शराब फैक्ट्री में 72 घंटे की कार्रवाई,जांच रिपोर्ट लिफाफे में बंद

unnamed (1)बिलासपुर— चार जिलों के आबकारी अधिकारी और उड़नदस्ता प्रभारियों ने धूमा स्थित वाइन पैक्ट्री में 72 घंटे की छापामार कार्रवाई का व्यौरा शासन को भेज दिया है। बताया जा रहा है कि छापामार कार्रवाई में बहुत ज्यादा अनियमितता पायी गयी है। छनकर मिली जानकारी के अनुसार आबकारी की संयुक्त छापामार टीम ने फैक्ट्री में मिले स्प्रिट स्टाक और दस्तावेज में भारी अन्तर पाया है। आबकारी अधिकारियों ने लगातार तीसरे दिन भी मीडिया का फोन नहीं उठाया।

                                   धूमा स्थित वाइन फैक्ट्री पर आबकारी अमले की छापामार कार्रवाई 72 घंटे बाद आपरेशन गुप्त से शुरू होकर आपरेशन गुप्त पर खत्म हुआ। आपरेशन गुप्त कार्रवाई को मीडिया से दूर रखा गया। तीन दिनों तक वाइन फैक्ट्री का कामकाज पूरी तर ठप रहा। तीन दिनों तक फैक्ट्री कर्मचारियों ने बंधक बनकर अधिकारियों की सेवा किया। शुक्रवार को देर शाम रिपोर्ट तैयार होने के बाद कार्रवाई को बंद कर कर्मचारियों को आजाद कर दिया गया।

                                                             तीन दिनों की कार्रवाई में करीब 100 कर्मचारियों ने सुबह की पहली किरण के साथ देर रात तक अनियमितताओं को खंगाला। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार छापामार कार्रवाई का अंदाज बहुत कुछ सीबीआई की तरह नजर था। अधिकारी तक एक दूसरे को एतिहातन जानकारी देने से बचते रहे। 72 घंटे की छापामार कार्रवाई में जिला आबकारी रायगढ़,बिलासपुर,मुंगेली और रायपुर के जिला अधिकारी और कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। कार्रवाई में संभागीय आबकारी उड़नदस्ता और रायपुर संभागीय उड़नदस्ता टीम ने सक्रियता के साथ काम किया।

                                              छनकर मिली खबर के अनुसार आबकारी की जंबो टीम को वाइन फैक्ट्री में भारी अनियमितता मिली है। वाइन फैक्ट्री के उत्पाद से जुड़े सारे दस्तावेजों को संभागीय आबकारी उड़नदस्ता आयुक्त ने जब्त कर लिया है। फैक्ट्री में मदिरा उत्पाद और दर्ज पंजीयन में भारी अंतर पाया गया है। लेकिन अभी तक स्पष्ट नहीं है कि पंजीयन में स्प्रिट उत्पाद ज्यादा दर्ज है या फिर बरामद स्प्रिट की मात्रा दर्ज उत्पाद से ज्यादा है। लेकिन यह सच है कि दर्ज रजिस्टर और बरामद शराब के बीच बहुत ज्यादा अंतर है। बताया जा रहा है कि आशीष श्रीवास्तव ने दस्तावेज के साथ सारे आकंडे आला अधिकारियों को भेज दिया है।

                   छापामार कार्रवाई से राज्य उडनदस्ता को दूर रखा गया। इसकी वजह क्या हो सकती है…इस मामले में अभी तक किसी ने मुंह नहीं खोला है। मालूम हो कि जब भी संभाग के बाहर आबकारी विभाग छापा मारता है तो उसमें राज्य उड़नदस्ता की टीम जरूर होती है। लेकिन धूमा में ऐसा नहीं हुआ। छापामार कार्रवाई रायपुर संभाग की उड़नादस्ता की अगुवाई में हुई। कार्रवाई में चार जिलों के आबकारी कर्मचारी समेत  डेढ़ दर्जन से अधिक राजपत्रित शाअधिकारियों ने हिस्सा लिया।

                                   अंदर से मिली जानकारी के अनुसार जिला आबकारी विभाग के टेबल पर बैठने वाले कर्मचारियो का सरकारी कामकाज के अलावा ठेकेदारो से घनिष्ठ संबध हैं। घनिष्ठ संबधों को पहले ही विभागीय कार्रवाई की जानकारी ठेकेदारों को आसानी मिल जाती है।  धूमा स्थित वाइन फैक्ट्री में छापामार कार्रवाई की जानकारी किसी को नहीं पता है। यहां तक कि बीयर और बार के लायसेंस देने वाले बाबुओं को भी भनक नहीं लगने दिया गया।

                               नाम नहीं छापने की शर्त पर आबकारी अधिकारी ने बताया कि जिला आबकारी विभाग में गोपनीयता नाम की चीज नहीं है। टेबल पर काम करने वाले दो एक लोग अधिकारी का कान भर अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं। ऐसे लोगों का ठेकेदारों से सीधा संबध है। गोपनीय खबरों को सहजता के साथ ठेकेदारों तक पहुंचा दिया जाता है। यही कारण है कि इस बार धूमा स्थित वाइन फैक्ट्री में छापामार कार्रवाई की जानकारी किसी को भी नहीं दी गयी।

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