शहर में प्रधानमंत्री का हमशक्ल…कांग्रेस का कर रहा प्रचार…कहा..डूप्लीकेट होेने से मचा जीवन में उथल-पुथल

बिलासपुर– इन दिनों शहर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हमशक्ल अभिनन्दन पाठक घूम घूम कर कांग्रेस के लिए वोट मांग रहे हैं। अभिनन्दन पाठक ने बताया कि पहले मैने भाजपा के लिए वोट मांगा था। आजकल कांग्रेस के लिए प्रचार कर रहा हूं। अभिनन्दन पाठक ने बताया कि प्रधानमंत्री के हमशक्ल होने का जितना उन्हें फायदा हुआ उतना ही कष्ट से गुजरना भी पड़ा। अब मैं कांग्रेस का कार्यकर्ता हूं। भाजपा से मेरा कोई रिश्ता नहीं रहा।

                प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हमशक्ल अभिनन्दन पाठक को बिलासपुर की जनता आश्चर्य से देख रही है। इन दिनों पीेएम का हमशक्ल बिलासपुर में कांग्रेस का प्रचार कर रहा है। अभिनन्दन ने बताया कि उनके जीवन में 2014 में उथल पुथल हुआ। लोगों ने मुझे अहसास कराया कि मैं प्रधानमंत्री मोदी का हमशक्ल हूं। इसके बाद मैने बनारस में जाकर मोदी के लिए प्रचार प्रसार किया। इस बीच नरेन्द्र मोदी से एक बार मिलने का भी मौका मिला। उन्होेने गले भी लगाया। प्रधानमंत्री बनने के बाद 100 से अधिक बार पत्र व्यवहार किया। जंतर मंतर में धरना प्रदर्शन किया। बावजूद इसके दुबारा प्रधानमंत्री से मिलने का अवसर नहीं मिला।

                      अभिनन्दन पाठक ने बताया कि प्रधानमंत्री अपने मन की बात करते हैं। लेकिन दूसरे की बात को नहीं सुनते। इसलिए उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजबब्बर से मिलने के बाद कांग्रेस का प्रचार करने लगा। मुझे छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी दी गयी है। उसी जिम्मेदारी का निर्वहन करने बिलासपुर आया हूं। लोगों का भरपूर प्यार मिल रहा है। संकेत भी मिल रहे हैं कि पन्द्रह साल बाद प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनेगी।

                                                             अभिनन्दन पाठक ने बताया कि उनका जन्म उत्तरप्रदेश के सहारनपुर में हुआ है। पिछले दो साल से लखनऊ में रहता हूं। उनकी उम्र 70 साल है। मां प्रधान अध्यापिका रह चुकी हैं। अपने राजनीतिक यात्रा के बारे में अभिनन्दन पाठक ने जानकारी दी कि वह सभासद से संसद का चुनाव लड़ चुके हैं। हर बार मिली है। दो बार सहारनपुर में सभासद का चुनाव लड़ा। एक बार संसद का चुनाव लड़कर हारा। सहारनपुर से ही एमएलए का भी चुनाव लड़ा लेकिन हार गया। 2017 में आरपीआई के बैनर से विधानसभा चुनाव लड़ा। लेकिन आयोग ने नामांकन खारिज कर दिया। हाईकोर्ट गया। कोर्ट ने आदेश उनके पक्ष में दिया। यह भी कहा कि चुनाव के बाद मामले का निराकरण गंभीरता से करें। बावजूद इसके आयोग ने कोर्ट के आदेश को गंभीरता से नहीं लिया। आज तक नामांकन खारिज का कारण नहीं बताया।

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