन्होने कहा कि माता-पिता के सेवा के बिना इस संसार से मुक्ति नहीं मिल सकती। जीवन यापन की कर्म व्यवस्था के बाद परिवार और समाज के लिए समय निकालना और हमेशा उन्हें देने के लिए कर्म करते रहना युवाओं का धर्म है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देशय केवल अर्थ और काम तक नहीं है। यदि कोई संस्था सिर्फ इसलिए ही शिक्षा देती है तो वह निरर्थक है। पाण्डेय का कहना है कि गणित, भौतिकी और रसायन सहित सभी विषय के पौराणिक और आध्ुनिक महत्व का युवाओं को सिंद्वात एवं समीकरण आज बताए जा रहे हैं, उनका पुराणों में स्पष्ट उल्लेख है। बस उसे समझने की जरूरत है।